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जेसीबी चालकों के भरोसे पर हो रही पहाड़ की कटिंग
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Wed, 13 Dec 2017 10:28 PM IST
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निर्माणाधीन बारहमासी सड़क पर रात को मलबा साफ करता पाेकलैंड
- फोटो : अमर उजाला
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बारहमासी (ऑल वैदर) सड़क में युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। हाल यह है कि रात में भी मशीन पहाड़ को काट रही है। इसके लिए शाम सात बजे से सुबह पांच बजे तक राष्ट्रीय राजमार्ग में वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। रात में कार्य के दौरान सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। चालक मशीनों की लाइट के उजाले में काम करने को मजबूर हैं।
अमर उजाला टीम द्वारा मंगलवार की रात को गई पड़ताल के दौरान रात में निर्माण स्थल पर खतरों के बीच काम कर रहे मजदूरों के साथ न तो कार्यदायी संस्था का कोई अभियंता दिखा, न ही संबंधित कंपनी को कोई जिम्मेदारअधिकारी नजर आया। यहां तक कि डंपिंग जोन के बजाय भारी मलबे को बेधड़क सड़क से नीचे फेंककर हरियाली को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। 1065 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली बारहमासी सड़क के काम को 2019 में पूरा होना है। बनलेख से स्वांला के बीच तीन जगहों पर रात में निर्माण कार्य चल रहा है। कार्यदायी संस्था राष्ट्रीय राजमार्ग खंड तय समय पर काम पूरा करने और यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए रात में भी काम करा रहा है।
विभाग का कहना है कि आपात काल में वाहनों के लिए रास्ता बनाने के निर्देश दिए गए हैं। मगर हकीकत में राष्ट्रीय राजमार्ग के कटिंग के दौरान इतना मलबा गिर रहा है कि दो मशीनें लगाने के बाद भी उसे साफ करने में तीन से चार घंटे का समय लग रहा है। ऐसे में आपातकालीन वाहनों को कैसे समय पर रास्ता दिया जा सकेगा? इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
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जेसीबी और पोकलैंड मशीन के चालक कम रोशनी में कटिंग का काम कर रहे हैं। उजाले की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से खतरा बराबर बना हुआ है। जबकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि टनकपुर से बेलखेत के बीच काम करने के लिए मौक स्लाइड लाइट की व्यवस्था की गई है। जल्द ही अन्य स्थानों में भी लाइट के उजाले में कटिंग का काम किया जाएगा। पड़ताल के दौरान रात में चल रहे निर्माण कार्य पर नजर रखने के लिए मौके पर कार्यदायी संस्था और संबंधित कंपनी का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं मिला। पोकलैंड और जेसीबी चालक बिना किसी जिम्मेदार अधिकारी की देखरेख में पहाड़ की कटिंग का काम कर रहे थे, जबकि संबंधित विभाग के अधिकारी काम पर नजर रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारी तैनात किए जाने की बात कर रहे हैं।
चारों कंपनियों को 20 से अधिक नोटिस भेजे जा चुके हैं
अभी तक सड़क निर्माण कर रही चारों कंपनियों को 20 से अधिक नोटिस भेजे जा चुके हैं। विभाग ने ये नोटिस नियमों की अनदेखी करने पर दिए हैं। नियमों के तहत संबंधित कंपनी को काम में गुणवत्ता बनाए रखने, यातायात सुचारु करने, बारिश होने पर मशीनों को मौके पर भेजने और मलबे को डंपिंग जोन पर डाला जाना है। पर कई जगह इनकी अनदेखी की गई है। नोटिस के बाद मिलने वाले जवाब के हिसाब से कार्यवाही की जाएगी।
गुणवत्ता जांच के लिए सात सदस्यीय टीम गठित
टनकपुर से पिथौरागढ़ के बीच चार कंपनियां बारहमासी सड़क निर्माण का काम कर रही हैं। काम की गुणवत्ता बनाए रखने और निर्माण कार्य पर नजर रखने को तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) को जिम्मा दिया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए हर जॉब में सात सदस्यीय इंजीनियरिंग टीम का गठन किया गया है।
कोट
