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पहाड़ में सुअर और मैदान में हाथी कर रहे नाक में दम
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रौसाल में जंगली सुअर के हमले से बर्बाद फसल। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। नेपाल सीमा से लगे रौसाल गांव की मिट्टी सोना उगलती है, लेकिन इस उपजाऊ जमीन पर जंगली जानवर किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। घाटी के इन इलाकों में फसल तैयार होने को है, लेकिन रात के वक्त जंगली सुअर इन फसलों को रौंद रहे हैं। ये नौबत अकेले रौसाल की ही नहीं, बल्कि लधिया, तल्लादेश, तल्लापाल सहित कई अन्य इलाकों की भी है। इन क्षेत्रों में जंगली जानवर नई मुसीबत बन गए हैं।
मोदी सरकार का लक्ष्य 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का है, लेकिन इस लक्ष्य को पूरा करने में कई अड़चनें हैं। सुविधाओं की कमी ही नहीं जंगली जानवर भी आफत बन रहे हैं। ये जानवर किसानों की मेहनत को एक झटके में बर्बाद कर रहे हैं। कई जगह किसान रात में पहरेदारी करने पर भी फसल को नहीं बचा पा रहे हैं। इसके चलते लोग खेती से कन्नी काटने लगे हैं। किसानों की बर्बाद होती मेहनत का कोई इलाज भी अभी तक नहीं खोजा जा सका है। फसलों को तबाह करने के साथ ही मवेशियों के लिए बोए गए चारे को भी सुअर बर्बाद कर रहे हैं।
जिले में 16610 हेक्टेयर खेती योग्य क्षेत्र में करीब एक-चौथाई हिस्सा जंगली जानवरों की चपेट में है। पहाड़ में जंगली सुअर, तो मैदानी क्षेत्रों में हाथी खेती के लिए खतरा बन रहे हैं। वहीं मुख्य कृषि अधिकारी राजेंद्र उप्रेती का कहना है कि किसानों को जानवरों से नुकसान न होने वाली फसल को बोने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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मैदान में सफल हो रहा सौर तारबाड़ का प्रयोग
चंपावत। जिले के मैदानी हिस्से टनकपुर में हाथियों के उत्पात से बचाने के लिए वन विभाग ने करीब डेढ़ साल पहले सौर ऊर्जा की तारबाड़ लगाई है। इससे गैडाख्याली और थ्वालखेड़ा के गांवों में हाथियों का खतरा कम हो रहा है। इन लटके तारों के संपर्क में हाथियों के आने से करंट के झटके से हाथी पीछे हो जाते हैं। वन विभाग का कहना है कि क्षेत्र के तीन और गांवों को भी इस योजना से जोड़ने का प्रस्ताव है।
कोट
दिन में खेतों में फसल की बुआई, देखरेख और कटाई में मेहनत होती है, तो रात के वक्त फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए जगना पड़ रहा है। जंगली जानवरों से बचाव के लिए समग्र नीति बनाई जाए।
हीरा सिंह कुंवार, किसान, रौसाल।
कोट
सुअर रात में फसल को नुकसान पहुंचा झटका दे रहे हैं। पहाड़ के अधिकांश हिस्सों में ये जानवर किसानों के लिए बीते कुछ वर्षों में नया सिरदर्द बन गए हैं। इसके चलते काश्तकारों में खेती से मुंह मोड़ रहे हैं।
चंद्रकिशोर जोशी, किसान, लोहाघाट।
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मोदी सरकार का लक्ष्य 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का है, लेकिन इस लक्ष्य को पूरा करने में कई अड़चनें हैं। सुविधाओं की कमी ही नहीं जंगली जानवर भी आफत बन रहे हैं। ये जानवर किसानों की मेहनत को एक झटके में बर्बाद कर रहे हैं। कई जगह किसान रात में पहरेदारी करने पर भी फसल को नहीं बचा पा रहे हैं। इसके चलते लोग खेती से कन्नी काटने लगे हैं। किसानों की बर्बाद होती मेहनत का कोई इलाज भी अभी तक नहीं खोजा जा सका है। फसलों को तबाह करने के साथ ही मवेशियों के लिए बोए गए चारे को भी सुअर बर्बाद कर रहे हैं।
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जिले में 16610 हेक्टेयर खेती योग्य क्षेत्र में करीब एक-चौथाई हिस्सा जंगली जानवरों की चपेट में है। पहाड़ में जंगली सुअर, तो मैदानी क्षेत्रों में हाथी खेती के लिए खतरा बन रहे हैं। वहीं मुख्य कृषि अधिकारी राजेंद्र उप्रेती का कहना है कि किसानों को जानवरों से नुकसान न होने वाली फसल को बोने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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मैदान में सफल हो रहा सौर तारबाड़ का प्रयोग
चंपावत। जिले के मैदानी हिस्से टनकपुर में हाथियों के उत्पात से बचाने के लिए वन विभाग ने करीब डेढ़ साल पहले सौर ऊर्जा की तारबाड़ लगाई है। इससे गैडाख्याली और थ्वालखेड़ा के गांवों में हाथियों का खतरा कम हो रहा है। इन लटके तारों के संपर्क में हाथियों के आने से करंट के झटके से हाथी पीछे हो जाते हैं। वन विभाग का कहना है कि क्षेत्र के तीन और गांवों को भी इस योजना से जोड़ने का प्रस्ताव है।
कोट
दिन में खेतों में फसल की बुआई, देखरेख और कटाई में मेहनत होती है, तो रात के वक्त फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए जगना पड़ रहा है। जंगली जानवरों से बचाव के लिए समग्र नीति बनाई जाए।
हीरा सिंह कुंवार, किसान, रौसाल।
कोट
सुअर रात में फसल को नुकसान पहुंचा झटका दे रहे हैं। पहाड़ के अधिकांश हिस्सों में ये जानवर किसानों के लिए बीते कुछ वर्षों में नया सिरदर्द बन गए हैं। इसके चलते काश्तकारों में खेती से मुंह मोड़ रहे हैं।
चंद्रकिशोर जोशी, किसान, लोहाघाट।