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किरोड़ा से कटाव की रोकथाम का कार्य शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला, टनकपुर (चंपावत)
Updated Fri, 19 Aug 2016 11:00 PM IST
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जेसीबी से बदला नाले का रुख
- फोटो : अमर उजाला
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टनकपुर (चंपावत)। किरोड़ा नाले पर पुल अथवा ब्रिज का निर्माण एवं कटाव की रोकथाम को लेकर शनिवार को धरना-प्रदर्शन की चेतावनी के बीच कटाव की रोकथाम का कार्य शुरू हो गया है। वन विभाग से अनुमति मिलने पर थ्वालखेड़ा ग्राम पंचायत ने रीवर बेड मेटीरियल डंप कर नाले को चैनलाइज करने का काम शुरू कर दिया है। इसके साथ ही पांच लाख के बजट से ग्राम पंचायत सीसी ब्लॉकों का निर्माण भी शुरू करेगी।
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नायकगोठ-थ्वालखेड़ा के बीच किरोड़ा नाले पर पुल अथवा ब्रिज का निर्माण, शारदा एवं किरोड़ा से हो रहे कटाव की रोकथाम समेत पांच सूत्री मांगों को लेकर पूर्णागिरि मार्ग के गांवों के लोगों ने शनिवार यानि 20 अगस्त को धरना-प्रदर्शन का एलान कर रखा है। आंदोलन की चेतावनी के बीच वन विभाग से अनुुमति मिलने के बाद थ्वालखेड़ा ग्राम पंचायत ने शुक्रवार से कटाव की रोकथाम का कार्य शुरू कर दिया है।
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किरोड़ा से कटाव रोकने को गत वर्ष वन विभाग ने नाले के तट पर रीवर बेड मेटीरियल डंप कर चैनलाइज किया था, लेकिन इस बार नाले के उफान से डंप रीवर बेड मेटीरियल कई स्थानों पर बह गया है। प्रधान सतीश पांडेय ने बताया कि वन विभाग से अनुमति मिलने के बाद जेसीबी लगाकर नाले को चैनलाइज करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। नाले को चैनलाइज करने के अलावा कटाव की रोकथाम के लिए सीसी ब्लॉक निर्माण के लिए बीएडीपी मद से चार लाख का बजट मंजूर हुआ है तथा मनरेगा के एक लाख के बजट से सीसी ब्लॉकों का निर्माण भी जल्द शुरू किया जाएगा।
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वहीं देश को प्रतिवर्ष 451 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन कर देने वाले एनएचपीसी के टनकपुर पावर स्टेशन के प्रबंधन पर पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष बहादुर सिंह पाटनी ने कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने देश के छह करोड़ रुपये पानी में बहाए जाने का हवाला देते हुए एक ज्ञापन एनएचपीसी के सीएमडी को भेजा है। उन्होंने मामले की सीबीआई जांच कराने और मामले को राज्य हाईकोर्ट तक पहुंचाने की भी चेतावनी दी है।
पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष द्वारा एनएचपीसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक को भेजे ज्ञापन में उन्होंने लिखा है कि टनकपुर पावर स्टेशन के टनकपुर बैराज के गेट संख्या 15 से 18 और 1 से 5 में कराए गए रिपेयर कार्य उखड़कर पानी में बह गए हैं। जबकि इस वर्ष अभी शारदा नदी में ढाई लाख क्यूसेक से अधिक पानी नही प्रवाहित हुआ है।
पाटनी ने ज्ञापन में लिखा है कि वर्ष 2006 में गेट संख्या 4 से 5 तक कराया गया रिपेयरिंग कार्य शारदा नदी में वर्ष 2013 में साढ़े पांच लाख क्यूसेक पानी आने के बाद भी ज्यों का त्यों है। उन्होंने लिखा है कि एनएचपीसी के मुख्य अभियंता पीके गुप्ता ने अपने चहेतों बाहरी ठेकेदारों को कार्य देने को नियमों में फेरबदल की।
ठकेदारों ने अनुभवहीन पेटी कांट्रैक्टरों से कार्य कराया। उन्होंने अनुभवहीन पेटी कांट्रैक्टर द्वारा बैराज रिपेयरिंग कार्य में घटिया निर्माण सामग्री और मानकों के तहत कम गेज् के स्टील राड लगाए जाने का भी आरोप लगाया है। यही नहीं बैराज कार्य देखने वाले योग्य और कर्मठ अधिकारी को दर किनार कर अपने चहेते प्रबंधक को कार्य का सुपरविजन सौंपा गया।
एनएचपीसी के मानकों के तहत ठेकेदार द्वारा की गई अनियमितता पर 5 प्रतिशत सिक्यूरिटी जब्त की जाती है और डिफेक्ट लाइबलेटि पीरियड के नियम के तहत निर्माण कार्य दुबारा कराया जाता है। किंतु यहां ऐसा नहीं कराया गया। उन्होंने एनचपीसी के सीएमडी से उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
कहा कि वे अपने स्तर से राष्ट्रीय संपत्ति को खुर्द बुर्द करने के आरोप में मुख्यअभियंता समेत सभी जिम्मेदारों पर राज्य उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने की बात भी कही है। इस संबध में पूछने को जब मुख्यअभियंता को फोन मिलाया गया तो उन्होंने बात करने से मना कर दिया। उधर टनकपुर बैराज प्रबंधक ने इस संबंध कुछ भी बताने से इंकार कर एक महिला प्रबंधक से पूछने की सलाह दे दी।