बारहमासी सड़क निर्माण में लगातार नजर रखी जा रही है। संबंधित कंपनियों को अब तक 20 से अधिक नोटिस भेजे जा चुके हैं। रात में निर्माण कार्य के लिए उच्च तकनीक वाली बिजली की व्यवस्था करने को कहा गया है। काम पर नजर रखने के लिए संबंधित कंपनी और राष्ट्रीय राजमार्ग खंड का जिम्मेदार अधिकारी तैनात किया गया है।
एनसी पांडेय,
सहायक अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड।
अमर उजाला टीम द्वारा मंगलवार की रात को गई पड़ताल के दौरान रात में निर्माण स्थल पर खतरों के बीच काम कर रहे मजदूरों के साथ न तो कार्यदायी संस्था का कोई अभियंता दिखा, न ही संबंधित कंपनी को कोई जिम्मेदारअधिकारी नजर आया। यहां तक कि डंपिंग जोन के बजाय भारी मलबे को बेधड़क सड़क से नीचे फेंककर हरियाली को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। 1065 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली बारहमासी सड़क के काम को 2019 में पूरा होना है। बनलेख से स्वांला के बीच तीन जगहों पर रात में निर्माण कार्य चल रहा है। कार्यदायी संस्था राष्ट्रीय राजमार्ग खंड तय समय पर काम पूरा करने और यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए रात में भी काम करा रहा है।
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विभाग का कहना है कि आपात काल में वाहनों के लिए रास्ता बनाने के निर्देश दिए गए हैं। मगर हकीकत में राष्ट्रीय राजमार्ग के कटिंग के दौरान इतना मलबा गिर रहा है कि दो मशीनें लगाने के बाद भी उसे साफ करने में तीन से चार घंटे का समय लग रहा है। ऐसे में आपातकालीन वाहनों को कैसे समय पर रास्ता दिया जा सकेगा? इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
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जेसीबी और पोकलैंड मशीन के चालक कम रोशनी में कटिंग का काम कर रहे हैं। उजाले की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से खतरा बराबर बना हुआ है। जबकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि टनकपुर से बेलखेत के बीच काम करने के लिए मौक स्लाइड लाइट की व्यवस्था की गई है। जल्द ही अन्य स्थानों में भी लाइट के उजाले में कटिंग का काम किया जाएगा। पड़ताल के दौरान रात में चल रहे निर्माण कार्य पर नजर रखने के लिए मौके पर कार्यदायी संस्था और संबंधित कंपनी का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं मिला। पोकलैंड और जेसीबी चालक बिना किसी जिम्मेदार अधिकारी की देखरेख में पहाड़ की कटिंग का काम कर रहे थे, जबकि संबंधित विभाग के अधिकारी काम पर नजर रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारी तैनात किए जाने की बात कर रहे हैं।
चारों कंपनियों को 20 से अधिक नोटिस भेजे जा चुके हैं
अभी तक सड़क निर्माण कर रही चारों कंपनियों को 20 से अधिक नोटिस भेजे जा चुके हैं। विभाग ने ये नोटिस नियमों की अनदेखी करने पर दिए हैं। नियमों के तहत संबंधित कंपनी को काम में गुणवत्ता बनाए रखने, यातायात सुचारु करने, बारिश होने पर मशीनों को मौके पर भेजने और मलबे को डंपिंग जोन पर डाला जाना है। पर कई जगह इनकी अनदेखी की गई है। नोटिस के बाद मिलने वाले जवाब के हिसाब से कार्यवाही की जाएगी।
गुणवत्ता जांच के लिए सात सदस्यीय टीम गठित
टनकपुर से पिथौरागढ़ के बीच चार कंपनियां बारहमासी सड़क निर्माण का काम कर रही हैं। काम की गुणवत्ता बनाए रखने और निर्माण कार्य पर नजर रखने को तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) को जिम्मा दिया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए हर जॉब में सात सदस्यीय इंजीनियरिंग टीम का गठन किया गया है।
कोट
बारहमासी सड़क निर्माण में लगातार नजर रखी जा रही है। संबंधित कंपनियों को अब तक 20 से अधिक नोटिस भेजे जा चुके हैं। रात में निर्माण कार्य के लिए उच्च तकनीक वाली बिजली की व्यवस्था करने को कहा गया है। काम पर नजर रखने के लिए संबंधित कंपनी और राष्ट्रीय राजमार्ग खंड का जिम्मेदार अधिकारी तैनात किया गया है।
एनसी पांडेय,
सहायक अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड।