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राष्ट्रीय राजमार्ग पर टनकपुर से घाट तक शुरू हुई आवाजाही
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राष्ट्रीय राजमार्ग पर मलबा हटाने के बाद घाट तक सुचारू सड़क।
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। सोमवार सुबह से बारिश न होने के बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग को टनकपुर से घाट तक खोलने में दिनभर मशक्कत करनी पड़ी। यह मार्ग शनिवार से बंद था। एनएच पर लीसा डिपो से घाट के बीच के छह किमी हिस्से में आए मलबे को हटाने में घंटों लग गए। सोमवार शाम करीब पांच बजे टनकपुर से घाट तक का हिस्सा आवाजाही के लिए सुचारु हो सका।
इसी के साथ लोगों ने राहत की सांस ली। सड़क खुलने के बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग पर छह स्थानों पर आवागमन चुनौतीपूर्ण बना है। वहीं सोमवार को नौ ग्रामीण सड़कें खोली गई। अब जिले के 35 सड़क मार्ग अब भी बंद हैं। इससे 87 गांवों की आवाजाही से लेकर आम जनजीवन पर असर पड़ा है।
सोमवार सुबह एनएच पर टनकपुर-चंपावत के बीच दो जगह मलबा आया। इसे सुबह सात बजे तक हटा लिया गया। वहीं घाट के पास आए भारी मलबे को हटाना सोमवार को भी चुनौतीपूर्ण रहा।
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एनएच खंड के अलावा सड़क को सुचारु करवाने में गिरीश ढेक के नेतृत्व में आरजीबीएल की टीम के सत्येंद्र रावत, अभय, कपिल, पवन परिहार, मुकेश लोहनी, खीमानंद, पवन, दिनेश, मनीष, शाहरुख, सूरज, मनोज, राहुल, नरेंद्र, आशु आदि ने बेहद कठिन परिस्थितियों में सहयोग किया।
मनरेगा से हो अतिवृष्टि के नुकसान की भरपाई : फर्त्याल
चंपावत। ब्लॉक प्रमुख संगठन की प्रदेश उपाध्यक्ष विनीता फर्त्याल और पाटी की प्रमुख सुमनलता ने भारी बारिश से ग्रामीण क्षेत्रों में हुए जबर्दस्त नुकसान की युद्धस्तर पर भरपाई करने का आग्रह किया है।
कहा कि इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय भवन, दीवारें, खेत, सार्वजनिक इमारतों को खासा नुकसान हुआ है। संगठन ने आपदा मद से धन की कमी होने पर नुकसान की मरम्मत मनरेगा से करने का सुझाव दिया।
प्रमुख संगठन ने सोमवार को डीएम को ज्ञापन दिया है। डीएम विनीत तोमर ने आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया।
भारी बारिश से जिले में कई जगह हुआ नुकसान
चंपावत। जिले के कई हिस्सों में बारिश से खासा नुकसान हुआ है। चंपावत, बाराकोट क्षेत्र में सात स्थान पर दीवार टूट गई। पाटी के बरौला गांव में नारायण दत्त पचौली के खेत भूकटाव की जद में आने के अलावा मकान खतरे की जद में आ गया है।
थुवामौनी के मदन राम और रघुवर राम के आंगन की दीवार टूटने से मकान को खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से राहत का आग्रह किया है।
चंपावत जिले में बारिश का आंकड़ा
पाटी 10 मिमी
चंपावत 5 मिमी
लोहाघाट 5 मिमी
चंपावत जिले की बंद 35 ग्रामीण सड़कें
