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बिजली लाइन दोगुनी, उपभोक्ता तिगुनी लेकिन नहीं बढ़े कर्मी
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चंपावत। जिले के सभी 653 गांवों में बिजली पहुंच चुकी है लेकिन खराबी होने पर दूरदराज के गांवों में बिजली की खामी दूर करना कई बार चुनौती बनता है। इसकी वजह कार्मिकों की लापरवाही नहीं बल्कि लाइनमैन और फील्ड स्टाफ की कमी है। चंपावत में वर्ष 2003 में ऊर्जा निगम का खंड कार्यालय खुलने के बाद से बिजली की लाइनों से लेकर उपभोक्ता तक में दो से तिगुना इजाफा हो चुका है लेकिन निगम के कारगर संचालन के लिए कर्मी नहीं बढ़ सके हैं।
यूपीसीएल के चंपावत खंड में स्थायी और अस्थायी मिलाकर 90 लाइनमैन और तकनीकी कर्मी तैनात हैं। यानी एक लाइनमैन के जिम्मे औसतन 48 किमी लंबी लाइन का जिम्मा है। 11 केवी, 33 केवी, एलटी लाइनों को मिलाकर 1,885 किमी लंबी लाइन 19 साल में बढ़कर 4,282 किमी से अधिक हो चुकी है। उपभोक्ता भी 18,500 से बढ़कर 53,000 पार हो चुके हैं।
तीन से बढ़कर सात उप संस्थान हो गए हैं। यह उप संस्थान टनकपुर, बनबसा, चंपावत, लोहाघाट, खेतीखान, बाराकोट, देवीधुरा में स्थित हैं लेकिन लाइनमैन से लेकर तकनीकी कर्मी सिर्फ 12 हैं। शेष 78 लाइनमैन और तकनीकी कर्मी उपनल, स्वयं सहायता समूह और आउटसोर्स से हैं।
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नए होने की वजह से कुशलता, अनुभव की कमी काम की गति पर असर डाल रही है। ऊर्जा निगम कर्मचारी संगठन नेता सुरेश पनेरु का कहना है कि लाइन और अन्य आधारभूत ढांचे में बढ़ोतरी के बाद अधिकारी-कर्मचारियों के स्वीकृत पद न बढ़ाने का असर निगम और कर्मियों के काम पर अधिक पड़ता है।
अकेले सहायक अभियंता के जिम्मे चार का काम
चंपावत। ऊर्जा निगम के चंपावत खंड में इस वक्त सालाना राजस्व करीब तीस करोड़ रुपये है जबकि चंपावत में खंडीय कार्यालय खुलते समय वर्ष 2003 में यह महज छह करोड़ रुपये था लेकिन राजस्व में बढ़ोतरी के बावजूद एई के चार में से तीन पद खाली हैं। अकेले एई विकास भारती के कंधों पर पूरी जिम्मेदारी है। जेई के 10 में से तीन पद खाली हैं।
चंपावत खंड में लाइनमैनों की कमी से लाइनों के रखरखाव और मरम्मत कार्य प्रभावित हो रहा है। कम कर्मियों के बावजूद व्यवस्था बनाई गई है। निगम के उच्चाधिकारियों को पत्र भेज 15 लाइनमैनों की मांग की गई है। - एसके गुप्ता, ईई, ऊर्जा निगम, चंपावत खंड।
वर्ष 11 केवी लाइन 33 केवी लाइन एलटी लाइन ट्रांसफार्मर सब स्टेशन उपभोक्ता
2003 866 92 927 528 03 18500
2022 1758 141 2383 1575 07 53245
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यूपीसीएल के चंपावत खंड में स्थायी और अस्थायी मिलाकर 90 लाइनमैन और तकनीकी कर्मी तैनात हैं। यानी एक लाइनमैन के जिम्मे औसतन 48 किमी लंबी लाइन का जिम्मा है। 11 केवी, 33 केवी, एलटी लाइनों को मिलाकर 1,885 किमी लंबी लाइन 19 साल में बढ़कर 4,282 किमी से अधिक हो चुकी है। उपभोक्ता भी 18,500 से बढ़कर 53,000 पार हो चुके हैं।
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तीन से बढ़कर सात उप संस्थान हो गए हैं। यह उप संस्थान टनकपुर, बनबसा, चंपावत, लोहाघाट, खेतीखान, बाराकोट, देवीधुरा में स्थित हैं लेकिन लाइनमैन से लेकर तकनीकी कर्मी सिर्फ 12 हैं। शेष 78 लाइनमैन और तकनीकी कर्मी उपनल, स्वयं सहायता समूह और आउटसोर्स से हैं।
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नए होने की वजह से कुशलता, अनुभव की कमी काम की गति पर असर डाल रही है। ऊर्जा निगम कर्मचारी संगठन नेता सुरेश पनेरु का कहना है कि लाइन और अन्य आधारभूत ढांचे में बढ़ोतरी के बाद अधिकारी-कर्मचारियों के स्वीकृत पद न बढ़ाने का असर निगम और कर्मियों के काम पर अधिक पड़ता है।
अकेले सहायक अभियंता के जिम्मे चार का काम
चंपावत। ऊर्जा निगम के चंपावत खंड में इस वक्त सालाना राजस्व करीब तीस करोड़ रुपये है जबकि चंपावत में खंडीय कार्यालय खुलते समय वर्ष 2003 में यह महज छह करोड़ रुपये था लेकिन राजस्व में बढ़ोतरी के बावजूद एई के चार में से तीन पद खाली हैं। अकेले एई विकास भारती के कंधों पर पूरी जिम्मेदारी है। जेई के 10 में से तीन पद खाली हैं।
चंपावत खंड में लाइनमैनों की कमी से लाइनों के रखरखाव और मरम्मत कार्य प्रभावित हो रहा है। कम कर्मियों के बावजूद व्यवस्था बनाई गई है। निगम के उच्चाधिकारियों को पत्र भेज 15 लाइनमैनों की मांग की गई है। - एसके गुप्ता, ईई, ऊर्जा निगम, चंपावत खंड।
वर्ष 11 केवी लाइन 33 केवी लाइन एलटी लाइन ट्रांसफार्मर सब स्टेशन उपभोक्ता
2003 866 92 927 528 03 18500
2022 1758 141 2383 1575 07 53245