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मिट्टी की खराब सेहत ने बिगाड़ी किसानों की सेहत
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कोलीढेक का मृदा परीक्षण केंद्र।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। खेतों में मिट्टी की गिरती सेहत किसानों की सेहत को भी गिरा रही है। मिट्टी की खराब सेहत से किसानों की आमदनी को 2022 तक दुगुनी करने के मोदी सरकार के संकल्प को इस जिले में झटका लगने का अंदेशा है। मिट्टी में कम होते पोषक तत्व नई तरह की चुनौती बन रहे हैं। खेती वाली मिट्टी में तीन अहम पोषक तत्वों की कमी है। ये खुलासा कोलीढेक मृदा केंद्र में हुए परीक्षण में सामने आए।
जिले में 16610 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है। जिसमें तीन साल पूर्व तक करीब 35097 मीट्रिक टन पैदावार होती थी। लेकिन बीते कुछ वर्षों से मिट्टी की कमजोर सेहत से उत्पादन में सात प्रतिशत तक गिरावट होने की बात सामने आई है। कृषि विभाग ने जिले भर में मृदा परीक्षण के लिए 1480 नमूने लिए। इनमें से 571 नमूनों में गंधक, जस्ता और पोटेशियम की कमी पाई गई है। बताते हैं कि इनकी कमी से पौधों की वृद्धि दर में कमी आने से लेकर रोग फैलने के खतरे बढ़ रहे हैं। मुख्य कृषि अधिकारी राजेंद्र उप्रेती का कहना है कि मिट्टी की सेहत को सुधारने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। मृदा परीक्षण नतीजों के मुताबिक जैविक खाद का अधिक उपयोग, फसल को बदल-बदल कर बोने सहित कई उपाय कर खेती से अधिक उत्पादन लिया जा सकता है। ग्राम पंचायतों को निशुल्क पोषक तत्वों की आपूर्ति के साथ ही गांवों के काश्तकारों को जागरूक किया जाएगा।
ब्लाक: सबसे कम पोषक तत्व वाले दो-दो गांव:
चंपावत- सिमिया उरी, रियासी बमनगांव।
लोहाघाट- डुमडाई, पुलहिंडोला।
पाटी- चौड़ाकोट, जनकांडे।
बाराकोट- वल्सों, चामी।
बनबसा में खुली मृदा परीक्षण प्रयोगशाला
चंपावत जिले में इस साल दूसरी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला खुल गई है। कोलीढेक केंद्र के बाद जिले के मैदानी हिस्से बनबसा के पास फागपुर में इस केंद्र को खोला गया है। सीएओ राजेंद्र उप्रेती ने बताया कि इस मृदा परीक्षण केंद्र को बीएडीपी के अंतर्गत लगाया गया है। इस केंद्र से मैदानी क्षेत्र के खेतों की मिट्टी का परीक्षण किया जाएगा।
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कोट
मिट्टी के पोषण बनाए रखने के लिए उत्पादन के तरीके, खाद और अन्य जरूरी जानकारी आमतौर पर किसानों को नहीं रहती है। इसकी पंचायत स्तर पर जानकारी दी जानी चाहिए।
सतीश जुकरिया, मैरोली।
मिट्टी की उर्वरा को बचाए रखने के लिए लोगों को जागरूक करने के साथ मृदा परीक्षण केंद्र बढ़ाए जाने चाहिए। शिविर लगाकर कृषि विभाग को पहल करनी चाहिए।
विक्रम सिंह, ढकना।
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जिले में 16610 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है। जिसमें तीन साल पूर्व तक करीब 35097 मीट्रिक टन पैदावार होती थी। लेकिन बीते कुछ वर्षों से मिट्टी की कमजोर सेहत से उत्पादन में सात प्रतिशत तक गिरावट होने की बात सामने आई है। कृषि विभाग ने जिले भर में मृदा परीक्षण के लिए 1480 नमूने लिए। इनमें से 571 नमूनों में गंधक, जस्ता और पोटेशियम की कमी पाई गई है। बताते हैं कि इनकी कमी से पौधों की वृद्धि दर में कमी आने से लेकर रोग फैलने के खतरे बढ़ रहे हैं। मुख्य कृषि अधिकारी राजेंद्र उप्रेती का कहना है कि मिट्टी की सेहत को सुधारने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। मृदा परीक्षण नतीजों के मुताबिक जैविक खाद का अधिक उपयोग, फसल को बदल-बदल कर बोने सहित कई उपाय कर खेती से अधिक उत्पादन लिया जा सकता है। ग्राम पंचायतों को निशुल्क पोषक तत्वों की आपूर्ति के साथ ही गांवों के काश्तकारों को जागरूक किया जाएगा।
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ब्लाक: सबसे कम पोषक तत्व वाले दो-दो गांव:
चंपावत- सिमिया उरी, रियासी बमनगांव।
लोहाघाट- डुमडाई, पुलहिंडोला।
पाटी- चौड़ाकोट, जनकांडे।
बाराकोट- वल्सों, चामी।
बनबसा में खुली मृदा परीक्षण प्रयोगशाला
चंपावत जिले में इस साल दूसरी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला खुल गई है। कोलीढेक केंद्र के बाद जिले के मैदानी हिस्से बनबसा के पास फागपुर में इस केंद्र को खोला गया है। सीएओ राजेंद्र उप्रेती ने बताया कि इस मृदा परीक्षण केंद्र को बीएडीपी के अंतर्गत लगाया गया है। इस केंद्र से मैदानी क्षेत्र के खेतों की मिट्टी का परीक्षण किया जाएगा।
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मिट्टी के पोषण बनाए रखने के लिए उत्पादन के तरीके, खाद और अन्य जरूरी जानकारी आमतौर पर किसानों को नहीं रहती है। इसकी पंचायत स्तर पर जानकारी दी जानी चाहिए।
सतीश जुकरिया, मैरोली।
मिट्टी की उर्वरा को बचाए रखने के लिए लोगों को जागरूक करने के साथ मृदा परीक्षण केंद्र बढ़ाए जाने चाहिए। शिविर लगाकर कृषि विभाग को पहल करनी चाहिए।
विक्रम सिंह, ढकना।