गौड़ी-किमतोली, धौन-दियूरी, रीठा-बिनवालगांव, पुनाबे-सिप्टी-न्याड़ी, ज्योश्यूड़ा-निलौटी, टाकखंदक-करौली, गल्लागांव-देवलीमाफी, चमदेवल-जाख-गजीना, रीठाखाल-मनटांडे, चौमेल मऊ-सील बरूड़ी, बैड़ा-लुवाकोट, क्वारखोली-पम्दा, खिलपति-अखिलतारिणी मंदिर, ढटीगांव-सिमलटुकरा, जीआईसी लोहाघाट-मरोड़ाखान, मरोड़ाखान पाटन-गलचौड़ा, पटनगांव-कजीना पुनौली, पनिया-रीठाखाल, तिमलागूंठ-पीपलढींग, सांगो-बिगराकोट, धौन-सल्ली, अमोड़ी-छतकोट, एसएस 29 से खटोली मल्ली, मंच-नीड़, मडलक पांडेय-सेलपेडू, नरसिंहडांडा-गुरेली, धौन-द्यूरी से बजौन, स्याला-पोथ, खटोली मल्ली-वैला, सिप्टी-अमकड़िया, धौन-बड़ौली मोटर मार्ग, रीठा-रमक, बाराकोट-कोठेरा, चौड़ापिता-परेवा और बाराकोट-मिर्तोली सड़क।
भारी बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेरा
लोहाघाट (चंपावत)। चार दिन लगातार हुई भारी बारिश ने किसानों की हाड़तोड़ मेहनत में पानी फेर दिया है। आलू सड़ने के साथ सब्जी पौध गलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। फसल बर्बाद होने के बाद किसानों के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से क्षति का मुआवजा देने की मांग की है।
पहले किसानों ने 40 से 60 रुपये किलो आलू का बीज भूखे-प्यासे रखकर खेतों में बोआई की थी। इस दौरान बारिश न होने से किसानों की फसलें सूखे की भेंट चढ़ी थी। किसानों ने जैसे-तैसे सिंचाई के संसाधन जुटाकर आलू की फसल तैयार की। फसल खोदने से पहले लगातार भारी बारिश होने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया।
किसानों की आलू की फसल सड़ गई। खेतों में बोए गए शिमला मिर्च, टमाटर, बैगन, गोभी के पौधे बारिश से गल गए। इससे किसानों को भारी नुकसान पहुंचा है। कर्ज लेकर जैसे तैसे खेती कर भविष्य की आश जगाए किसानों की फसलें चौपट होने से वह निराश हैं।
20 नाली में आलू की बुआई की थी। इसमें बरसात से पूर्व कुछ आलू की खोदाई कर दी थी। शेष 15 नाली में पूरी फसल अतिवृष्टि के कारण सड़ गई है। इससे उन्हें करीब 70 हजार रुपये का नुकसान हुआ है।
- रघुवर मुरारी।
टमाटर के साथ आलू की फसल चौपट हो गई है। प्रशासन को किसानों को नुकसान का मुआवजा देना चाहिए।
- महेश राय।
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इसी के साथ लोगों ने राहत की सांस ली। सड़क खुलने के बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग पर छह स्थानों पर आवागमन चुनौतीपूर्ण बना है। वहीं सोमवार को नौ ग्रामीण सड़कें खोली गई। अब जिले के 35 सड़क मार्ग अब भी बंद हैं। इससे 87 गांवों की आवाजाही से लेकर आम जनजीवन पर असर पड़ा है।
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सोमवार सुबह एनएच पर टनकपुर-चंपावत के बीच दो जगह मलबा आया। इसे सुबह सात बजे तक हटा लिया गया। वहीं घाट के पास आए भारी मलबे को हटाना सोमवार को भी चुनौतीपूर्ण रहा।
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एनएच खंड के अलावा सड़क को सुचारु करवाने में गिरीश ढेक के नेतृत्व में आरजीबीएल की टीम के सत्येंद्र रावत, अभय, कपिल, पवन परिहार, मुकेश लोहनी, खीमानंद, पवन, दिनेश, मनीष, शाहरुख, सूरज, मनोज, राहुल, नरेंद्र, आशु आदि ने बेहद कठिन परिस्थितियों में सहयोग किया।
मनरेगा से हो अतिवृष्टि के नुकसान की भरपाई : फर्त्याल
चंपावत। ब्लॉक प्रमुख संगठन की प्रदेश उपाध्यक्ष विनीता फर्त्याल और पाटी की प्रमुख सुमनलता ने भारी बारिश से ग्रामीण क्षेत्रों में हुए जबर्दस्त नुकसान की युद्धस्तर पर भरपाई करने का आग्रह किया है।
