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राहुल के साथ होता तो चार को मैं भी मार देता
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पुलवामा में शहीद हुए चंपावत के राहुल रैंसवाल। (फाइल फोटो)
- फोटो : CHAMPAWAT
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए राहुल रैंसवाल के घर में शहादत के बाद देशभक्ति का ज्वार बह रहा है। सेना में रह चुके शहीद के पिता वीरेंद्र रैंसवाल कहते हैं ‘मैं भी अगर राहुल के साथ होता तो चार आतंकियों को तो मार ही देता।’ वह कहते हैं कि अब समय आ गया है कि पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दिया जाए।
राहुल के घर पहुंचे सेना के पूर्व अधिकारी और पूर्व सैनिकों ने राहुल की शहादत को नमन करते हुए कहा कि हमारी सेना और प्रधानमंत्री को पाकिस्तान को करारा जवाब देना चाहिए। एक के बदले चार शव दुश्मन के आने चाहिए। लोगों ने राहुल के घर में वंदे मातरम्, भारत माता की जय, राहुल जिंदाबाद, राहुल तेरा यह बलिदान, याद रखेगा हिंदुस्तान आदि के नारे लगाए।
यादें : राहुल ने कहा था-दो साल में सेना में भर्ती होकर दिखा दूंगा
चंपावत। शहीद राहुल रैंसवाल को सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का जुनून बचपन से ही था। हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद राहुल ने अपने बड़े भाई की तरह सेना में भर्ती होने के लिए तैयारियां तेज कर दीं थीं। इस बीच उसके मौसा चंचल सिंह बिष्ट ने जब पढ़ाई लिखाई में ध्यान देने की बात कही तो राहुल ने कहा था कि वह दो साल के भीतर सेना में भर्ती होकर दिखा देगा। चंचल सिंह बताते हैं कि इसके एक साल बाद ही उसने सेना में भर्ती होकर अपना वादा निभाया।
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राहुल के घर पहुंचे सेना के पूर्व अधिकारी और पूर्व सैनिकों ने राहुल की शहादत को नमन करते हुए कहा कि हमारी सेना और प्रधानमंत्री को पाकिस्तान को करारा जवाब देना चाहिए। एक के बदले चार शव दुश्मन के आने चाहिए। लोगों ने राहुल के घर में वंदे मातरम्, भारत माता की जय, राहुल जिंदाबाद, राहुल तेरा यह बलिदान, याद रखेगा हिंदुस्तान आदि के नारे लगाए।
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यादें : राहुल ने कहा था-दो साल में सेना में भर्ती होकर दिखा दूंगा
चंपावत। शहीद राहुल रैंसवाल को सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का जुनून बचपन से ही था। हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद राहुल ने अपने बड़े भाई की तरह सेना में भर्ती होने के लिए तैयारियां तेज कर दीं थीं। इस बीच उसके मौसा चंचल सिंह बिष्ट ने जब पढ़ाई लिखाई में ध्यान देने की बात कही तो राहुल ने कहा था कि वह दो साल के भीतर सेना में भर्ती होकर दिखा देगा। चंचल सिंह बताते हैं कि इसके एक साल बाद ही उसने सेना में भर्ती होकर अपना वादा निभाया।
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