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मां पूर्णागिरि मंदिर के पास निर्माण नामंजूर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 04 Oct 2015 10:37 PM IST
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मां पूर्णागिरि मंदिर की पहाड़ी में आई दरारों के मद्देनजर प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर किसी भी तरह के निर्माण नहीं करने की हिदायत दी है। साथ ही डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि मुख्य मंदिर की दरारों के ट्रीटमेंट का जिम्मा उत्तराखंड डिजास्टर रिकवरी प्रोजेक्ट (यूडीआरपी) को सौंपा गया है। उन्होंने मुख्य मंदिर में दबाव कम करनेके निर्देश भी दिए।
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इस बाबत रविवार को कलेक्ट्रेट में हुई बैठक में पूर्णागिरि धाम के पुजारियों ने दरारों को पाटने के लिए कामचलाऊ उपाय करने का आग्रह किया, मगर मुख्य धाम की पहाड़ी की दरारों की संवेदनशीलता के मद्देनजर प्रशासन ने ऐसा करने से मना कर दिया। डीएम ने बताया कि लोनिवि और कुमाऊं मंडल विकास निगम ने तकनीकी क्षमता नहीं होने से दरारें पटाने में अक्षमता जाहिर की थी, उसके बाद इस काम जिम्मा यूडीआरपी को सौंपा गया है। दरारों के ट्रीटमेंट के लिए 6 अक्तूबर को देहरादून में मुख्य सचिव राकेश शर्मा बैठक लेंगे। बैठक में इस काम की विशेषज्ञता रखने वाली यूनान की नामी कंसलटेंट एजेंसी भी रहेगी। ये एजेंसी डीपीआर, कंसल्टेंसी और सुपरविजन करेगी।
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बैठक में कंसल्टेंसी एजेंसी के अलावा सचिव और लोनिवि के मुख्य अभियंता मौजूद रहेंगे। मां पूर्णागिरि मंदिर की दरारों को भरने के लिए प्रशासन के पास वर्षों से 1.13 करोड़ रुपये पड़े हैं। बता दें कि सितंबर 2008 में मां पूर्णागिरि धाम के काली मंदिर को हुए नुकसान के बाद पहली बार मुख्य मंदिर की पहाड़ी में दरारें नजर आई थीं। ये दरारें करीब 4 से 5 इंच चौड़ी हैं।
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13 अक्तूबर से नवरात्र शुरू होने के साथ मां पूर्णागिरि मंदिर में श्रद्धालुओं के आने का क्रम शुरू हो जाएगा। इसके मद्देनजर हुई बैठक में इन दरारों से मुख्य मंदिर और प्रांगण को सुरक्षित रखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ नियंत्रित करने से लेकर कई सुझाव दिए गए। बैठक में एसडीएम नरेश दुर्गापाल, लोनिवि के अभियंता और पूर्णागिरि धाम के पुजारी मौजूद थे।
वास्तुविद् साह ने दिया आयरन स्ट्रक्चर का सुझाव
पिथौरागढ़ के वास्तुकार प्रो. डीएल साह ने मंदिर प्रांगण में आई दरारों के समाधान के रूप में आयरन स्ट्रक्चर का सुझाव दिया। डमरू आकार में इस ढांचे को तीन तरफ से बांधा जाए। ढांचे की मजबूती के लिए स्टील गार्डर कॉलम का उपयोग हो। दरारें भरने के साथ कंक्रीट की पैकिंग को दरार के भीतर डालना होगा। जन दबाव को कम करने के लिए मुख्य मंदिर प्रांगण को खास आकार देने के साथ विस्तार देने, बरसात के पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए पूर्णागिरि की पहाड़ी में शीर्ष, मध्य और निचले हिस्से में ड्रेनेज सिस्टम बनाने का सुझाव दिया।