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स्वामी विवेकानंद की स्मृति में बने स्तंभ की मरम्मत नहीं
सतीश जोशी ‘सत्तू’/अमर उजाला, चंपावत
Updated Mon, 18 Jan 2016 10:48 PM IST
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स्वामी विवेकानंद का चंपावत से वास्ता रहा है। 18 और 19 जनवरी 1901 की रात उन्होंने चंपावत में गुजारी। 15 साल पूर्व उनकी याद में यहां स्तंभ भी बनाया गया, लेकिन स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग उनकी स्मृति स्तंभ को भी संजो नहीं पा रहा है।
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18 जनवरी 1901 को स्वामी जी ने अपने तीन साथियों के साथ जिला पंचायत के डाकबंगले (इस वक्त टीवी रिले केंद्र) में प्रवास किया था। अगले दिन वे यहां से दियूरी डाकबंगला रुकते हुए आगे बढ़े थे, लेकिन अध्यात्म और ऐतिहासिक धरोहर के इस नायाब संगम को बचाने के लिए एक भी कदम नहीं उठाया गया। 2001 में स्थापित स्मृति पटल में विवेकानंद के रात्रि विश्राम के संबंध में अंकित जानकारी मिट चुकी है। रात्रि प्रवास करने वाले परिसर में एक भी प्रतिमा नहीं है।
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ऐसी ही उपेक्षा 25 किमी दूर दियूरी डाक बंगले की भी है। अद्वैत आश्रम मायावती के पूर्व अध्यक्ष रहे स्वामी मुमुक्षानंद महाराज के मुताबिक डोली के जरिए स्वामी जी दियूरी पहुंचे थे। दियूरी के बुजुर्गों का कहना है कि दियूरी के बंगले में स्वामी जी ने रात बिताई थी। मगर दो कमरे वाले इस बंगले के हाल इस सुनहरे इतिहास की अनदेखी करते हैं। देखरेख का कोई इंतजाम नहीं है। वर्तमान में भवन की हालत इस लायक नहीं है कि कोई इसमें रह सके।
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विरासत को सहेजने का होगा प्रयास
डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी का कहना है कि आध्यात्मिक महापुरुष स्वामी विवेकानंद से जुड़ी यादें जिले की विरासत हैं। ऐसे स्थानों को संरक्षित करने से देश के लोगों का भी इन जगहों से जुड़ाव होता है। स्मृति पटल से लेकर दियूरी डाकबंगले को संवारने के लिए पर्यटन और संस्कृति विभाग को कार्ययोजना बनाने को निर्देशित किया गया है।
स्वामी विवेकानंद से जुड़े स्थलों को सहेजने और संवारने में किसी तरह की कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी। ऐसा प्रयास किया जाएगा कि ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासतें आने वाली पीढ़ियों को अतीत की जानकारी दे सके।
हेमेश खर्कवाल, विधायक