फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Martyr Rahul

तो देश के लिए सर्वोच्च बलिदान का इंतजार कर रहे थे राहुल!

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jan 2020 11:09 PM IST
विज्ञापन
Martyr Rahul
पाटी में कैंडल जला शहीद राहुल रैंसवाल को श्रद्धासुमन अर्पित करते लोग। - फोटो : CHAMPAWAT
18 कुमाऊं के जवान राहुल रैंसवाल में गजब का जज्बा था। दिलेरी उनमें कूटकूट कर भरी थी। बेहद हिम्मत और बहादुरी के काम को करने में वह सदा आगे रहते। इसी जज्बे के चलते उन्होंने सबसे कठिन राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) में शानदार ढंग से 30 माह की सेवा की अवधि को पूरा कर लिया था। ये कहना है शहीद राहुल रैंसवाल के पार्थिव शव को लेकर आए उनके साथियों का।
विज्ञापन

कश्मीर से राहुल के पार्थिव शरीर को लेकर आए आरआर के नायब सूबेदार तारा दत्त और राजेंद्र भट्ट बताते हैं कि राहुल रैंसवाल ने आरआर की सेवा की अधिकतम 30 माह की अवधि पूरी की ली थी। उन्हें उनकी 18 कुमाऊं यूनिट में भेजे जाने के लिए आदेश भी हो चुके थेे।
विज्ञापन

राहुल का स्थानांतरण पूर्वोत्तर राज्य अरुणांचल प्रदेश के तवांग में हो गया था, लेकिन प्रतिस्थानी के नहीं आने से वे आरआर में ही सेवा दे रहे थे। जल्द ही प्रतिस्थानी को पहुंचना था, जिसके बाद राहुल तवांग में ज्वाइनिंग कर लेते, लेकिन इससे पहले ही 21 जनवरी को पुलवामा में कुछ आतंकियों के छुपे होने की खबर मिलने पर आरआर ने मोर्चा संभाला, जिसमें उन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

असम रायफल्स में सेवा कर चुके पिता वीरेंद्र सिंह रैंसवाल बेटे को खोने के बावजूद उनकी शहादत से अपने गम को पीछे छोड़ चुके हैं।
राज्य बनने के बाद चंपावत जिले से पहली शहादत
चंपावत। राज्य गठन के बाद जिले की पहली शहादत में वीर जवान राहुल रैंसवाल का नाम दर्ज हो गया है। नवंबर 2000 में के बाद यह चंपावत जिले की पहली शहादत है। हालांकि तब से पहले चंपावत जिला क्षेत्र से कुल 73 लोग विभिन्न युद्ध, ऑपरेशन या सामान्य समय में शहीद हो चुके हैं। क्षेत्र के लोगों ने राहुल रैंसवाल के नाम पर चंपावत के राजकीय महाविद्यालय का नाम रखने की मांग की है।
इसके अलावा चंपावत जीआईसी तिराहे के नामकरण भी उन्हीं के नाम पर करने की मांग उठाई है। इस मांग को पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सनी वर्मा, मनोज तड़ागी, प्रकाश बिनवाल, कमल मेहरा, पारस महर, हरीश जोशी, अमित चौधरी आदि ने प्रदेश के कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्या के सम्मुख उठाया। मंत्री ने अपनी ओर से इसे लेकर पूरे प्रयास करने का आश्वासन दिया। साथ ही शहीद के परिवार को हर मुमकिन मदद का भरोसा भी दिलाया।
गोदी में उठाकर मासूम बेटी को कराए शहीद पिता के दर्शन
चंपावत। नौ माह की मासूम को घर में लोगों का हुजूम तो दिख रहा था, मगर इस नन्हीं बच्ची को नहीं पता था कि उसके पिता राहुल रैंसवाल देश के लिए सर्वोच्च कुर्बानी दे चुके हैं। अब वे कभी नहीं लौटेंगे। नन्हीं बच्ची को उनके ताऊ राजेश रैंसवाल और अन्य लोगों ने गोदी में उठाकर शहीद पिता के अंतिम दर्शन कराए। इस मौके पर माहौल बेहद भावुक हो गया।

कैंडल जला श्रद्धांजलि दी
पाटी (चंपावत)। पाटी में युवाओं ने मुख्य स्टेशन से लेकर न्यू कालोनी तक कैंडल मार्च निकाल शहीद राहुल रैंसवाल को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस मौके पर कमल किशोर टकवाल, रिटायर्ड सूबेदार नरेश लडवाल, बबलू पाटनी, दीपक बिष्ट, निशांत, दीपांशु आदि मौजूद थे।

मार्मिक: गोदी में उठा मासूम बेटी को शहीद पिता राहुल रैंसवाल के दर्शन कराते फौजी ताऊ राजेश रैंसवाल

मार्मिक: गोदी में उठा मासूम बेटी को शहीद पिता राहुल रैंसवाल के दर्शन कराते फौजी ताऊ राजेश रैंसवाल- फोटो : CHAMPAWAT

शहीद राहुल रैंसवाल। (फाइल फोटो)

शहीद राहुल रैंसवाल। (फाइल फोटो)- फोटो : CHAMPAWAT

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed