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शौचालय से भी छात्र-छात्राओं को राहत नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 26 Jun 2016 10:09 PM IST
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शौचालय से भी छात्र-छात्राओं को राहत नहीं
- फोटो : अमर उजाला
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अक्तूबर 2014 में पूरे देश के साथ चंपावत जिले में भी स्वच्छता अभियान जोरशोर से शुरू हुआ। स्कूलों पर खास फोकस किया गया। सभी जगह शौचालय बनाने के दावे किए गए, लेकिन अब भी 41 ऐसे स्कूल हैं, जहां छात्र-छात्राओं को शौचालय की सुविधा नहीं है। और ये हाल भी तब है, जब एनएचपीसी ने सीएसआर के अंतर्गत जिले में 304 शौचालय बनाए थे।
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शिक्षा विभाग जिले के सभी 601 प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल में शौचालय बने होने का दावा करता है। उसके इस दावे के बावजूद सभी स्कूलों में शौचालय की सुविधा नहीं है। इसकी वजह कई जगह शौचालय के इस्तेमाल लायक नहीं होने, दरवाजे का टूटना, पानी की कमी आदि है।
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41 स्कूलों में तो पेयजल का कनेक्शन ही नहीं है। इसके अलावा कई स्कूल ऐसे हैं, जहां पानी का कनेक्शन है, लेकिन नलों में पानी नहीं आता। पानी की कमी से साफ-सफाई नहीं हो पाती। इस कारण इन शौचालयों का उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसी ही वजहों से नीड़, दियूरी, धुरा प्राथमिक विद्यालयों सहित कई स्कूलों के शौचालयों में ताले लटके हुए हैं। और छात्र-छात्राओं ही नहीं शिक्षकों को भी परेशानी हो रही है।
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गुणवत्ता पर उठते रहे सवाल
एनएचपीसी द्वारा 152 स्कूलों में बनाए गए 304 शौचालयों में से करीब एक-तिहाई की गुणवत्ता ठीक नहीं है। पिछले साल अक्तूबर में इन शौचालयों की जांच की बात कही गई थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं। सीईओ एनसी पाठक का कहना है कि एनएचपीसी ने निर्माण को लेकर विभाग या स्कूलों को किसी तरह की जानकारी नहीं दी। अब नवागत डीएम डॉ.अहमद इकबाल ने शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में इस मामले की पड़ताल करने के विभागीय अधिकारियों को आदेश देने के साथ ही शासन से भी इस संबंध में वार्ता करने की बात कही है।