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यहां तो मरीजों को रक्तचाप नपवाने के लिए भी बेलने पड़ रहे पापड़
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उप जिला अस्पताल में लोगों के कोरोना सेंपल लेते स्वास्थ्य कर्मी।
- फोटो : LOHAGHAT
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लोहाघाट (चंपावत)। उप जिला अस्पताल में मरीजों को रक्तचाप नपवाने के लिए भी पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। ये नौबत यहां 18 में से सिर्फ दो डॉक्टरों के अस्पताल में होने से आई। लोगों को लंबा इंतजार भी करना पड़ा। डॉक्टर मरीजों के पर्चों पर बाहर की दवाएं भी लिख रहे हैं। भर्ती मरीजों को अस्पताल में खाने की भी सुविधा नहीं मिल रही है। शुक्रवार और शनिवार को संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में अस्पताल की ये तस्वीर सामने आई।
अस्पताल के शौचालय में गंदगी तो थी ही, पानी की भी व्यवस्था न होने से दिक्कतें बढ़ीं। अस्पताल परिसर में बने टैंक से मरीजों को पानी ढोना पड़ रहा था। शुक्रवार को 77 मरीजों का इलाज हुआ, जबकि एक्सरे के लिए एक भी व्यक्ति नहीं आया। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एलएम रखोलिया के दो दिन टनकपुर संबद्ध होने से अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लगा था। इस वजह से महिलाओं को निराश लौटना पड़ा। डॉ. अंकुश बाठला ने बताया कि ज्यादातर लोग सर्दी, जुकाम, खांसी, उल्टी-दस्त के थे।
मरीज बोले बाहर से मंगाई जा रही हैं दवाएं
लोहाघाट (चंपावत)। अस्पताल में भर्ती पुल्ला के त्रिलोक सिंह का कहना है कि वे बृहस्पतिवार शाम से यहां हैं। अधिकतर दवाएं उनसे बाजार से मंगाई जा रही हैं। बिहार के दिनेश चौधरी ने बताया कि उन्हें बुखार और सांस फूलने की दिक्कत हो रही थी। वह तीन दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। महज दो दवाएं अस्पताल से मिलीं। तीन दिन में एक हजार रुपये से ज्यादा दवा में खर्च हो गए हैं।
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सुल्ला की निर्मला देवी के पति जमन सिंह ने बताया कि अधिकांश दवाएं बाजार से मंगाई जा रही हैं। डायरिया रोग की चपेट में आई बच्चे खुशबू, सुमन, सूरज, गीता, दीपक के परिजनों ने बताया कि बाजार से भी दवाएं मंगाई जा रही हैं। सिमलटुकरा बाराकोट के महेश राम ने बताया कि उनके बच्चे सचिन को बुखार आया था, तीन दिन से अस्पताल में भर्ती किया है, अस्पताल से केवल ग्लूकोज चढ़ रहा है और खून की जांच निशुल्क हुई। सारी दवाएं और इंजेक्शन बाजार से मंगा रहे हैं, उसके बावजूद बच्चे की सेहत में सुधार नहीं दिख रहा है।
पीजी परीक्षा के लिए छुट्टी पर गए हैं 14 डॉक्टर
लोहाघाट (चंपावत)। अस्पताल में 18 में से सिर्फ चार ही डॉक्टर ड्यूटी पर थे। दो डॉक्टर आकस्मिक सेवा और दो ओपीडी मरीजों को देख रहे थे। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सोनाली मंडल ने बताया कि 14 डॉक्टर पीजी परीक्षा के लिए अवकाश पर हैं। अस्पताल में मात्र चार डॉक्टर हैं। इनमें से दो सुबह और दो डॉक्टर इमरजेंसी में सेवा दे रहे हैं। डॉ. मंडल ने बताया कि तीन दिन तक अस्पताल में चार डॉक्टरों की सेवा दी जाएगी। कहा कि अस्पताल में कुछ जरूरी दवाएं मौजूद नहीं हैं, जिन्हें जन औषधि केंद्र से लाने के लिए कहा गया है।
वार्ड ब्वॉय के हवाले रीठा साहिब का अस्पताल
