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रैनबसेरा पहुंचने के 3 दिन बाद हुआ मजदूरों का परीक्षण
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अमर उजाला ब्यूरो
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चंपावत। उप्र के बहराइच के 17 मजदूरों को चंपावत के रेनबसेरा के भूतल में 31 मार्च से रोका गया है, लेकिन यहां आने के बाद उनका पहला स्वास्थ्य परीक्षण तीन दिन बाद 3 अप्रैल को हुआ।
डॉ. मनीष बिष्ट ने इन मजदूरों का परीक्षण किया और सभी का तापमान सामान्य पाया गया। धारचूला में निर्माण कार्य से जुड़े बहराइच के ये मजदूर धारचूला से तीन दिन पैदल चलकर चंपावत पहुंचे हैं। बहराइच जिले के मजदूर राकेश, रामकिशन, रामचंद्र, जगसेन, नूरहसन, श्रीधर, बुद्धिराम, जसवीर, ज्ञान, कैलाश, राम खिलावन, अमृतलाल, रामस्वरूप, राम स्वरूप, राजू, शंभू और मिथिलेश होली के बाद 18 मार्च को काम की तलाश में धारचूला पहुंचे। लेकिन कोरोना वायरस के चलते 22 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन से उनका काम छीन गया। इन मजदूरों का कहना है कि जेब में पैसा न होने से पैदल अपने गांव जाने के इरादे से वे 28 मार्च से धारचूला से निकल पड़े। रास्ते में बलुवाकोट, जौलजीबी की पुलिस चौकी ने मामूली पूछताछ कर आगे बढऩे की इजाजत दे दी। 29 की रात पिथौरागढ़ पहुंचने पर रात को पुलिस ने भोजन की व्यवस्था की। यहां से उन्होंने 30 मार्च की रात घाट के नजदीक बीताई। और 31 मार्च शाम को चंपावत पहुंचने पर रैनबसेरे में व्यवस्था हुई। मजदूरों का कहना है कि यहां प्रशासन की ओर से सुबह व शाम को भोजन तो मिल रहा है, लेकिन न चाय मिल रही और नहीं नाश्ता। जबकि चाय पीने से उन्हें ऊर्जा मिलती है। इधर सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि रैनबसेरे के मजदूरों के स्वास्थ्य परीक्षण तीन दिन बाद क्यों हुआ, इसका पता लगाएंगे। साथ ही आगे से इसका ख्याल रखा जाएगा।
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