{"_id":"617ee8945c7a2a7c465d9d41","slug":"model-phc-of-champawat-champawat-news-hld44329304","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रदेश के हर ब्लॉक का एक पीएचसी बनेगा मॉडल अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रदेश के हर ब्लॉक का एक पीएचसी बनेगा मॉडल अस्पताल
विज्ञापन
पाटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंपावत। जिले में पाटी का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) वर्ष 2018 से लगातार हर साल सबसे बेहतरीन अस्पताल के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कायाकल्प योजना में आगे रहा है। इसके बावजूद इस अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पाता है। यहां तक कि खून की मामूली जांच तक नहीं हो पाती है।
मरीजों को उच्च केंद्र रेफर करना पड़ता है। इसकी मुख्य वजह पीएचसी में सुविधाओं की कमी है लेकिन अगले कुछ महीनों में इस स्थिति में बदलाव आ सकता है क्योंकि प्रदेश के सभी 13 जिलों के सभी 95 ब्लॉकों के एक-एक पीएचसी को मॉडल पीएचसी में बदलने की योजना है।
उत्तराखंड में 256 ए श्रेणी और 52 बी श्रेणी के पीएचसी हैं। भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) के मुताबिक बी श्रेणी वाले अस्पतालों में डॉक्टरों के दो पद सृजित हैं, जबकि ए श्रेणी के पीएचसी अकेले डॉक्टर के सहारे हैं। फार्मासिस्ट, नर्स और वार्ड ब्वॉय के पद और होते हैं लेकिन इन अस्पतालों में एक्सरे तो दूर, पैथोलॉजी में जांच तक नहीं होती है।
विज्ञापन
इन कारणों से गांव के लोगों को इलाज के लिए शहर की दौड़ लगानी पड़ती है। गांव के नजदीक इलाज न मिलने और मरीज को अतिरिक्त खर्च करने के साथ ही एसडीएच या जिला अस्पताल पर भार भी बढ़ता है। इसके मद्देनजर अब हर ब्लॉक में एक-एक पीएचसी को मॉडल अस्पताल बनाया जाएगा। इनमें सुविधाओं के विस्तार के साथ जरूरत के अनुरूप दवाओं की उपलब्धता कराई जाएगी। संवाद
उत्तराखंड के हर ब्लॉक में एक-एक मॉडल पीएचसी बनाने का लक्ष्य है। डॉक्टरों सहित सभी सृजित पदों को भरने के साथ ही अस्पताल को आधारभूत सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। इस प्रस्ताव के क्रियान्वयन के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इससे लोगों को गांवों के नजदीक इलाज मिलेगा और बड़े अस्पतालों में भी दबाव कम होगा। - डॉ. आरपी खंडूरी, अपर स्वास्थ्य निदेशक, देहरादून।
क्यों जरूरी है बेहतर पीएचसी
1. पहाड़ों के भौगोलिक हालात में गांवों के पास होने से मरीजों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का पहला पड़ाव ये पीएचसी हैं।
2. ये पीएचसी स्वास्थ्य की देखभाल की सुविधाओं के मूल स्तंभ होने के साथ मरीज के लिए भी मददगार होंगे।
3. पीएचसी के सुदृढ़ होने से 70 प्रतिशत से अधिक रोगियों का इलाज यहीं मुमकिन हैं। ऐसे में केवल जटिल मामलों को ही एसडीएच या डीएच तक रेफर किया जाएगा।
विज्ञापन
मरीजों को उच्च केंद्र रेफर करना पड़ता है। इसकी मुख्य वजह पीएचसी में सुविधाओं की कमी है लेकिन अगले कुछ महीनों में इस स्थिति में बदलाव आ सकता है क्योंकि प्रदेश के सभी 13 जिलों के सभी 95 ब्लॉकों के एक-एक पीएचसी को मॉडल पीएचसी में बदलने की योजना है।
विज्ञापन
उत्तराखंड में 256 ए श्रेणी और 52 बी श्रेणी के पीएचसी हैं। भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) के मुताबिक बी श्रेणी वाले अस्पतालों में डॉक्टरों के दो पद सृजित हैं, जबकि ए श्रेणी के पीएचसी अकेले डॉक्टर के सहारे हैं। फार्मासिस्ट, नर्स और वार्ड ब्वॉय के पद और होते हैं लेकिन इन अस्पतालों में एक्सरे तो दूर, पैथोलॉजी में जांच तक नहीं होती है।
विज्ञापन
इन कारणों से गांव के लोगों को इलाज के लिए शहर की दौड़ लगानी पड़ती है। गांव के नजदीक इलाज न मिलने और मरीज को अतिरिक्त खर्च करने के साथ ही एसडीएच या जिला अस्पताल पर भार भी बढ़ता है। इसके मद्देनजर अब हर ब्लॉक में एक-एक पीएचसी को मॉडल अस्पताल बनाया जाएगा। इनमें सुविधाओं के विस्तार के साथ जरूरत के अनुरूप दवाओं की उपलब्धता कराई जाएगी। संवाद
उत्तराखंड के हर ब्लॉक में एक-एक मॉडल पीएचसी बनाने का लक्ष्य है। डॉक्टरों सहित सभी सृजित पदों को भरने के साथ ही अस्पताल को आधारभूत सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। इस प्रस्ताव के क्रियान्वयन के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इससे लोगों को गांवों के नजदीक इलाज मिलेगा और बड़े अस्पतालों में भी दबाव कम होगा। - डॉ. आरपी खंडूरी, अपर स्वास्थ्य निदेशक, देहरादून।
क्यों जरूरी है बेहतर पीएचसी
1. पहाड़ों के भौगोलिक हालात में गांवों के पास होने से मरीजों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का पहला पड़ाव ये पीएचसी हैं।
2. ये पीएचसी स्वास्थ्य की देखभाल की सुविधाओं के मूल स्तंभ होने के साथ मरीज के लिए भी मददगार होंगे।
3. पीएचसी के सुदृढ़ होने से 70 प्रतिशत से अधिक रोगियों का इलाज यहीं मुमकिन हैं। ऐसे में केवल जटिल मामलों को ही एसडीएच या डीएच तक रेफर किया जाएगा।