कहा कि इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय भवन, दीवारें, खेत, सार्वजनिक इमारतों को खासा नुकसान हुआ है। संगठन ने आपदा मद से धन की कमी होने पर नुकसान की मरम्मत मनरेगा से करने का सुझाव दिया।
प्रमुख संगठन ने सोमवार को डीएम को ज्ञापन दिया है। डीएम विनीत तोमर ने आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया।
भारी बारिश से जिले में कई जगह हुआ नुकसान
चंपावत। जिले के कई हिस्सों में बारिश से खासा नुकसान हुआ है। चंपावत, बाराकोट क्षेत्र में सात स्थान पर दीवार टूट गई। पाटी के बरौला गांव में नारायण दत्त पचौली के खेत भूकटाव की जद में आने के अलावा मकान खतरे की जद में आ गया है।
थुवामौनी के मदन राम और रघुवर राम के आंगन की दीवार टूटने से मकान को खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से राहत का आग्रह किया है।
चंपावत जिले में बारिश का आंकड़ा
पाटी 10 मिमी
चंपावत 5 मिमी
लोहाघाट 5 मिमी
चंपावत जिले की बंद 35 ग्रामीण सड़कें
गौड़ी-किमतोली, धौन-दियूरी, रीठा-बिनवालगांव, पुनाबे-सिप्टी-न्याड़ी, ज्योश्यूड़ा-निलौटी, टाकखंदक-करौली, गल्लागांव-देवलीमाफी, चमदेवल-जाख-गजीना, रीठाखाल-मनटांडे, चौमेल मऊ-सील बरूड़ी, बैड़ा-लुवाकोट, क्वारखोली-पम्दा, खिलपति-अखिलतारिणी मंदिर, ढटीगांव-सिमलटुकरा, जीआईसी लोहाघाट-मरोड़ाखान, मरोड़ाखान पाटन-गलचौड़ा, पटनगांव-कजीना पुनौली, पनिया-रीठाखाल, तिमलागूंठ-पीपलढींग, सांगो-बिगराकोट, धौन-सल्ली, अमोड़ी-छतकोट, एसएस 29 से खटोली मल्ली, मंच-नीड़, मडलक पांडेय-सेलपेडू, नरसिंहडांडा-गुरेली, धौन-द्यूरी से बजौन, स्याला-पोथ, खटोली मल्ली-वैला, सिप्टी-अमकड़िया, धौन-बड़ौली मोटर मार्ग, रीठा-रमक, बाराकोट-कोठेरा, चौड़ापिता-परेवा और बाराकोट-मिर्तोली सड़क।
भारी बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेरा
लोहाघाट (चंपावत)। चार दिन लगातार हुई भारी बारिश ने किसानों की हाड़तोड़ मेहनत में पानी फेर दिया है। आलू सड़ने के साथ सब्जी पौध गलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। फसल बर्बाद होने के बाद किसानों के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से क्षति का मुआवजा देने की मांग की है।
पहले किसानों ने 40 से 60 रुपये किलो आलू का बीज भूखे-प्यासे रखकर खेतों में बोआई की थी। इस दौरान बारिश न होने से किसानों की फसलें सूखे की भेंट चढ़ी थी। किसानों ने जैसे-तैसे सिंचाई के संसाधन जुटाकर आलू की फसल तैयार की। फसल खोदने से पहले लगातार भारी बारिश होने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया।
किसानों की आलू की फसल सड़ गई। खेतों में बोए गए शिमला मिर्च, टमाटर, बैगन, गोभी के पौधे बारिश से गल गए। इससे किसानों को भारी नुकसान पहुंचा है। कर्ज लेकर जैसे तैसे खेती कर भविष्य की आश जगाए किसानों की फसलें चौपट होने से वह निराश हैं।
20 नाली में आलू की बुआई की थी। इसमें बरसात से पूर्व कुछ आलू की खोदाई कर दी थी। शेष 15 नाली में पूरी फसल अतिवृष्टि के कारण सड़ गई है। इससे उन्हें करीब 70 हजार रुपये का नुकसान हुआ है।
- रघुवर मुरारी।
टमाटर के साथ आलू की फसल चौपट हो गई है। प्रशासन को किसानों को नुकसान का मुआवजा देना चाहिए।
- महेश राय।