फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Not ideal in this ideal school

इस आदर्श विद्यालय में कुछ आदर्श नहीं

Fri, 16 Jun 2017 10:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत Updated Fri, 16 Jun 2017 10:16 PM IST
विज्ञापन
Not ideal in this ideal school
राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन में आई दरारें - फोटो : अमर उजाला

विज्ञापन
शहर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय को आदर्श दर्जा मिलने के बाद इसके भवन को बाहर से रंग-रोगन कर चमका दिया गया, लेकिन भीतर से इसकी मरम्मत नहीं की। भवन में भीतर की दीवारों में दरारें बनी हैं। जर्जर हो चुके इसी भवन में कक्षाएं चल रही हैं। स्कूल में शिक्षकों की कमी पठन पाठन पर भारी पड़ रही है। नतीजा यह कि आदर्श स्कूल बनने के बाद यहां छात्रों की संख्या बढ़ने के बजाय 124 से घटकर 97 हो गई है।

अंग्रेजी शासन काल के दौरान 1926 में स्थापित हुए लोहाघाट के इस प्राथमिक विद्यालय में पानी का कनेक्शन है, लेकिन पानी की आपूर्ति चार दिन में एक बार होती है। नियमित पेयजल आपूर्ति न होने से मध्यान्ह भोजन योजना बनाना चुनौती बना हुआ है। छात्र-छात्राओं को तीन-चार दिन का बासी पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है।
विज्ञापन


अमर उजाला द्वारा जब इस आदर्श विद्यालय में जाकर पड़ताल की तो इस दौरान कई अव्यवस्थाएं सामने आई। विद्यालय प्रशासन के अनुसार स्कूल में एक पेयजल संयोजन है। उसमें चौथे दिन पानी की आपूर्ति होती है। निजी प्रयास से पेयजल टैंक की व्यवस्था की है। इसमें पानी जमा कर दिया जाता है। मजबूरी में इसका उपयोग तीन-चार दिन तक किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन



बताया गया कि 1926 में स्थापित हुए इस विद्यालय का मुख्य भवन 1928 के आसपास बना हुआ है। प्राचीन होने के कारण इसकी हालत जर्जर बनी है। इस स्कूल को 2016 में आदर्श विद्यालय का दर्जा देकर इसके भवन को बाहर से तो रंग-रोगन से चमका दिया। लेकिन भीतर से इसकी हालत काफी जर्जर बनी है। विद्यालय में मानकों के अनुरूप शिक्षकों और स्टाफ नहीं है। आदर्श विद्यालय होने के कारण कहने को इस विद्यालय में पांच शिक्षकों और एक प्रधानाध्यापक का पद सृजित हैं। वर्तमान में दो शिक्षकों के पद रिक्त हैं। इसके लिपिक, स्वच्छक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और माली के पद भी रिक्त हैं। प्रधानाध्यापक को बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ लिपिक का कार्य भी करना पड़ रहा है।

आदर्श स्कूल बनने के बाद विद्यालय में 27 विद्यार्थी कम होने की कई वजहें हैं। शिक्षकों की कमी के अलावा शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत पहली कक्षा के छात्रों को निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश देने से छात्र संख्या में कमी आई है। स्कूल के भवन की मरम्मत के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। -प्रदीप कर्नाटक, प्रधानाध्यापक, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, लोहाघाट।


जन सहयोग से कराया गया फर्श
विद्यालय में अध्ययनरत अधिकांश बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं। प्रधानाध्यापक अपने स्तर से बच्चों के लिए स्टेशनरी आदि का प्रबंध करते हैं। वहीं जन प्रतिनिधियों के सहयोग से छात्रों को स्वेटर, टोपी, मौजे, जूते की व्यवस्था करवाकर बच्चों की मदद की जाती है। जन सहयोग से विद्यालय के तीन कमरों और बरामदे में फर्श करवाया गया। पूर्व में विद्यालय का फर्श टूटने से बच्चों को बैठने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। प्रधानाध्यापक के प्रयासों से स्कूल के सभी 97 बच्चे कुर्सियों में बैठकर पढ़ाई करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed