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टनकपुर में चिकित्सा सुविधा लचर, संसाधन के बाद भी रोगियों का नहीं होता इलाज

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 12 Dec 2021 12:24 AM IST
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No Facility in Tanakpur Hospital
टनकपुर का संयुक्त चिकित्सालय। संवाद - फोटो : TANAKPUR
राजेश देउपा
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टनकपुर (चंपावत)। जिले के मैदानी क्षेत्र में चिकित्सा सुविधा बहुत अच्छी नहीं है। करीब 40 बेड का अस्पताल होने के बाद भी आपातकालीन चिकित्सा के लिए मरीजों को रेफर करना अस्पताल प्रशासन की मजबूरी बनी है। विधानसभा में ट्रामा सेंटर का मुद्दा गूंजने के बाद भी ट्रामा सेंटर का सपना पूरा नहीं हो पाया है। विभाग ने इसके लिए लाखों की लागत से बने भवन का कोरोनाकाल से उपयोग शुरू दिया है।
करीब 19 साल पहले टनकपुर-चंपावत राजमार्ग पर हुए सड़क हादसे में रीठा साहिब जा रहे छह से अधिक सिख श्रद्धालुओं की मौत के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने यहां संयुक्त चिकित्सालय मंजूर किया था। वर्ष 2006 में बनकर तैयार हुआ। इसके बाद ट्रामा सेंटर के लिए वर्ष 2015 में लाखों की लागत से भवन का निर्माण हुआ।
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उम्मीद थी कि पहाड़ और मैदान के प्रवेशद्वार में बड़ा अस्पताल और ट्रामा सेंटर बनने से गहन चिकित्सा सुविधा के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन लोगों का यह सपना आज भी पूरा नहीं हो पाया है। इस वर्ष क्षेत्रीय विधायक कैलाश गहतोड़ी ने ट्रामा सेंटर का मुद्दा विधानसभा में भी उठाया था।
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इधर अस्पताल में उपलब्ध संसाधन देखें तो प्रयोगशाला, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, ओटी, आईसीयू कक्ष, वेंटिलेटर आदि सभी सुविधाएं हैं। जनरेशन प्लांट लगने के बाद ऑक्सीजन की भी दिक्कत नहीं है। जनरल सर्जन और दो-दो निश्चेतक भी तैनात हैं, लेकिन फिर भी बड़ी शल्य चिकित्सा और गहन उपचार के लिए मरीजों को दूर जाना पड़ रहा है।

ट्रामा सेंटर के लिए पदों का सृजन नहीं हो पाया है। शासन के आदेश पर विभाग ने ट्रामा सेंटर भवन का उपयोग शुरू कर दिया है। इस भवन में फिलहाल कोविड टीकाकरण का काम चल रहा है। शल्य चिकित्सा के लिए ब्लड बैंक चाहिए। छोटे ऑपरेशन तो किए जा रहे हैं, लेकिन बड़े बगैर ब्लड बैंक में बड़े ऑपरेशन में जोखिम रहता है। ब्लड बैंक की सुविधा के बाद ही बड़े ऑपरेेशन करना संभव हो पाएगा। - डॉ. घनश्याम तिवारी, सीएमएस, टनकपुर।
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