{"_id":"6212735c162c8c4ed351b255","slug":"no-telimedicine-facility-in-champawat-champawat-news-hld454274599","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंपावत जिला अस्पताल की टेलीमेडिसिन सेवा ठंडे बस्ते में !","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंपावत जिला अस्पताल की टेलीमेडिसिन सेवा ठंडे बस्ते में !
विज्ञापन
चंपावत जिला अस्पताल भवन।
- फोटो : CHAMPAWAT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंपावत। जिला अस्पताल को अति विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा देने के लिए स्वीकृत टेलीमेडिसिन सेवा शुरू नहीं हो सकी है। इस सेवा के जरिये चंपावत क्षेत्र को इंग्लैंड के रॉयल फ्री हॉस्पिटल की ओर से उच्च श्रेणी की चिकित्सकीय विशेषज्ञता दी जानी है लेकिन तीन माह बाद यहां न कोई आधारभूत ढांचा तैयार हुआ है और न ही इसके लिए स्वास्थ्य कार्मिकों को प्रशिक्षण दिया जा सका है।
स्वास्थ्य सुविधाओं में पिछड़े चंपावत जिले को नवीनतम तकनीक से युक्त अति विशिष्ट सेवाएं टेलीमेडिसिन सेवा के जरिये दी जानी हैं। इस सेवा के जरिये जिला अस्पताल में हृदय रोग, मस्तिष्क रोग सहित कई विशिष्ट इलाज दिया जाना है। फिलहाल यहां के लोग इन विशेषज्ञ सेवाओं के लिए 199 किमी दूर सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी और 401 किमी दूर एम्स ऋषिकेश जाते हैं।
चंपावत अस्पताल के मरीजों के इलाज में लंदन के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने टेलीमेडिसिन के जरिये मदद देनी है लेकिन तीन महीने बाद भी इस सेवा को अमली जामा पहनाने के लिए अस्पताल की इंटरनेट स्पीड और अन्य आधारभूत सुविधाओं को तैयार किया जा सका है। यहां तक कि स्टाफ नर्स और बेसिक हेल्थ वर्कर्स को इस सेवा के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण भी नहीं दिया जा सका है। वीडियो कांफ्रेंसिंग से बीमारी का पता लगाने, रिपोर्ट का आकलन कर जरूरी दवाएं शुरू करने से लेकर लंदन से विशेषज्ञ डॉक्टर परामर्श देंगे।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में ज्यादातर विशेषज्ञ पद खाली
चंपावत। जिला अस्पताल में इस वक्त 21 डॉक्टर हैं लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों के ज्यादातर पद खाली हैं। यहां तक कि जिला अस्पताल में नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड परीक्षण भी नहीं हो पा रहे हैं। फिलहाल हृदयरोग विशेषज्ञ, ईएनटी, यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, प्लास्टिक सर्जन के पद खाली हैं।
एमओयू होने के तीन माह बाद एक कदम भी आगे नहीं बढ़े
चंपावत। टेलीमेडिसिन सेवा के लिए पिछले साल 20 नवंबर को देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की मौजूदगी में लंदन के रॉयल फ्री हॉस्पिटल और इलारा कैपिटल के बीच एमओयू (अनुबंध) हुआ था। उत्तराखंड सरकार की ओर से स्वास्थ्य महानिदेशक और लंदन के इलारा फाउंडेशन के सीईओ राज भट्ट, रॉयल फ्री हॉस्पिटल के सर्जन डॉ. देवाशीष घोष ने हस्ताक्षर किए थे लेकिन तीन माह बाद भी इस सेवा के संचालन के लिए कोई गंभीर पहल नहीं हुई है।
चंपावत जिला अस्पताल में टेलीमेडिसिन की सेवा के लिए एमओयू हुआ है लेकिन इसके संचालन के लिए महानिदेशालय से जरूरी निर्देश नहीं मिले हैं। वहां से मिले मार्गदर्शन के बाद ही इसमें आगे कोई कदम उठाया जा सकेगा।
- डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।
विज्ञापन
स्वास्थ्य सुविधाओं में पिछड़े चंपावत जिले को नवीनतम तकनीक से युक्त अति विशिष्ट सेवाएं टेलीमेडिसिन सेवा के जरिये दी जानी हैं। इस सेवा के जरिये जिला अस्पताल में हृदय रोग, मस्तिष्क रोग सहित कई विशिष्ट इलाज दिया जाना है। फिलहाल यहां के लोग इन विशेषज्ञ सेवाओं के लिए 199 किमी दूर सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी और 401 किमी दूर एम्स ऋषिकेश जाते हैं।
विज्ञापन
चंपावत अस्पताल के मरीजों के इलाज में लंदन के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने टेलीमेडिसिन के जरिये मदद देनी है लेकिन तीन महीने बाद भी इस सेवा को अमली जामा पहनाने के लिए अस्पताल की इंटरनेट स्पीड और अन्य आधारभूत सुविधाओं को तैयार किया जा सका है। यहां तक कि स्टाफ नर्स और बेसिक हेल्थ वर्कर्स को इस सेवा के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण भी नहीं दिया जा सका है। वीडियो कांफ्रेंसिंग से बीमारी का पता लगाने, रिपोर्ट का आकलन कर जरूरी दवाएं शुरू करने से लेकर लंदन से विशेषज्ञ डॉक्टर परामर्श देंगे।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में ज्यादातर विशेषज्ञ पद खाली
चंपावत। जिला अस्पताल में इस वक्त 21 डॉक्टर हैं लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों के ज्यादातर पद खाली हैं। यहां तक कि जिला अस्पताल में नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड परीक्षण भी नहीं हो पा रहे हैं। फिलहाल हृदयरोग विशेषज्ञ, ईएनटी, यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, प्लास्टिक सर्जन के पद खाली हैं।
एमओयू होने के तीन माह बाद एक कदम भी आगे नहीं बढ़े
चंपावत। टेलीमेडिसिन सेवा के लिए पिछले साल 20 नवंबर को देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की मौजूदगी में लंदन के रॉयल फ्री हॉस्पिटल और इलारा कैपिटल के बीच एमओयू (अनुबंध) हुआ था। उत्तराखंड सरकार की ओर से स्वास्थ्य महानिदेशक और लंदन के इलारा फाउंडेशन के सीईओ राज भट्ट, रॉयल फ्री हॉस्पिटल के सर्जन डॉ. देवाशीष घोष ने हस्ताक्षर किए थे लेकिन तीन माह बाद भी इस सेवा के संचालन के लिए कोई गंभीर पहल नहीं हुई है।
चंपावत जिला अस्पताल में टेलीमेडिसिन की सेवा के लिए एमओयू हुआ है लेकिन इसके संचालन के लिए महानिदेशालय से जरूरी निर्देश नहीं मिले हैं। वहां से मिले मार्गदर्शन के बाद ही इसमें आगे कोई कदम उठाया जा सकेगा।
- डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।