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Champawat News: बाप रे बाप! दुल्हन लाने के लिए 28 किमी के फेरे

Wed, 08 May 2024 10:51 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत Updated Wed, 08 May 2024 10:51 PM IST
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Oh dear me! 28 km round trip to bring bride
चंपावत जिले के सीमांत में ​स्थित मटकांडा गांव। संवाद
पंकज पाठक
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चंपावत। जिले के ग्राम पंचायत मंच के मटकांडा गांव में दूल्हे को दुल्हन लेने के लिए 28 किमी पैदल चलकर पहुंचते हैं। वहीं दुल्हन को 14 किमी का पैदल सफर करना होता है। सड़क की हालत खराब है। पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं है। घोड़े, खच्चर तो दूर की बात है। सड़क के अभाव में पलायन होने से मटकांडा गांव की आबादी भी करीब एक तिहाई रह गई है।
मुख्यालय से करीब 35 किमी से दूर मटकांडा पहुंचने के लिए 14 किमी का पैदल सफर तय करना पड़ता है। सड़क नहीं होने से करीब तीन हजार की आबादी वाले गांव में अब 350 लोग ही रह गए हैं। एक मात्र डोली ही लोगों का सहारा है। जब भी मटकांडा में कोई बरात जाती है तो दूल्हे को 14 किमी दुल्हन के घर तक पैदल और फिर दूल्हा-दुल्हन 14 किमी का सफर कर अपने घर तक पैदल चलना पड़ता है।
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दो घंटे गांव तक और तीन किमी वापस आने में लगता समय
चंपावत। मटकांडा जाने और आने वालों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ती है। गांव जाते समय पूरा रास्ता ढलान पर है। इसमें करीब दो घंटे का समय लगता है। वापसी में खड़ी चढ़ाई है। इसमें तीन किमी की चढ़ाई चलकर आना पड़ता है।
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थकावट भरी डगर पर पैर फिसला या संतुलन बिगड़ने पर जान का खतरा रहता है। करीब छह माह पूर्व एक बीमार की डोली से लाते समय मौत हो गई थी। विधानसभा चुनाव 2022 में क्षेत्र के लोग चुनाव बहिष्कार कर चुके हैं।
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वर्ष 2022 में मटकांडा के लिए सड़क निर्माण को लेकर सर्वे हुआ था। मटकांडा पहुंचने के लिए 14 किमी का पैदल सफर करना पड़ता है। रास्ता भी जोखिम भरा है। छह माह पूर्व एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी। 120 से अधिक पत्र लिखकर विभाग, प्रशासन, शासन और केंद्र सरकार के मंत्रियों को दिए गए हैं। - दीपक महर, प्रधान मंच।
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मटकांडा गांव की आबादी कम हो गई है। एक जमाना था जब यहां की आबादी करीब तीन हजार थी। आज गांव में करीब 350 लोग ही रहते हैं। सड़क नहीं होने के कारण मूलभूत सुविधाएं मिलना आसान नहीं है। - पान सिंह, मटकांडा बकोड़ा।


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12 किमी मंच- बकोड़ा सड़क निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। इसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया। इसकी स्वीकृति मिलने के बाद फिर मटकांडा सड़क मार्ग से लिंक हो जाएगा। - मोहन पलड़िया, अधिशासी अभियंता, लोनिवि चंपावत।
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