{"_id":"66e1d4d2ed2efd3bfe0edce3","slug":"parentless-people-of-the-state-will-get-educational-assistance-champawat-news-c-229-1-shld1026-112887-2024-09-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Champawat News: प्रदेश के माता-पिता विहीन को मिलेगी शैक्षिक सहायता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Champawat News: प्रदेश के माता-पिता विहीन को मिलेगी शैक्षिक सहायता
Wed, 11 Sep 2024 11:05 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Wed, 11 Sep 2024 11:05 PM IST
विज्ञापन
चंपावत। प्रदेश के माता-पिता विहीन छात्र-छात्राओं के लिए अच्छी खबर है। इस दायरे में आने वाले कक्षा छह से 12वीं तक के अनाथ बच्चों को अब पढ़ाई आगे जारी रखने के लिए शैक्षिक सहायता मिलने जा रही है। आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर रखी गई है।
उत्तराखंड के सभी जिलों में इस योजना के लिए चयनित किया गया है। भारत सरकार ने ऐसे बच्चों के लिए योजना की शुरुआत की गई है। हाल के वर्षों में बीमारी और आपदा से माता-पिता को खोने वाले अनाथ बच्चों की किसी कारण पढ़ाई बंद या गरीबी के कारण पढ़ाई बाधित हो जाती है तो इन बच्चों की पढ़ाई का सपना इस योजना से पूरा हो सकेगा। उत्तराखंड राज्य बाल विकास परिषद ने इस संबंध में शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर जिले में मातृ पितृ विहीन सभी विद्यार्थियों की जानकारी मांगी है।
आवेदन पत्र विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के माध्यम से भरे जाएंगे। शैक्षिक सहायता के लिए आवेदक का नाम पूर्व विवरण सहित और अंतिम वर्ष की अंक तालिका, माता-पिता विहीन प्रमाण पत्र की छायाप्रति, स्कूल का पूरा पता, पिन कोड सहित संलग्न प्रारूप पर निर्धारित तिथि तक परिषद कार्यालय को भेजी जाएगी।
विज्ञापन
इस पते पर भेजे जाएंगे आवेदन
चंपावत। शैक्षिक सहायता के लिए विकासखंड स्तर पर संचालित राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक अपने विद्यालय के छात्र-छात्राओं के आवेदन पत्र निर्धारित प्रारूप में भरकर 15 सितंबर तक पंजीकृत डाक से परिषद के देहरादून कार्यालय भेजेंगे। इसे ईमेल uksecwddn@ gmail.com पर अपलोड करेंगे।
कोट
उत्तराखंड सहित चंपावत जिले के माता-पिता विहीन कक्षा छह से 12वीं तक के बच्चों के लिए भारत सरकार शैक्षिक सहायता दे रही है। इस दायरे में आ रहे अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं को योजना से लाभान्वित किए जाने का लक्ष्य है। खंडों के सभी विद्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर छात्र-छात्राओं की सूचना मांगी गई है। - मेहरबान सिंह बिष्ट, सीईओ, चंपावत।
विज्ञापन
उत्तराखंड के सभी जिलों में इस योजना के लिए चयनित किया गया है। भारत सरकार ने ऐसे बच्चों के लिए योजना की शुरुआत की गई है। हाल के वर्षों में बीमारी और आपदा से माता-पिता को खोने वाले अनाथ बच्चों की किसी कारण पढ़ाई बंद या गरीबी के कारण पढ़ाई बाधित हो जाती है तो इन बच्चों की पढ़ाई का सपना इस योजना से पूरा हो सकेगा। उत्तराखंड राज्य बाल विकास परिषद ने इस संबंध में शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर जिले में मातृ पितृ विहीन सभी विद्यार्थियों की जानकारी मांगी है।
विज्ञापन
आवेदन पत्र विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के माध्यम से भरे जाएंगे। शैक्षिक सहायता के लिए आवेदक का नाम पूर्व विवरण सहित और अंतिम वर्ष की अंक तालिका, माता-पिता विहीन प्रमाण पत्र की छायाप्रति, स्कूल का पूरा पता, पिन कोड सहित संलग्न प्रारूप पर निर्धारित तिथि तक परिषद कार्यालय को भेजी जाएगी।
विज्ञापन
इस पते पर भेजे जाएंगे आवेदन
चंपावत। शैक्षिक सहायता के लिए विकासखंड स्तर पर संचालित राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक अपने विद्यालय के छात्र-छात्राओं के आवेदन पत्र निर्धारित प्रारूप में भरकर 15 सितंबर तक पंजीकृत डाक से परिषद के देहरादून कार्यालय भेजेंगे। इसे ईमेल uksecwddn
कोट
उत्तराखंड सहित चंपावत जिले के माता-पिता विहीन कक्षा छह से 12वीं तक के बच्चों के लिए भारत सरकार शैक्षिक सहायता दे रही है। इस दायरे में आ रहे अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं को योजना से लाभान्वित किए जाने का लक्ष्य है। खंडों के सभी विद्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर छात्र-छात्राओं की सूचना मांगी गई है। - मेहरबान सिंह बिष्ट, सीईओ, चंपावत।