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परंपरागत फसलों पर जलवायु परिवर्तन का असर नहीं

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 29 Sep 2021 10:12 PM IST
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Programme in KVK Lohaghat
लोहाघाट कृषि विज्ञान केंद्र में वर्चुअल माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को सुनते - फोटो : LOHAGHAT
लोहाघाट (चंपावत)। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में हुई गोष्ठी में पर्वतीय क्षेत्रों की परंपरागत (मडुवा, झुंगरा, चौलाई, कुट्टू) फसलों के बीजों को भविष्य के लिए संरक्षित करना चाहिए।
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केंद्र के प्रभारी डॉ. एमपी सिंह ने कहा कि इन फसलों को बढ़ावा देने की जरूरत है। इन फसलों में जलवायु परिवर्तन का अधिक असर नहीं पड़ता है। कम लागत और कम मेहनत से अधिक लाभ लिया जा सकता है। मोटे अनाजों में अधिक सूक्ष्म पोषक तत्व कैल्शियम, आयरन, खनिज लवण अधिक पाए जाते हैं।
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केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सचिन पंत, डॉ. रजनी पंत, डॉ. भूपेंद्र खड़ायत, गायत्री देवी, यूके दिवाकर ने किसानों से मिश्रित खेती को बढ़ावा देने की अपील की। फसलोत्पादन के साथ मशरूम उत्पादन, बकरीपालन, मौनपालन, मुर्गीपालन आदि व्यवसाय अपनाकर आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
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बैठक में किसान सुभाष जोशी, गंगा दत्त जोशी, मदन पुजारी, विक्रम सिंह रावत, कैलाश महर आदि थे। इससे पहले दिल्ली में प्रधानमंत्री ने वर्चुअल गोष्ठी का शुभारंभ किया। इसमें जलवायु अनुकूल किस्में, तकनीकियां और क्रियाएं विषय पर किसानों को जागरूक कर पोषक अनाजों के मूल्य संवर्धन का आह्वान किया गया।
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