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रिसाव विशेषज्ञों ने किया शारदा नहर के साइफन का निरीक्षण
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बनबसा में शारदा नहर के साइफन का निरीक्षण करती एक्सपर्ट टीम। संवाद
- फोटो : TANAKPUR
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बनबसा (चंपावत)। शारदा नहर के साइफन का निरीक्षण करने लखनऊ से पहुंची रिसाव विशेषज्ञ (लीकेज एक्सपर्ट) की टीम ने धनुषपुल स्थित साइफन को देखा। उन्होंने कई जगह रिसाव पाया, जिसके रखरखाव के लिए विशेषज्ञों की टीम यूपी सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारयों को अपनी रिपोर्ट भेजेगी।
यूपी सिंचाई विभाग के बरेली स्थित हेडवर्क्स खंड के अधिशासी अभियंता राजीव कुमार सिंह रविवार शाम लखनऊ से पहुंची रिसाव विशेषज्ञों की टीम के साथ यहां पहुंचे। उन्होंने धनुषपुल स्थित साइफन का निरीक्षण किया। इसमें साइफन में जोड़ों पर कई जगह हल्के रिसाव मिले हैं। फिलहाल रखरखाव के तहत रिसाव को बंद करने का कार्य किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम यूपी सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों को अपनी रिपोर्ट भेजेगी। इसके बाद साइफन के रिसाव को स्थायी रूप से बंद करने का प्रस्ताव बनाया जाएगा।
शारदा नदी में फरवरी में सबसे कम पानी होने से शारदा बैराज, नहर, साइफन आदि के रखरखाव कार्य आसानी से किए जाते हैं। इस मौके पर बनबसा स्थित यूपी सिंचाई विभाग के शारदा हेडवर्क्स के एसडीओ प्रशांत कुमार वर्मा, बैराज के प्रभारी अटेंडेंट जेई संजय सिंह आदि थे। करीब 94 वर्ष पहले यहां धनुषपुल के नीचे साइफन पद्धति से शारदा नहर को हुड्डी नदी के नीचे से निकाला गया है। इस साइफन का रखरखाव हर साल किया जाता है लेकिन विशेषज्ञों की टीम ने करीब डेढ़ दशक बाद साइफन का निरीक्षण किया है।
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यूपी सिंचाई विभाग के बरेली स्थित हेडवर्क्स खंड के अधिशासी अभियंता राजीव कुमार सिंह रविवार शाम लखनऊ से पहुंची रिसाव विशेषज्ञों की टीम के साथ यहां पहुंचे। उन्होंने धनुषपुल स्थित साइफन का निरीक्षण किया। इसमें साइफन में जोड़ों पर कई जगह हल्के रिसाव मिले हैं। फिलहाल रखरखाव के तहत रिसाव को बंद करने का कार्य किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम यूपी सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों को अपनी रिपोर्ट भेजेगी। इसके बाद साइफन के रिसाव को स्थायी रूप से बंद करने का प्रस्ताव बनाया जाएगा।
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शारदा नदी में फरवरी में सबसे कम पानी होने से शारदा बैराज, नहर, साइफन आदि के रखरखाव कार्य आसानी से किए जाते हैं। इस मौके पर बनबसा स्थित यूपी सिंचाई विभाग के शारदा हेडवर्क्स के एसडीओ प्रशांत कुमार वर्मा, बैराज के प्रभारी अटेंडेंट जेई संजय सिंह आदि थे। करीब 94 वर्ष पहले यहां धनुषपुल के नीचे साइफन पद्धति से शारदा नहर को हुड्डी नदी के नीचे से निकाला गया है। इस साइफन का रखरखाव हर साल किया जाता है लेकिन विशेषज्ञों की टीम ने करीब डेढ़ दशक बाद साइफन का निरीक्षण किया है।
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