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एड़ी बालकृष्ण मेले के डोले में शरीक होंगे सिर्फ पांच पुरोहित
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भिंगराड़ा का एड़ी बालकृष्ण मंदिर।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। हर साल कृष्ण जन्माष्टमी पर तीन दिन तक होने भिंगराड़ा के प्रसिद्ध एड़ी बालकृष्ण मंदिर का मेला इस बार कोरोना महामारी के चलते नहीं होगा। मंगलवार शाम को अध्यक्ष मुकेश महराना की अध्यक्षता में हुई मंदिर समिति की बैठक में कहा गया कि मेले में सांस्कृतिक, कारोबारी और अन्य कार्यक्रम नहीं होंगे। धार्मिक रस्मों को परंपरा को निभाने के लिए सिर्फ सांकेतिक रूप से किया जाएगा। तय किया गया कि ये पूरा कार्यक्रम सिर्फ सांकेतिक रूप से होगा। खरही, क्वैराली और भिंगराड़ा से 12 अगस्त को निकलने वाले डोले में सिर्फ पुजारी, डंगरियों सहित कुल पांच-पांच लोग शामिल रहेंगे। अमर उजाला ने मेला नहीं होने की संभावना जताते हुए 13 जुलाई को प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी।
11 अगस्त को मंदिर परिसर में रात्रि जागरण की रस्म भी सोशल डिस्टेंसिंग के साथ निभाई जाएगी। बाहर से आने वाले कारोबारियों पर भी प्रतिबंध रहेगा। बता दें कि भिंगराड़ा का ये मेला लधिया घाटी के भिंगराड़ा, गड्यूड़ा, खरही, मडयोली, बालातड़ी, रीठा साहिब, कुलयालगांव, परेवा, पोखरी, करौली, बिरगुल, गोली, एड़ीगुरौली, वैला, खटोली, साल-टांण, मछियाड़ सहित दो दर्जन गांवों से जुड़ा है। बैठक में पूर्व प्रधान धर्मानंद भट्ट, प्रकाश भट्ट, मथुरादत्त, चंद्रशेखर जोशी, दीपक शर्मा, उमेश चंद्र, टीकाराम शर्मा आदि मौजूद थे।
चंपावत जिले में अब तक निरस्त हुए ये धार्मिक आयोजन:
मां पूर्णागिरि धाम, गुमदेश का चैतोला मेला, रीठा साहिब का जोड़ मेला, देवीधार महोत्सव, देवीधुरा बगवाल मेला व अखिलतारिणी मेला।
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11 अगस्त को मंदिर परिसर में रात्रि जागरण की रस्म भी सोशल डिस्टेंसिंग के साथ निभाई जाएगी। बाहर से आने वाले कारोबारियों पर भी प्रतिबंध रहेगा। बता दें कि भिंगराड़ा का ये मेला लधिया घाटी के भिंगराड़ा, गड्यूड़ा, खरही, मडयोली, बालातड़ी, रीठा साहिब, कुलयालगांव, परेवा, पोखरी, करौली, बिरगुल, गोली, एड़ीगुरौली, वैला, खटोली, साल-टांण, मछियाड़ सहित दो दर्जन गांवों से जुड़ा है। बैठक में पूर्व प्रधान धर्मानंद भट्ट, प्रकाश भट्ट, मथुरादत्त, चंद्रशेखर जोशी, दीपक शर्मा, उमेश चंद्र, टीकाराम शर्मा आदि मौजूद थे।
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चंपावत जिले में अब तक निरस्त हुए ये धार्मिक आयोजन:
मां पूर्णागिरि धाम, गुमदेश का चैतोला मेला, रीठा साहिब का जोड़ मेला, देवीधार महोत्सव, देवीधुरा बगवाल मेला व अखिलतारिणी मेला।