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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Poor healthcare heavily on accidents

लचर स्वास्थ्य सेवा हादसों पर भारी

Sun, 01 Jan 2017 10:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत Updated Sun, 01 Jan 2017 10:29 PM IST
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मडलक के पास हुए जीप हादसे ने एक बार फिर चंपावत जिले की लचर स्वास्थ्य सेवा को सामने ला दिया। लोहाघाट से करीब 25 किलोमीटर दूर मडलक के घायलों को इलाज के लिए तरसना पड़ा। अस्थि रोग विशेषज्ञ सहित एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर लोहाघाट में नहीं है। स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित हो चुका ट्रॉमा सेंटर चालू हालत में भी नहीं है। इन वजहों से कई घायलों को उच्च केंद्र रेफर करना पड़ा।
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लोहाघाट के पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) अस्पताल की बदहाली से उपजे आंदोलन के बाद अस्पताल को सरकारी स्वामित्व में लाया गया, मगर इससे भी हालात सुधरे नहीं। रविवार को हुए हादसे में अस्पताल पहले बड़े इम्तिहान में फेल रहा। अस्पताल में एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। रविवार को अस्पताल मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.मंजीत सिंह सहित महज दो डॉक्टर के सहारे चल रहा था। अस्थि रोग विशेषज्ञ न होने का खामियाजा एक बार फिर भुगतना पड़ा।
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पांच घायलों को यहां से उच्च केंद्र हल्द्वानी रेफर करना पड़ा। वैसे लोहाघाट ही नहीं, जिले के किसी भी अस्पताल में भी अस्थि रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। एकमात्र अस्थि विशेषज्ञ डा.वीके जोशी टनकपुर में तैनात थे, मगर कुछ दिनों पूर्व उनका तबादला बागेश्वर हो गया। डॉक्टरों की कमी सिर्फ लोहाघाट में हो, ऐसा नहीं है। जिले में भी 94 डॉक्टरों के पद के सापेक्ष करीब 48 ही तैनात है। वहीं सड़क हादसे और अन्य इमरजेंसी के मौकों के लिए बने लोहाघाट, टनकपुर के ट्रॉमा सेंटर भवन हस्तांतरण होने के बावजूद अभी संचालित नहीं हो सके हैं। इन दोनों ट्रामा सेंटरों में दो करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुका है, लेकिन न तो पद सृजित हो सके हैं और नहीं उपकरण मिल सके हैं। इसी तरह ब्लड बैंक भवन बनने के चार वर्ष बाद भी शुरू नहीं हो सका है।
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किमतोली थाने से गुजरी थी ओवरलोड जीप
 दूरदराज के रूटों पर रोडवेज की सेवा न होने से जीप चालकों की मनमानी जारी है। इन रूटों पर जीप चालक जमकर ओवलोडिंग करते हैं। दुर्घटनाग्रस्त जीप में भी जमकर ओवरलोडिंग थी। 10 की क्षमता वाली जीप में ड्राइवर सहित कुल 17 लोग सवार थे। टनकपुर की एआरटीओ रश्मि भट्ट का कहना है कि साल के पहले दिन मां पूर्णागिरि धाम में भारी भीड़ के चलते विभाग इस रूट पर ज्यादा ध्यान दे रही थी। परिवहन विभाग में स्टाफ की कमी से इंफोरसमेंट ठीक से नहीं हो पा रहा है। यह नहीं ओवरलोड जीप पंचेश्वर (किमतोली) थाने के सामने से गुजरी। किमतोली में पुलिस थाना सड़क से लगा हुआ है। पुलिस की हीलाहवाली और सिस्टम की खामी से ओवरलोड जीप को रोकने-टोकने वाला कोई नहीं था, नतीजतन किमतोली से करीब 7 किलोमीटर आगे जाकर जीप खाई में गिर गई। अब नवागत पुलिस अधीक्षक रामचंद्र राजगुरु का कहना है कि ओवरलोडिंग जीप की अनदेखी में पुलिस थाने की भूमिका की जांच की जाएगी।


छह वर्ष में हुई सड़क  दुर्घटनाएं
वर्ष      कुल दुर्घटनाएं   मौतें    घायल
2011       32            15        89
2012       29            18        86
2013       29            16        84
2014       11             08       08
2015       23             08       19
2016       19             15       32

बाक्स (पीडीएफ के साथ)
अमर उजाला ने की थी कमियां उजागर
अमर उजाला लगातार पहाड़ पर यातायात व्यवस्था की कमियां उजागर करता रहता है। 31 दिसंबर 2016 को भी अमर उजाला के पेज तीन पर प्रकाशित ‘टैक्सी चालक यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे’ खबर में टैक्सी चालकों की मनमानी को उजागर किया था। इस खबर के साथ प्रकाशित फोटो में किसी तरह सवारियां ढोई जा रही थी यह दिखाया गया था, बावजूद इसके किसी ने भी इस बाबत ध्यान नहीं दिया और रविवार को इसका खामियाजा पांच लोगों को जान गंवाकर भुगतना पड़ा।
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