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पिथौरागढ़ जाकर खून दिया, फिर चढ़ा महिला को खून
अमर उजाला ब्यूरो लोहाघाट
Updated Wed, 17 May 2017 10:42 PM IST
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अद्वैत आश्रम मायावती का धर्मार्थ अस्पताल नरसिंहडांडा गांव की गरीब महिला के लिए वरदान बना। खून की कमी से मरणासन्न हाल में पहुंची महिला को स्थानीय स्तर पर खून चढ़ाकर नया जीवन दिया गया। महिला का हीमोग्लोबिन 4 कम हो गया था। तीन लोगों ने 62 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ जाकर खून दिया। फिर खून की बोतल लाकर मायावती अस्पताल में महिला को तीन यूनिट खून चढ़ाया गया।
नरसिंहडांडा की गरीब परिवार की निर्मला देवी (22) पत्नी विपिन कुमार खून की कमी से बेहद कमजोर और बीमार हो गई थी। इलाज के लिए उन्हें नाजुक हालत में अद्वैत आश्रम लाया गया। अस्पताल के प्रभारी स्वामी एकदेवानंद जी के प्रयासों से आश्रम में पुंडुचेरी से आए डा.दयाशंकर दुबे और गुजरात से आए डा.हरेश शाह ने महिला के इलाज के दौरान पाया कि सबसे पहले महिला को खून चाहिए।
महिला इस हालत में थी कि उसे कहीं बाहर भी नहीं भेजा जा सकता था इसलिए अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों ने उसके लिए बरेली और दिल्ली से दवाइयां मंगाकर इलाज जारी रखा। महिला की हालत बिगड़ती देख आश्रम के संन्यासी स्वामी नरसिंहानंद, मुंबई से आए अतिथि श्रीमाने और आश्रम के स्वयंसेवक त्रिभुवन उपाध्याय ने पिथौरागढ़ जाकर रक्तदान किया। क्योंकि चंपावत जिले में खून स्टोरेज की कोई व्यवस्था नहीं है। तब कहीं महिला के लिए खून का इंतजाम किया गया। डॉक्टरों ने संसाधनों की कमी के बावजूद निर्मला को खून चढ़ाया। इसके बाद से निर्मला की हालत बेहतर है। निर्मला के परिजनों ने नया जीवन देने के लिए आश्रम के प्रति आभार जताया है।
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नरसिंहडांडा की गरीब परिवार की निर्मला देवी (22) पत्नी विपिन कुमार खून की कमी से बेहद कमजोर और बीमार हो गई थी। इलाज के लिए उन्हें नाजुक हालत में अद्वैत आश्रम लाया गया। अस्पताल के प्रभारी स्वामी एकदेवानंद जी के प्रयासों से आश्रम में पुंडुचेरी से आए डा.दयाशंकर दुबे और गुजरात से आए डा.हरेश शाह ने महिला के इलाज के दौरान पाया कि सबसे पहले महिला को खून चाहिए।
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महिला इस हालत में थी कि उसे कहीं बाहर भी नहीं भेजा जा सकता था इसलिए अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों ने उसके लिए बरेली और दिल्ली से दवाइयां मंगाकर इलाज जारी रखा। महिला की हालत बिगड़ती देख आश्रम के संन्यासी स्वामी नरसिंहानंद, मुंबई से आए अतिथि श्रीमाने और आश्रम के स्वयंसेवक त्रिभुवन उपाध्याय ने पिथौरागढ़ जाकर रक्तदान किया। क्योंकि चंपावत जिले में खून स्टोरेज की कोई व्यवस्था नहीं है। तब कहीं महिला के लिए खून का इंतजाम किया गया। डॉक्टरों ने संसाधनों की कमी के बावजूद निर्मला को खून चढ़ाया। इसके बाद से निर्मला की हालत बेहतर है। निर्मला के परिजनों ने नया जीवन देने के लिए आश्रम के प्रति आभार जताया है।
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