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मजदूरों पर भारी पड़ रही है पानी की कमी

Sun, 14 May 2017 10:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत Updated Sun, 14 May 2017 10:44 PM IST
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Lack of water is falling on the workers
पेयजल संकट से अधर में लटका निर्माण कार्य - फोटो : अमर उजाला
 लमाई के सुधीर पांडेय का मकान बन रहा है, लेकिन बीते एक पखवाड़े से निर्माण बंद है। इसकी वजह कुछ और नहीं, पानी की किल्लत है। उनके जैसे 55 से अधिक लोग हैं, जहां निर्माण कार्य पर ब्रेक लग गया है। जिले के पहाड़ी हिस्से में 70 से अधिक मकान बन रहे हैं। लेकिन इस समय पानी की कमी से ज्यादातर मकानों का काम लटक गया है। पानी की ये कमी निर्माण के साथ मजदूरों के काम पर भी भारी पड़ रही है। 275 से अधिक मजदूरों का काम छूट गया है। कुछ मजदूर बोरिया- बिस्तर बांधकर घर जाने को मजबूर हो गए हैं।
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निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को न तो काम से निकाला गया है और नहीं उनकी छंटनी हुई है, मगर फिर भी वे काम को तरस गए हैं। 
मई की शुरुआत के साथ चंपावत, लोहाघाट, बाराकोट, पाटी क्षेत्र के अधिकांश निर्माण कार्य बंद हो गए हैं। पानी की कमी निर्माण कार्यों  को प्रभावित कर रही है। निजी भवन निर्माण कार्य तो तकरीबन बंद कर दिया गया है। वहीं सरकारी निर्माण कार्य की गति भी इससे प्रभावित हो रही है। सीएनडीएस के अभियंता बीसी जोशी का कहना है कि नर्सिंग कॉलेज भवन सहित कई निर्माण के लिए बोरिंग करने के बावजूद आवश्यकता के हिसाब से पानी नहीं मिल रहा है। जिस कारण काम में लगने वाला समय बढ़ रहा है।
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मजदूर भोला, होरी प्रसाद, पीतांबर लाल, वासुनाथ सहित कई मजदूरों का कहना है कि इसके चलते मजदूरों की घर-गृहस्थी चल पाना कठिन हो गया है। बिहार के मोतिहारी, छपरा, दरभंगा, उप्र के बुंदेलखंड आदि इलाकों के काफी मजदूर अपने घर लौट गए हैं। बताया गया कि जिले में काम करने वाले 1400 से ज्यादा मजदूरों में से 60 प्रतिशत को भी काम नहीं मिल पा रहा है। काम से पैदल होने की वजह से मजदूर धीरे-धीरे यहां से अपने घरों को या जहां काम मिलने की संभावना है वहा जा रहे हैं। बारिश शुरू होने के बाद ही वापस आएंगे।
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हार्डवेयर से लेकर सीमेंट-सरिया की बिक्री भी गिरी
निर्माण कार्य बंद होने से मजदूरों को बेरोजगारी का झटका लगा है। वहीं बाजार पर भी इसका असर पड़ा है। भवन निर्माण सामग्री से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि सीमेंट, सरिया, रेत-बजरी सहित तमाम भवन निर्माण सामग्री की बिक्री में 40 प्रतिशत तक कमी आ गई है।


कोट ....................
स्रोतों के जल स्तर में भारी कमी आ गई है। इसके चलते चंपावत क्षेत्र की ही हर रोज 11 लाख लीटर रोजाना की मांग के सापेक्ष करीब 25 प्रतिशत पानी ही मिल पा रहा है। वहीं कुएं व हैंडपंपों से मिलने वाला पानी भी कम हो गया है।
एसएस थापा कनिष्ठ अभियंता, जल संस्थान, चंपावत।
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