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बुझ गया परिवार का इकलौता चिराग 

Thu, 08 Feb 2018 10:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूूूूराे लोहाघाट (चंपावत)।
अमर उजाला ब्यूूूूराे लोहाघाट (चंपावत)। Updated Thu, 08 Feb 2018 10:58 PM IST
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La única lámpara de la familia extinguida
पियूष और सास गंगा देवी की दर्दनाक मौत के बाद बदहवास पड़े उनके परिजन - फोटो : अमर उजाला

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लोहाघाट (चंपावत)। बुधवार को चंपावत-टनकपुर राष्ट्रीय राजमार्ग में हुई जीप हादसे में जान गंवा चुके लोहाघाट विकासखंड के बिंडा तिवारी और बगोटी के चारों लोगों का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। दुर्घटना के बाद से मृतकों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। एकाएक हुए हादसे के बाद से परिजन गहरे सदमे में हैं। बगौटी, जमरसों, सल्टा, मंजपीपल, मडलक आदि गांवों में शोक छाया रहा।

लोहाघाट के बगोटी गांव के नौजवान गौरव पांडेय की सड़क हादसे में मौत होने के बाद परिवार पूरी तरह बिखर गया है। गौरव परिवार का इकलौता चिराग था, जो सड़क दुर्घटना में बुझ गया है। गौरव के कंधों में बूढ़ी दादी और मां की जिम्मेदारी थी। जवान बेटे की लाश देखकर 85 वर्षीय दादी बेनी देवी और मां ईश्वरी देवी अपनी सुधबुध खोई हुई हैं। बेटे की मौत के बाद उनके जीवन में अंधकार छा गया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि गौरव के सिर से पिता का साया भी महज छह साल में उठ गया था। तबसे मां और दादी ने जैसे-तैसे उसका पालन पोषण किया गया। गौरव कुछ वर्ष पूर्व ही दिल्ली में निजी क्षेत्र में काम में लगा था। 28 जनवरी को गांव में ही गिरने से दादी का हाथ की हड्डी टूट गई थी। उपचार कराने के लिए वह हल्द्वानी अपनी बेटी के घर गई थी। जहां उनके हाथ का ऑपरेशन होना था, मगर पोते की मौत की खबर मिलते ही दादी गांव पहुंची और अब उनका रो-रोकर बुरा हाल है।
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साड़ी की दुकान में काम करता था किशोर
लोहाघाट (चंपावत)। दुर्घटना में बगोटी गांव के किशोर पांडेय (29) की मौत के बाद परिवार में मातम छाया हुआ है। किशोर की चार साल की बेटी और दो साल का बेटा अपने पिता के आने की राह देख रहे थे। इन मासूमों को यह भी नहीं मालूम कि उनके पिता अब इस दुनियां में नहीं रहे। 

किशोर दिल्ली में एक साड़ी की दुकान में काम कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। कुछ समय पूर्व ही वे बच्चों को दिल्ली ले गए थे। जबकि किशोर के पिता जगदीश चंद्र पांडेय और मां लक्ष्मी देवी बगोटी गांव में ही खेती किसानी करते हैं। जवान बेटे की मौत के बाद माता-पिता पूरी तरह से टूट चुके हैं। वहीं मृतक की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। किशोर पांडेय की चिता को मुखाग्नि उनके पिता जगदीश पांडेय और गौरव पांडेय की चिता को उनके ताऊ धर्मानंद पांडेय ने मुख्याग्नि दी।


एक ही चिता में किया दादी-पोते का अंतिम संस्कार
लोहाघाट (चंपावत)। स्वांला हादसे में हताहत हुए बिंडा तिवारी (दिगालीचौड़) निवासी दादी और पोती का एक ही चिता में अंतिम संस्कार किया गया। इसको देखकर लोगों की आंखें छलछला आई। अपने मासूम बेटे पीयूूष (10) और सास गंगा देवी (55) के शवों को देखकर पीयूष की मां चांदनी देवी बदहवाश है। पीयूष मां चांदनी देवी का इकलौता लाडला था। पीयूष की दोनों बहनें खुशी और अंकिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना की सूचना मिलते ही मृतका गंगा के पुत्र और पीयूष के पिता राकेश राम बृहस्पतिवार सुबह दिल्ली से घर पहुंचे। गंगा का दूसरा बेटा किशोर मध्य प्रदेश से गांव को रवाना हुआ है। मृतका गंगा देवी के पति मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत थे। उनकी मौत के बाद गंगा को वहीं से पेंशन मिलती थी। पेंशन के सहारे ही घर का खर्चा चलता था।

गंगा अक्सर छह महीने में मध्य प्रदेश जाकर पेंशन लाती थी। जिससे परिवार की गुजर बसर होती थी। राकेश दिल्ली में छोटी-मोटी नौकरी करता था। पंचेश्वर घाट में राकेश ने पुत्र और मां की चिता को मुखाग्नि दी। आर्थिक रूप से कमजोर यह परिवार टिनशेड के मकान में रहकर जीवनयापन करता है। 

 
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