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बारिश के चलते उप जिला अस्पताल में कम रही ओपीडी
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चंपावत। जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में दवाओं के लिए अब मरीजों को जेब ढीली नहीं करनी होगी। अब अस्पतालों से अनिवार्य रूप से दवाएं उपलब्ध कराईं जाएंगी। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश के बाद सीएमओ ने जिले के सभी अस्पतालों के प्रभारियों को यह आदेश जारी किया है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने 10 जुलाई को देहरादून में जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों की बैठक ली थी। इसमें अस्पतालों में सफाई कर दवाई दिलाने पर जोर दिया गया था। इस निर्देश के क्रम में सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने सभी सरकारी अस्पताल के प्रभारियों को पत्र भेजा है।
इसमें अनिवार्य रूप से अस्पताल से दवाएं देने के आदेश दिए हैं। दवाओं के लिए मरीजों को धन खर्च नहीं करना पड़े। अस्पतालों में सफाई की व्यवस्था को और बेहतर करने पर जोर दिया गया है। जिले में जिला अस्पताल सहित कुल 23 छोटे-बड़े सरकारी अस्पताल हैं।
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व्यवहार में ऐसा मुमकिन नहीं...
चंपावत। भले ही स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश के बाद सीएमओ ने दवाओं को अस्पताल से ही उपलब्ध कराने के आदेश दिए हो, लेकिन यह आदेश व्यावहारिक नहीं है।
एक अस्पताल के प्रभारी ने इस आदेश को असंभव बताया है। कहा कि अस्पतालों में वही दवाएं मंगाई जातीं हैं, जिसके विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती हो। ऐसे में न्यूरोलॉजी, हृदयरोग, ईएनटी, चर्म रोग संबंधी दवाएं अमूमन जिले में कहीं नहीं मिलतीं।
निशुल्क दवाएं तो दूर सस्ती दवा मिलना भी मुश्किल
चंपावत/लोहाघाट। एक तरफ निशुल्क दवाएं देने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर सस्ती जेनरिक दवाएं मिलना भी मुश्किल हो रहा है। चंपावत जिले में प्रधानमंत्री जन औषधि के तीन केंद्र हैं, लेकिन किसी में भी पर्याप्त दवाएं नहीं हैं। टनकपुर का दवा केंद्र पिछले साल सितंबर से बंद है।
चंपावत और लोहाघाट में 335 किस्म की दवाओं के सापेक्ष बमुश्किल 75 किस्म की ही दवाएं हैं। पीलिया, टायफायड, मल्टी विटामिन, एंटीबायोटिक, कफ की सामान्य दवाएं भी नहीं हैं।
केंद्र की फार्मासिस्ट प्रियंका मुरारी ने आवश्यक दवाओं की मांग लगातार भेजी है लेकिन दवाएं नहीं मिल सकीं हैं। इधर सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि टनकपुर के पीएम जन औषधि केंद्र को फिर से संचालित करवाया जा रहा है, जबकि चंपावत और लोहाघाट के केंद्र प्रभारियों से पर्याप्त दवाएं रखने के लिए कहा गया है।
बारिश से घटी उप जिला अस्पताल की ओपीडी
लोहाघाट (चंपावत)। बारिश के कारण मंगलवार को उप जिला अस्पताल में रोगियों को भीड़ कम रही। उपचार कराने के लिए 70 से अधिक रोगी अस्पताल पहुंचे जबकि पहले करीब 150 लोग रोज आते थे।
जहां चिकित्सकों की ओर से रोगियों का उपचार कर उन्हें आवश्यक परामर्श व दवाएं दी जा रही थी। इसके बावजूद अस्पताल परिसर पार्किंग स्थल में तब्दील हो गया।
अस्पताल में लोगों ने मनमाने तरीके से अपने वाहनों को खड़ा किया था। इससे अस्पताल का फर्श क्षतिग्रस्त हो गया है। वहीं आपात स्थिति में वाहन लाने में भी परेशानी हो रही है।
मरम्मत के बावजूद टपक रही अस्पताल की छत
लोहाघाट (चंपावत)। सरकारी अस्पताल में सुधारने के बावजूद दवा वितरण केंद्र की छत दोबारा टपकने लगी है। अस्पताल कर्मियों ने पिछले माह निरीक्षण के दौरान विधायक पूरन सिंह फर्त्याल को यह परेशानी बताई थी।
विधायक के निर्देश पर अस्पताल की छतों की मरम्मत कराने के बाद की पहली बारिश में ही दवा वितरण केंद्र की छतें फिर से टपकने लगीं हैं।
इससे कार्य करने में स्वास्थ्यकर्मियों को काफी दिक्कतें हो रहीं हैं। चिकित्साधीक्षक डॉ. जुनैद कमर ने बताया कि मरम्मत के दौरान ही पारिवारिक कारणों से ठेकेदार बाहर चला गया था। ठेकेदार को छत की मरम्मत करने के निर्देश दिए गए हैं।
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स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने 10 जुलाई को देहरादून में जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों की बैठक ली थी। इसमें अस्पतालों में सफाई कर दवाई दिलाने पर जोर दिया गया था। इस निर्देश के क्रम में सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने सभी सरकारी अस्पताल के प्रभारियों को पत्र भेजा है।
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इसमें अनिवार्य रूप से अस्पताल से दवाएं देने के आदेश दिए हैं। दवाओं के लिए मरीजों को धन खर्च नहीं करना पड़े। अस्पतालों में सफाई की व्यवस्था को और बेहतर करने पर जोर दिया गया है। जिले में जिला अस्पताल सहित कुल 23 छोटे-बड़े सरकारी अस्पताल हैं।
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व्यवहार में ऐसा मुमकिन नहीं...
