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नंबर कम आने पर बेटे को छोड़ दिया बॉर्डर पर

Tue, 02 Feb 2016 10:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, टनकपुर।
ब्यूरो/अमर उजाला, टनकपुर। Updated Tue, 02 Feb 2016 10:59 PM IST
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Numbers at left son on the Border

आखिर माता-पिता कब समझेंगे कि अपनी उम्मीदें बच्चों पर थोपना सही नहीं है। अक्सर ही ऐसी कई घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिनमें घर वालों के दबाव में बच्चे का भविष्य ही अंधकारमय हो जाता है या बच्चा घातक कदम उठा लेता है। अपनी उम्मीदों को बच्चे पर थोपने की ऐसी ही एक और घटना सामने आई है।

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स्कूल में होने वाले मासिक टेस्ट में कम नंबर आने पर महेंद्रनगर (नेपाल) में एक पिता ने कक्षा पांच में पढ़ने वाले 12 वर्षीय बेटे की पिटाई लगाकर उसे भारत-नेपाल सीमा बॉर्डर पर यह कहकर छोड़ दिया कि लौटकर घर नहीं आना। तीन दिन तक बच्चा भूखे पेट ठंड में शारदा खनन क्षेत्र में डरा-सहमा छिपा रहा।
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ठंड के कारण बच्चे को खूनी दस्त तक हो गई। गनीमत रही कि एक खनन कारोबारी की नजर उस पर पड़ गई। स्वयंसेवी संस्था ने इस बच्चे का इलाज कराने के साथ ही उसे अपने बनबसा स्थित उज्वला पुनर्वास केंद्र में संरक्षित किया है।
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महेंद्रनगर (नेपाल) के गोबरिया वार्ड संख्या 18 निवासी दीपक भट्ट (12) पुत्र हजारी भट्ट कक्षा पांच में पढ़ता हैं। उसने बताया कि गत मासिक टेस्ट में उसके नंबर कम आने पर पिता ने न सिर्फ उसकी पिटाई की बल्कि भारत-नेपाल सीमा पर वापस घर न लौटने की हिदायत देकर छोड़ गए।

डरा-सहमा यह मासूम भटकता हुआ शारदा के खनन क्षेत्र में पहुंचा और तीन दिन वहीं खनन के गड्ढों में छिपा रहा। इसी बीच खनन कारोबारी भुवन कश्यप की उस पर नजर पड़ी तो उसने बच्चे से पूछताछ की। भूखे पेट और ठंड के कारण उसे खूनी दस्त होने शुरू हो गए थे। समाजसेवियों के माध्यम से इसकी सूचना रीड्स संस्था को दी गई। संस्था के सचिव भुवन गड़कोटी ने बच्चे का संयुक्त चिकित्सालय में इलाज कराया।


इसके बाद पुलिस को सूचित कर उसे अपने उज्वला पुनर्वास केंद्र में ले गए। संस्था सचिव ने बताया कि नेपाल पुलिस के माध्यम से बच्चे के परिजनों को बुलाया गया है। उनके आने पर नेपाल पुलिस की मौजूदगी में उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया जाएगा।

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