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वन पंचायतों के खाते में जमा होगी लीसा की रॉयल्टी
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Leesa Royalty For Van Panchayat in Champawat
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चंपावत। वन विभाग की ओर से विभिन्न वन पंचायतों को लीसे की लंबित रॉयल्टी का जल्द भुगतान किया जाएगा। वन विभाग ने संबंधित वन पंचायतों के खातों में लीसा रॉयल्टी का भुगतान डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जिले की दो सौ से अधिक वन पंचायतों को वन विभाग की ओर से वर्ष 2015-16 की लीसे की रॉयल्टी का भुगतान लंबित पड़ा होने से वन पंचायतों को आर्थिक संकटों से जूझना पड़ रहा था। इन्हें जल्द रॉयल्टी का भुगतान कर राहत पहुंचाई जाएगी।
अब वन विभाग ने लीसा मेटों (ठेकेदारों) का वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में पंजीकरण करना अनिवार्य कर दिया है। अब जीएसटी पंजीकरण न होने पर लीसा ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो पाएगा। वन विभाग की तरफ से चीड़ के जंगलों में हर साल लीसा निकासी के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती है।
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देवीधुरा के रेंजर सुनील शर्मा के अनुसार अब हर लीसा मेट को जीएसटी में पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना जीएसटी पंजीकरण के लीसा मेटों को अब भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ढाई लाख रुपये से अधिक के भुगतान वाले सभी ठेकेदारों को अनिवार्य रूप से जीएसटी पंजीकरण कराना होगा।
लीसा स्टॉक रखने पर लगेगा दो हजार रुपये प्रति क्विंटल जुर्माना
चंपावत। वन विभाग की ओर से चीड़ के लीसे का अवैध रूप से भंडारण करने वालों पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जा रही है। लीसे को वन विभाग के डिपो के बजाय लीसे का स्टॉक अन्यत्र करने वाले ठेकेदारों से प्रतिमाह दो हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से जुर्माना वसूला जाएगा। संवाद
तस्करी रोकने के लिए रात्रि गश्त कर रहीं विभागीय टीमें
चंपावत। वन विभाग के चीड़ बाहुल्य भिंगराड़ा, देवीधुरा, काली कुमाऊं और चंपावत आदि रेंजों में लीसा तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए वन विभाग की कई टीमें रात्रि गश्त कर रही हैं। हालांकि विभागीय टीमों को कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिल पाई है, लेकिन वन क्षेत्रों में लीसा तस्करी की घटनाओं में अवश्य कमी आई है।
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जिले की दो सौ से अधिक वन पंचायतों को वन विभाग की ओर से वर्ष 2015-16 की लीसे की रॉयल्टी का भुगतान लंबित पड़ा होने से वन पंचायतों को आर्थिक संकटों से जूझना पड़ रहा था। इन्हें जल्द रॉयल्टी का भुगतान कर राहत पहुंचाई जाएगी।
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अब वन विभाग ने लीसा मेटों (ठेकेदारों) का वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में पंजीकरण करना अनिवार्य कर दिया है। अब जीएसटी पंजीकरण न होने पर लीसा ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो पाएगा। वन विभाग की तरफ से चीड़ के जंगलों में हर साल लीसा निकासी के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती है।
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देवीधुरा के रेंजर सुनील शर्मा के अनुसार अब हर लीसा मेट को जीएसटी में पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना जीएसटी पंजीकरण के लीसा मेटों को अब भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ढाई लाख रुपये से अधिक के भुगतान वाले सभी ठेकेदारों को अनिवार्य रूप से जीएसटी पंजीकरण कराना होगा।
लीसा स्टॉक रखने पर लगेगा दो हजार रुपये प्रति क्विंटल जुर्माना
चंपावत। वन विभाग की ओर से चीड़ के लीसे का अवैध रूप से भंडारण करने वालों पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जा रही है। लीसे को वन विभाग के डिपो के बजाय लीसे का स्टॉक अन्यत्र करने वाले ठेकेदारों से प्रतिमाह दो हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से जुर्माना वसूला जाएगा। संवाद
तस्करी रोकने के लिए रात्रि गश्त कर रहीं विभागीय टीमें
चंपावत। वन विभाग के चीड़ बाहुल्य भिंगराड़ा, देवीधुरा, काली कुमाऊं और चंपावत आदि रेंजों में लीसा तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए वन विभाग की कई टीमें रात्रि गश्त कर रही हैं। हालांकि विभागीय टीमों को कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिल पाई है, लेकिन वन क्षेत्रों में लीसा तस्करी की घटनाओं में अवश्य कमी आई है।