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मजदूर दिवस पर: खीरी का बीटेक का छात्र चंपावत में कर रहा मजदूरी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 01 May 2021 12:22 AM IST
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On Labor Day: Kheri's B.Tech student doing wages in Champawat
चंपावत। उत्तर प्रदेश के खीरी जिले का बीटेक कर रहा एक युवक 243 किमी दूर चंपावत में मजदूरी कर रहा है। मजदूरी के जरिये कमाई के साथ वह ऑनलाइन पढ़ाई भी कर रहा है। कोरोना काल में घर की माली हालत बिगड़ जाने से वह जगह-जगह मजदूरी करने को मजबूर हुआ।
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खीरी जिले का सुनापुर निवासी 19 साल का राज किशोर लखनऊ के एपीजे अब्दुल कलाम विश्वविद्यालय से संबद्ध आरआर ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूट से बीटेक कर रहा है। मेधावी राज किशोर पिछले साल इंटर बोर्ड की परीक्षा 79 प्रतिशत अंक के साथ पास की। राज किशोर बताते हैं कि पिता खेलावन खेती करते हैं, लेकिन किसानी में हुए नुकसान से घर की हालत एकाएक बिगड़ गई, तो पिछले साल दिसंबर से उन्हें पढ़ाई के साथ काम की भी तलाश करनी पड़ी। कुछ काम नहीं मिलने पर राज किशोर आसपास ही मजदूरी करने लगा। कहीं काम नहीं मिलने पर राज किशोर ने चंपावत में मजदूरी कर रहे कुछ लोगों से संपर्क साधा और वह अप्रैल के शुरू में चंपावत आ गए। यहां निर्माण से लेकर ढोने तक का काम कर कुछ रुपये कमाए। राज किशोर बताते हैं कि अब हालात बिगड़ने और ऑनलाइन पढ़ाई की वजह से उन्हें वापस गांव जाने को मजबूर हैं। मेधावी राजकिशोर की मेहनत को देखते हुए मजदूर संगठन के अध्यक्ष सूरज बोहरा ने उनके कमरे के किराये के साथ खाने की अपनी ओर से व्यवस्था की। (संवाद)
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कोरोना काल ने तोड़ दी मजदूरों की कमर
चंपावत। कोरोना काल मजदूरों के लिए कहर बनकर आया है। पिछले साल 25 मार्च से अब तक 13 महीनों में ज्यादातर मजदूर काम के लिए तरस रहे हैं। निर्माण कार्यो में 65 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट के चलते काम के लाले पड़े हैं। उप्र, बिहार और दूसरी जगहों के चार हजार से अधिक मजदूर काम नहीं मिलने पर यहां से अपने-अपने गांवों को जा चुके हैं।
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चंपावत जिले में इस वक्त पंजीकृत श्रमिकों की संख्या 7071 है। अरुण, राकेश, सूरज, राजेश, किशोर, अखिलेश सहित कई मजदूरों का कहना है कि वे लंबे समय से मजदूरी कर रहे हैं, लेकिन ऐसा बुरा दौर कभी नहीं देखा। काम नहीं है, घर से दूर हैं। बीते दो सप्ताह से काम का संकट बढ़ गया है। मजदूरी नहीं मिलने से अब न खाने के लिए रुपये है और नहीं किराया देने की स्थिति में है। कोरोना के हालात में जल्द सुधार नहीं होने पर गांव जाना उनकी मजबूरी होगी। वैसे भी बीते 13 महीनों में बड़ी संख्या में मजदूर गांव लौट चुके हैं।

मजदूर नेता सूरज बोहरा का कहना है कि पिछले साल मार्च के बाद से निजी और सरकारी निर्माण कार्यों में भारी कमी आने से चंपावत जिले से चार हजार से अधिक मजदूर अपने गांव लौट चुका है। उन्होंने मजदूरों की हालत को सुधारने के लिए अनाज और आर्थिक सहायता का प्रदेश सरकार से आग्रह किया है। श्रम प्रवर्तन अधिकारी मीनाक्षी भट्ट का कहना है कि फिलहाल मजदूरों के लिए किसी तरह की आर्थिक या कोई सहायता देने के निर्देश नहीं हैं। बता दें कि पिछले साल सरकार ने मजदूरों को आर्थिक सहायता और राशन दिया था।
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