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Champawat News: मानेश्वर क्षेत्र में दिख रहा तेंदुआ, दहशत में लोग
Wed, 15 Nov 2023 10:57 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Wed, 15 Nov 2023 10:57 PM IST
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चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मानेश्वर के पास आठ दिन से कई बार तेंदुआ दिख रहा है। इससे क्षेत्र के लोगों में दहशत है। ग्रामीणों ने तेंदुए से निजात दिलाने के लिए वन विभाग से ठोस कदम उठाने की मांग की है।
जिला मुख्यालय से सात किमी दूर एनएच के किनारे, मझेड़ा और मानेश्वर के पार्क में कई बार तेंदुए के दिखने से लोग डरे हुए हैं। इस कारण लोग शाम होते ही घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। वहीं खेती, घास लेने और दूसरे कार्यों के लिए भी समूह में ही जा रहे हैं। ग्रामीण उमेश जोशी, पुष्कर मेहता, हिमांशु, किशोर जोशी, राजेश जोशी, मनोज रावत, पुष्कर रावत, गिरीश उप्रेती, कंचन जोशी, भावना आदि ने वन विभाग से पिंजरा लगाने की मांग की है।
सूखीढांग में 50 दिन बाद भी पिंजरे से दूर तेंदुआ
चंपावत। सूखीढांग क्षेत्र में मुसीबत बने तेंदुए को पकड़ने के लिए ट्रैंकुलाइजर गन से कामयाबी नहीं मिल रही है। इस पूरे क्षेत्र में दो पिंजरें, 15 कैमरे लगाने के अलावा वन कर्मी और ट्रैंकुलाइज करने वाली टीम आठवें मील पर तैनात है।
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सूखीढांग के गजार गांव में तेंदुए ने दो जुलाई को एक भोजनमाता को मार डाला था। इसके बाद से तेंदुआ एनएच से गुजरने वाले 18 बाइक सवारों पर हमला कर चुका है। खौफ को देखते हुए 26 सितंबर से तेंदुए को दबोचने के लिए ट्रैंकुलाइजर गन और फिर पिछले माह नैनीताल चिड़ियाघर से लाए तेंदुए के मूत्र के छिड़काव विधि का उपयोग भी असरकारक नहीं रहा।
डीएफओ आरसी कांडपाल का कहना है कि तेंदुए को बेहोश करने के लिए ट्रैंकुलाइजर टीम 26 सितंबर से टीम तैनात है। 15 अक्तूबर से चिड़ियाघर से लाए तेंदुए के मूत्र और मिट्टी का पिंजरे के आसपास छिड़काव कर तेंदुए को पकड़ने का विकल्प अपनाया गया है लेकिन अभी तक तेंदुआ नहीं पकड़ा जा चुका है।
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जिला मुख्यालय से सात किमी दूर एनएच के किनारे, मझेड़ा और मानेश्वर के पार्क में कई बार तेंदुए के दिखने से लोग डरे हुए हैं। इस कारण लोग शाम होते ही घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। वहीं खेती, घास लेने और दूसरे कार्यों के लिए भी समूह में ही जा रहे हैं। ग्रामीण उमेश जोशी, पुष्कर मेहता, हिमांशु, किशोर जोशी, राजेश जोशी, मनोज रावत, पुष्कर रावत, गिरीश उप्रेती, कंचन जोशी, भावना आदि ने वन विभाग से पिंजरा लगाने की मांग की है।
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सूखीढांग में 50 दिन बाद भी पिंजरे से दूर तेंदुआ
चंपावत। सूखीढांग क्षेत्र में मुसीबत बने तेंदुए को पकड़ने के लिए ट्रैंकुलाइजर गन से कामयाबी नहीं मिल रही है। इस पूरे क्षेत्र में दो पिंजरें, 15 कैमरे लगाने के अलावा वन कर्मी और ट्रैंकुलाइज करने वाली टीम आठवें मील पर तैनात है।
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सूखीढांग के गजार गांव में तेंदुए ने दो जुलाई को एक भोजनमाता को मार डाला था। इसके बाद से तेंदुआ एनएच से गुजरने वाले 18 बाइक सवारों पर हमला कर चुका है। खौफ को देखते हुए 26 सितंबर से तेंदुए को दबोचने के लिए ट्रैंकुलाइजर गन और फिर पिछले माह नैनीताल चिड़ियाघर से लाए तेंदुए के मूत्र के छिड़काव विधि का उपयोग भी असरकारक नहीं रहा।
डीएफओ आरसी कांडपाल का कहना है कि तेंदुए को बेहोश करने के लिए ट्रैंकुलाइजर टीम 26 सितंबर से टीम तैनात है। 15 अक्तूबर से चिड़ियाघर से लाए तेंदुए के मूत्र और मिट्टी का पिंजरे के आसपास छिड़काव कर तेंदुए को पकड़ने का विकल्प अपनाया गया है लेकिन अभी तक तेंदुआ नहीं पकड़ा जा चुका है।