चंपावत। भले ही स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश के बाद सीएमओ ने दवाओं को अस्पताल से ही उपलब्ध कराने के आदेश दिए हो, लेकिन यह आदेश व्यावहारिक नहीं है।
एक अस्पताल के प्रभारी ने इस आदेश को असंभव बताया है। कहा कि अस्पतालों में वही दवाएं मंगाई जातीं हैं, जिसके विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती हो। ऐसे में न्यूरोलॉजी, हृदयरोग, ईएनटी, चर्म रोग संबंधी दवाएं अमूमन जिले में कहीं नहीं मिलतीं।
निशुल्क दवाएं तो दूर सस्ती दवा मिलना भी मुश्किल
चंपावत/लोहाघाट। एक तरफ निशुल्क दवाएं देने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर सस्ती जेनरिक दवाएं मिलना भी मुश्किल हो रहा है। चंपावत जिले में प्रधानमंत्री जन औषधि के तीन केंद्र हैं, लेकिन किसी में भी पर्याप्त दवाएं नहीं हैं। टनकपुर का दवा केंद्र पिछले साल सितंबर से बंद है।
चंपावत और लोहाघाट में 335 किस्म की दवाओं के सापेक्ष बमुश्किल 75 किस्म की ही दवाएं हैं। पीलिया, टायफायड, मल्टी विटामिन, एंटीबायोटिक, कफ की सामान्य दवाएं भी नहीं हैं।
केंद्र की फार्मासिस्ट प्रियंका मुरारी ने आवश्यक दवाओं की मांग लगातार भेजी है लेकिन दवाएं नहीं मिल सकीं हैं। इधर सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि टनकपुर के पीएम जन औषधि केंद्र को फिर से संचालित करवाया जा रहा है, जबकि चंपावत और लोहाघाट के केंद्र प्रभारियों से पर्याप्त दवाएं रखने के लिए कहा गया है।
बारिश से घटी उप जिला अस्पताल की ओपीडी
लोहाघाट (चंपावत)। बारिश के कारण मंगलवार को उप जिला अस्पताल में रोगियों को भीड़ कम रही। उपचार कराने के लिए 70 से अधिक रोगी अस्पताल पहुंचे जबकि पहले करीब 150 लोग रोज आते थे।
जहां चिकित्सकों की ओर से रोगियों का उपचार कर उन्हें आवश्यक परामर्श व दवाएं दी जा रही थी। इसके बावजूद अस्पताल परिसर पार्किंग स्थल में तब्दील हो गया।
अस्पताल में लोगों ने मनमाने तरीके से अपने वाहनों को खड़ा किया था। इससे अस्पताल का फर्श क्षतिग्रस्त हो गया है। वहीं आपात स्थिति में वाहन लाने में भी परेशानी हो रही है।
मरम्मत के बावजूद टपक रही अस्पताल की छत
लोहाघाट (चंपावत)। सरकारी अस्पताल में सुधारने के बावजूद दवा वितरण केंद्र की छत दोबारा टपकने लगी है। अस्पताल कर्मियों ने पिछले माह निरीक्षण के दौरान विधायक पूरन सिंह फर्त्याल को यह परेशानी बताई थी।
विधायक के निर्देश पर अस्पताल की छतों की मरम्मत कराने के बाद की पहली बारिश में ही दवा वितरण केंद्र की छतें फिर से टपकने लगीं हैं।
इससे कार्य करने में स्वास्थ्यकर्मियों को काफी दिक्कतें हो रहीं हैं। चिकित्साधीक्षक डॉ. जुनैद कमर ने बताया कि मरम्मत के दौरान ही पारिवारिक कारणों से ठेकेदार बाहर चला गया था। ठेकेदार को छत की मरम्मत करने के निर्देश दिए गए हैं।