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Champawat News: बंजर हो चुकी जमीन को किया हरा भरा
Fri, 21 Apr 2023 11:28 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Fri, 21 Apr 2023 11:28 PM IST
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चंपावत के मानर वन पंचायत में महिलाओं की ओर से विकसित किया गया जंगल।
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चंपावत। जिले के खेतीखान क्षेत्र की महिलाओं ने पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए अपनी मेहनत से मानर वन पंचायत में सघन वन विकसित किया है। मानर ग्राम पंचायत की 100 से अधिक महिलाओं ने भारतीय एग्रो इंडस्ट्रीज फाउंडेशन (बाएफ) के तकनीकी मार्गदर्शन में बंजर हो चुकी गांव समाज की 11.6 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कम समय में ही हरा भरा किया है।
महिलाओं ने वन पंचायत का गठन कर बांज, फल्यांट और उतीस सहित पानी के पोषक 25 से अधिक प्रजातियों के पौधों को रोपे हैं। वन पंचायत मानर की सरपंच भागीरथी देवी के अनुसार वर्ष 2014 में गांव के आसपास पेयजल का गंभीर संकट था। पीने और मवेशियों के लिए पानी जुटाना भी लगातार कठिन होता जा रहा था। तब महिलाओं ने संगठित होकर क्षेत्र में पौधरोपण करने का बीड़ा उठाया। महिलाओं ने बाएफ संस्था के वैज्ञानिकों के सहयोग से पेड़ लगाए। पेड़ों की सुरक्षा कर उनकी उचित देखभाल कर कुछ ही समय में घना जंगल विकसित कर लिया। संवाद
चार गांवों के लिए पेयजल स्रोत विकसित
चंपावत। वन पंचायत की ओर से मानर के जंगलों को सदाबहार रखने के लिए महिलाओं ने हरसंभव उपाय किया है। महिलाएं बारी-बारी से जंगल की सुरक्षा करने जाती हैं। इस दौरान वन पंचायत के नियमों का उल्लंघन करने और पेड़ों को काटने वालों से जुर्माना वसूला जाता है। इस वन के कारण कई स्थानों से पेयजल स्रोत फूट पड़े। बाएफ संस्था खेतीखान के प्रभारी डॉ. दिनेश प्रसाद रतूड़ी ने बताया कि इस वन से क्षेत्र के चार गांवों के लिए पेयजल स्रोत विकसित किए गए हैं। इस जंगल को मॉडल रूप में पूरे राज्य में लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। वन पंचायत की महिलाओं को कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
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महिलाओं ने वन पंचायत का गठन कर बांज, फल्यांट और उतीस सहित पानी के पोषक 25 से अधिक प्रजातियों के पौधों को रोपे हैं। वन पंचायत मानर की सरपंच भागीरथी देवी के अनुसार वर्ष 2014 में गांव के आसपास पेयजल का गंभीर संकट था। पीने और मवेशियों के लिए पानी जुटाना भी लगातार कठिन होता जा रहा था। तब महिलाओं ने संगठित होकर क्षेत्र में पौधरोपण करने का बीड़ा उठाया। महिलाओं ने बाएफ संस्था के वैज्ञानिकों के सहयोग से पेड़ लगाए। पेड़ों की सुरक्षा कर उनकी उचित देखभाल कर कुछ ही समय में घना जंगल विकसित कर लिया। संवाद
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चार गांवों के लिए पेयजल स्रोत विकसित
चंपावत। वन पंचायत की ओर से मानर के जंगलों को सदाबहार रखने के लिए महिलाओं ने हरसंभव उपाय किया है। महिलाएं बारी-बारी से जंगल की सुरक्षा करने जाती हैं। इस दौरान वन पंचायत के नियमों का उल्लंघन करने और पेड़ों को काटने वालों से जुर्माना वसूला जाता है। इस वन के कारण कई स्थानों से पेयजल स्रोत फूट पड़े। बाएफ संस्था खेतीखान के प्रभारी डॉ. दिनेश प्रसाद रतूड़ी ने बताया कि इस वन से क्षेत्र के चार गांवों के लिए पेयजल स्रोत विकसित किए गए हैं। इस जंगल को मॉडल रूप में पूरे राज्य में लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। वन पंचायत की महिलाओं को कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
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