रीठा साहिब (चंपावत)। रीठा साहिब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार को मरीजों को इलाज नहीं मिल सका। यहां न डॉॅक्टर थे और न ही फार्मासिस्ट। दोनों डॉक्टर शनिवार को होने वाली पीजी की परीक्षा के लिए हल्द्वानी या दूसरी जगह गए थे। पूरा दारोमदार अकेले वार्डब्वॉय पर था। 13 मरीज बैरंग लौटे। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि दोनों डॉक्टर पीजी परीक्षा के लिए अवकाश पर हैं।
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अस्पताल के शौचालय में गंदगी तो थी ही, पानी की भी व्यवस्था न होने से दिक्कतें बढ़ीं। अस्पताल परिसर में बने टैंक से मरीजों को पानी ढोना पड़ रहा था। शुक्रवार को 77 मरीजों का इलाज हुआ, जबकि एक्सरे के लिए एक भी व्यक्ति नहीं आया। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एलएम रखोलिया के दो दिन टनकपुर संबद्ध होने से अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लगा था। इस वजह से महिलाओं को निराश लौटना पड़ा। डॉ. अंकुश बाठला ने बताया कि ज्यादातर लोग सर्दी, जुकाम, खांसी, उल्टी-दस्त के थे।
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मरीज बोले बाहर से मंगाई जा रही हैं दवाएं
लोहाघाट (चंपावत)। अस्पताल में भर्ती पुल्ला के त्रिलोक सिंह का कहना है कि वे बृहस्पतिवार शाम से यहां हैं। अधिकतर दवाएं उनसे बाजार से मंगाई जा रही हैं। बिहार के दिनेश चौधरी ने बताया कि उन्हें बुखार और सांस फूलने की दिक्कत हो रही थी। वह तीन दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। महज दो दवाएं अस्पताल से मिलीं। तीन दिन में एक हजार रुपये से ज्यादा दवा में खर्च हो गए हैं।
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सुल्ला की निर्मला देवी के पति जमन सिंह ने बताया कि अधिकांश दवाएं बाजार से मंगाई जा रही हैं। डायरिया रोग की चपेट में आई बच्चे खुशबू, सुमन, सूरज, गीता, दीपक के परिजनों ने बताया कि बाजार से भी दवाएं मंगाई जा रही हैं। सिमलटुकरा बाराकोट के महेश राम ने बताया कि उनके बच्चे सचिन को बुखार आया था, तीन दिन से अस्पताल में भर्ती किया है, अस्पताल से केवल ग्लूकोज चढ़ रहा है और खून की जांच निशुल्क हुई। सारी दवाएं और इंजेक्शन बाजार से मंगा रहे हैं, उसके बावजूद बच्चे की सेहत में सुधार नहीं दिख रहा है।
पीजी परीक्षा के लिए छुट्टी पर गए हैं 14 डॉक्टर
लोहाघाट (चंपावत)। अस्पताल में 18 में से सिर्फ चार ही डॉक्टर ड्यूटी पर थे। दो डॉक्टर आकस्मिक सेवा और दो ओपीडी मरीजों को देख रहे थे। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सोनाली मंडल ने बताया कि 14 डॉक्टर पीजी परीक्षा के लिए अवकाश पर हैं। अस्पताल में मात्र चार डॉक्टर हैं। इनमें से दो सुबह और दो डॉक्टर इमरजेंसी में सेवा दे रहे हैं। डॉ. मंडल ने बताया कि तीन दिन तक अस्पताल में चार डॉक्टरों की सेवा दी जाएगी। कहा कि अस्पताल में कुछ जरूरी दवाएं मौजूद नहीं हैं, जिन्हें जन औषधि केंद्र से लाने के लिए कहा गया है।
वार्ड ब्वॉय के हवाले रीठा साहिब का अस्पताल
रीठा साहिब (चंपावत)। रीठा साहिब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार को मरीजों को इलाज नहीं मिल सका। यहां न डॉॅक्टर थे और न ही फार्मासिस्ट। दोनों डॉक्टर शनिवार को होने वाली पीजी की परीक्षा के लिए हल्द्वानी या दूसरी जगह गए थे। पूरा दारोमदार अकेले वार्डब्वॉय पर था। 13 मरीज बैरंग लौटे। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि दोनों डॉक्टर पीजी परीक्षा के लिए अवकाश पर हैं।