फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Nepalese children could go home after a year

एक वर्ष पहले बिछड़ा नेपाली बालक पहुंचा घर

Wed, 29 Jun 2016 11:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बनबसा (चंपावत)
ब्यूरो/अमर उजाला, बनबसा (चंपावत) Updated Wed, 29 Jun 2016 11:17 PM IST
विज्ञापन
Nepalese children could go home after a year
सालभर बाद घर जा सका नेपाली बालक - फोटो : अमर उजाला

बनबसा (चंपावत)। एक वर्ष बाद नेपाली बालक को उसके परिजन मिल गए। बुधवार को बनबसा स्थित एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की मदद से उसे माईते नेपाल संस्था के सुपुर्द किया गया। संस्था नेपाली बालक को उसके परिजनों के सुपुर्द करेगी।

विज्ञापन


करीब एक वर्ष पहले नेपाल के ग्राम बिस्खेत मान्मा बाजार वार्ड संख्या 4 जिला कालीकोट, कर्णाली अंचल निवासी रमेश टम्टा (12) पुत्र स्व. हरीश टम्टा को उसके जीजी का भाई नेपाल से भारत ले आया। उसने बालक को भीमताल विकास खंड के एक ग्रामप्रधान के घर पर बाद में ले जाने की बात कहकर घरेलू काम पर लगा दिया।
विज्ञापन


छह माह तक नेपाली बालक ग्रामप्रधान के घर पर बर्तन धोने जैसे कार्य करता रहा, जिसके एवज में उसे केवल दो वक्त का खाना मिलता था। लगभग छह माह बाद वह प्रधान के घर से भाग गया और भीमताल में पैराशूट पैकिंग का कार्य करने लगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


यहां भी उसे पैसे नहीं मिलते थे। इसके बाद वहां से वो हल्द्वानी पहुंचा। हल्द्वानी में वो रोते हुए बनबसा के लिए बस की तलाश कर रहा था। इसी बीच किसी व्यक्ति ने चाइल्ड हेल्पलाइन पर बालक के बारे में जानकारी दी। हेल्पलाइन उसे अपने साथ नैनीताल ले गई और काउंसलिंग की।

बाद में हेल्पलाइन ने उसे घर पहुंचाने के लिए ऊधम सिंह नगर की चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंप दिया। बुधवार को चाइल्ड हेल्पलाइन के काउंसलर रहमत हुसैन उसे लेकर बनबसा एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट पहुंचे, जहां उक्त नेपाली बालक को नेपाल पुलिस की मौजूदगी में नेपाली संस्था माईते के सुपुर्द कर दिया गया।

गरीबी और हालात किसी को भी भटका देते हैं। ऐसा ही नेपाली बालक रमेश के साथ हुआ। रमेश स्कूल में पढ़ रहा था। उसने चौथी कक्षा तक पढ़ाई की। अचानक पिता की मौत के बाद उसकी मां ने दूसरा विवाह कर लिया। उसकी परवरिश तरीके से नहीं हो पा रही थी।


तंगी और परेशानी के हालातों में वो अपने जीजा के भाई की बातों में आ गया। एक दिन उसके जीजा का भाई उसे बहला फुसलाकर भारत ले आया। रमेश ने अमर उजाला को बताया कि उसे भारत में अच्छा नहीं लग रहा था। पढ़ाई उसे रास आती थी। भारत में भी काम के बदले पैसा नहीं मिला।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed