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ओलावृष्टि से इस बार प्रभावित रहेगा काफल का उत्पादन
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंपावत
Updated Tue, 02 May 2017 10:58 PM IST
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चंपावत में काफल खरीदते लोग।
- फोटो : amar ujala
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गर्मी शुरू होने के साथ ही बाजार में काफल की आमद शुरू हो गई है। हालांकि पर्याप्त बरसात न होने तथा ओलावृष्टि के कारण काफल का उत्पादन गत वर्ष की तुलना में कम है, लेकिन शुरुआती दौर में बाजार में काफल की बिक्री 120 रुपये प्रति किलोग्राम के साथ होने लगी है। काफल का फल पेट संबंधी कई बीमारियों में रामबाण औषधि का काम करता है।
पीजी कॉलेज के वनस्पति विभाग के प्रभारी डॉ. बीपी ओली के अनुसार काफल का वानस्पतिक नाम माइरिका इंडिका है। यह समुद्र तल से 1500 मीटर की ऊंचाई वाले स्थानों पर बांज, बुरांश के संयुक्त वनों के साथ पाया जाता है। काफल में एंटी ऑक्सीडेंट के अलावा विटामिन ई भी होता है, जो पेट संबंधी रोगों के लिए लाभदायक होता है। यही नहीं काफल के पेड़ की छाल दवाएं बनाने में काम आती है।
काफल का व्यवसाय करने वाले दुकानदार जगदीश नाथ, अमरनाथ प्रहरी, नीलाधर जोशी आदि का कहना है कि इस बार काफल का उत्पादन काफी कम हुआ है। इसलिए इस बार काफल अन्य वर्षों की तुलना में महंगा बिकेगा। वर्तमान में जिला मुख्यालय में दियूरी क्षेत्र से काफल आने लगा है, जबकि ऊंचाई वाले स्थानों में अभी तापमान नहीं गिरने से काफल का फल नहीं पक पाया है।
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चंपावत जिले में ललुवापानी, हिंग्लादेवी, पल्सों, किसकोट, मौराड़ी, धौन, बनलेख, पुनाबे, ढकना, सैदोला, रोपा, फुलारागांव, नरियालगांव, बाजरीकोट, क्रांतेश्वर, मंच, दुबडजैनल, लोहाघाट, बाराकोट, खेतीखान, चौकी, सिंलिंगटाक, मुडियानी, मल्लाड़ेश्वर, चौड़ा राजपुरा, चौमेल, गंगनौला, पुलहिंडोला क्षेत्र के जंगलों में काफल का बहुतायत उत्पादन होता है, जो स्थानीय स्तर पर मौसमी रोजगार का जरिया भी बनता है। बड़ी संख्या में महिलाएं काफल की बिक्री कर आमदनी करती हैं।
पर्यटकों को लुभा रहा है काफल
जिला मुख्यालय में काफल यहां आने वाले पर्यटकों को लुभा रहा है। मीठे रीठे के चमत्कार के लिए प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्री रीठासाहिब में देश-विदेश से आने वाले पर्यटक चंपावत में रुक कर काफल का आनंद उठा रहे हैं। इसके अलावा नेशनल हाइवे से गुजरने वाले वाहनों के यात्री भी काफल का स्वाद लेना नहीं भूल रहे हैं।
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पीजी कॉलेज के वनस्पति विभाग के प्रभारी डॉ. बीपी ओली के अनुसार काफल का वानस्पतिक नाम माइरिका इंडिका है। यह समुद्र तल से 1500 मीटर की ऊंचाई वाले स्थानों पर बांज, बुरांश के संयुक्त वनों के साथ पाया जाता है। काफल में एंटी ऑक्सीडेंट के अलावा विटामिन ई भी होता है, जो पेट संबंधी रोगों के लिए लाभदायक होता है। यही नहीं काफल के पेड़ की छाल दवाएं बनाने में काम आती है।
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काफल का व्यवसाय करने वाले दुकानदार जगदीश नाथ, अमरनाथ प्रहरी, नीलाधर जोशी आदि का कहना है कि इस बार काफल का उत्पादन काफी कम हुआ है। इसलिए इस बार काफल अन्य वर्षों की तुलना में महंगा बिकेगा। वर्तमान में जिला मुख्यालय में दियूरी क्षेत्र से काफल आने लगा है, जबकि ऊंचाई वाले स्थानों में अभी तापमान नहीं गिरने से काफल का फल नहीं पक पाया है।
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चंपावत जिले में ललुवापानी, हिंग्लादेवी, पल्सों, किसकोट, मौराड़ी, धौन, बनलेख, पुनाबे, ढकना, सैदोला, रोपा, फुलारागांव, नरियालगांव, बाजरीकोट, क्रांतेश्वर, मंच, दुबडजैनल, लोहाघाट, बाराकोट, खेतीखान, चौकी, सिंलिंगटाक, मुडियानी, मल्लाड़ेश्वर, चौड़ा राजपुरा, चौमेल, गंगनौला, पुलहिंडोला क्षेत्र के जंगलों में काफल का बहुतायत उत्पादन होता है, जो स्थानीय स्तर पर मौसमी रोजगार का जरिया भी बनता है। बड़ी संख्या में महिलाएं काफल की बिक्री कर आमदनी करती हैं।
पर्यटकों को लुभा रहा है काफल
जिला मुख्यालय में काफल यहां आने वाले पर्यटकों को लुभा रहा है। मीठे रीठे के चमत्कार के लिए प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्री रीठासाहिब में देश-विदेश से आने वाले पर्यटक चंपावत में रुक कर काफल का आनंद उठा रहे हैं। इसके अलावा नेशनल हाइवे से गुजरने वाले वाहनों के यात्री भी काफल का स्वाद लेना नहीं भूल रहे हैं।