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पूर्णागिरि मार्ग पर ओवरलोडिंग खनन की मार

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 26 Feb 2021 11:51 PM IST
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Overloading mining hit Purnagiri route
ओवरलोडिंग वाहनों से खस्ताहाल पूर्णागिरि मार्ग। - फोटो : CHAMPAWAT
टनकपुर (चंपावत)। ओवरलोड वाहनों के चलते नेपाल सीमा से लगी निर्माणाधीन टनकपुर-जौलजीबी (टीजे) सड़क पर मार पड़ रही है। खनन के ओवरलोड वाहनों से इस सड़क के पहले चरण ठुलीगाड़-चूका मार्ग के डामर के क्षतिग्रस्त होने की शिकायत के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए। अब ओवरलोडिंग से मां पूर्णागिरि धाम को जाने वाला ककरालीगेट-ठुलीगाड़ मार्ग पर गैडा़ख्याली, थ्वालखेड़ा, ऊचौलीगोठ सहित सात स्थानों पर डामर टूट चुका है। कई जगह रोड़ी बिखर कर रपटने की नौबत आ रही है। इससे आवाजाही जोखिम भरी होने के साथ 30 मार्च से शुरू होने वाले मां पूर्णागिरि धाम के मेला तीर्थयात्रियों की सुरक्षा पर भी असर पड़ने का अंदेशा बढ़ेगा।
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लोनिवि के टनकपुर के सहायक अभियंता एपीएस बिष्ट ने खनन कार्य में ओवरलोड से पूर्णागिरि सड़क के कई जगह टूटने की जानकारी पत्र भेज ईई को दी है। कहा कि लधिया नदी पर चूका से हो रहे खनन की ओवरलोडिंग की मार सड़क के टूटने के रूप में पड़ रही है। अधिक ढुलान से इस मार्ग के पुल को भी खतरा हो सकता है। एई बिष्ट ने सड़क को नुकसान से बचाने के लिए जरूरी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
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इधर एसडीएम हिमांशु कफल्टिया ने कहा कि ओवरलोडिंग पर लगाम कसने के लिए बड़े वाहनों पर प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुरूप सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक ठुलीगाड़ से आगे खनन क्षेत्र पर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है। (संवाद)
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लोनिवि नहीं, पीएमजीएसवाई से होगा एसडीएम सड़क का डामरीकरण
चंपावत। पांच दशक के संघर्ष के बाद सूखीढांग-डांडा-मीनार (एसडीएम) सड़क तो बन गई, लेकिन चार साल पूर्व कटिंग होने के बावजूद इस सड़क का डामरीकरण नहीं हो पा रहा है। और ये हाल भी तब है, जब एक साल पहले फरवरी 2020 में चंपावत दौरे पर आए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने डामरीकरण का एलान किया था। डामरीकरण तो नहीं हो सका, लेकिन अब डामरीकरण कराने का जिम्मा लोक निर्माण विभाग के बजाय पीएमजीएसवाई को दिए जाने का प्रस्ताव भेज दिया गया है।
56 किमी लंबे इस मोटर मार्ग की कटिंग चार साल पूर्व 15 करोड़ रुपये से पूरी की गई। पिछले साल डामरीकरण के लिए 18 करोड़ रुपये के बजट की मांग की गई थी, लेकिन यह रकम नहीं मिली। लोनिवि के ईई एमसी पांडेय ने बताया कि लोनिवि के सचिव के निर्देश पर इस सड़क को डामरीकरण के लिए पीएमजीएसवाई को हस्तांतरित किया जा रहा है। पीएमजीएसवाई के माध्यम से ही डामरीकरण के लिए बजट उपलब्ध होगा।

सड़क के डामरीकरण से मार्ग बेहतर होने के साथ वैकल्पिक मार्ग के अलावा सिख तीर्थ स्थली रीठा साहिब की 150 किमी की दूरी घटकर सिर्फ 80 किमी रह जाएगी। इस वक्त रीठा साहिब जाने के लिए टनकपुर से लोहाघाट होते हुए सफर तय करना पड़ता है। इसके अलावा 21 गांवों (सूखीढांग, गेरलेख, चौड़ाकोट, धूरा, पातल, मथियाबांज, तलियाबांज, बकोरिया, बुड़म, कल्लाड़, डांडा, कठौती, ककनई की धार, मल्ली टांण, तल्ली टांण, साल, मछियाड़, तलाड़ी, कुल्यालगांव, चौड़ामेहता और रीठा साहिब) के पांच हजार से अधिक लोगों की आवाजाही भी सुगम होगी।
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