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पूर्व अध्यक्ष होने पर जीत गए खुशाल
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खुशाल सिंह अधिकारी, नव निर्वाचित विधायक कांग्रेस
- फोटो : LOHAGHAT
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चंपावत। चंपावत जिले से कभी भी जिला पंचायत अध्यक्ष विधानसभा का चुनाव नहीं जीत सके। ये मिथक बरकरार रहा। चंपावत जिले से तीन अध्यक्ष चुनाव मैदान में उतरे लेकिन जीत एक को भी नहीं मिल सकी लेकिन इस बार के चुनाव में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में पहली बार चुनाव जीतने में कांग्रेस प्रत्याशी खुशाल सिंह अधिकारी सफल रहे।
दो विधानसभा सीट वाले चंपावत जिले में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद हुए तक पांच चुनावों में तीन जिपं अध्यक्ष चुनाव मैदान में उतरे लेकिन यहां से विधानसभा पहुंचने का सपना एक का भी पूरा नहीं हो सका। चंपावत सीट से निर्दलीय के तौर पर वर्ष 2002 में तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष मदन सिंह महराना उतरे लेकिन वे कांग्रेस उम्मीदवार हेमेश खर्कवाल से महज 395 वोटों से हारे।
वर्ष 2007 में लोहाघाट सीट से तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष एलएम पांडेय मैदान में उतरे, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र सिंह माहरा से हार गए। वर्ष 2017 के चुनाव में लोहाघाट सीट से तत्कालीन जिपं अध्यक्ष खुशाल कांग्रेस के उम्मीदवार थे। तब कांटे के मुकाबले में वे 834 वोटों से हार गए थे।
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वर्ष 2019 में उनका अध्यक्ष पद का कार्यकाल पूरा हुआ। इस बार के विधानसभा चुनाव में वे जीतने में सफल रहे। अधिकारी ने भाजपा प्रत्याशी पूरन सिंह फर्त्याल को 6038 वोटों से हराया।
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दो विधानसभा सीट वाले चंपावत जिले में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद हुए तक पांच चुनावों में तीन जिपं अध्यक्ष चुनाव मैदान में उतरे लेकिन यहां से विधानसभा पहुंचने का सपना एक का भी पूरा नहीं हो सका। चंपावत सीट से निर्दलीय के तौर पर वर्ष 2002 में तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष मदन सिंह महराना उतरे लेकिन वे कांग्रेस उम्मीदवार हेमेश खर्कवाल से महज 395 वोटों से हारे।
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वर्ष 2007 में लोहाघाट सीट से तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष एलएम पांडेय मैदान में उतरे, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र सिंह माहरा से हार गए। वर्ष 2017 के चुनाव में लोहाघाट सीट से तत्कालीन जिपं अध्यक्ष खुशाल कांग्रेस के उम्मीदवार थे। तब कांटे के मुकाबले में वे 834 वोटों से हार गए थे।
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वर्ष 2019 में उनका अध्यक्ष पद का कार्यकाल पूरा हुआ। इस बार के विधानसभा चुनाव में वे जीतने में सफल रहे। अधिकारी ने भाजपा प्रत्याशी पूरन सिंह फर्त्याल को 6038 वोटों से हराया।