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चैतोला में जत्थों ने मंदिर की परिक्रमा की
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
Updated Wed, 05 Apr 2017 10:21 PM IST
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चैतोला में जत्थों ने मंदिर की परिक्रमा की
- फोटो : अमर उजाला
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गुमदेश के चैतोला मेले में चौखाम बाबा मंदिर में दिनभर चहल-पहल रही। दोपहर बाद जत्थों के मंदिर में आना शुरू हुआ। रिमझिम बारिश के बीच आठ गांवों के जत्थे बारी-बारी से मंदिर की परिक्रमा की। जत्थों के मंदिर में प्रवेश करने के लिए समय निर्धारित रहता है। हर जत्था मंदिर की 20 मिनट तक परिक्रमा करने के बाद विसर्जित हो जाता है।
सबसे पहले मड़ गांव का जत्था सेरीगड़ के रास्ते से होते हुए 2.31 बजे मंदिर में पहुंचा। मंदिर की परिक्रमा करने के बाद 2.50 बजे विसर्जित हो गया। इसके बाद जिंडी और शिलिंग का संयुक्त जत्थे ने दक्षिणी और उत्तरी दिशा से 2.51 बजे मंदिर में प्रवेश किया। 3.11 बजे उत्तरी दिशा से चौपता का जत्था पहुंचा, जबकि 3.31 बजे नेवलटुकरा, 3.51 बजे सिरकोट, 4.11 बजे दक्षिणी दिशा से जाख तथा 4.31 बजे बसकुनी और नेवलटुकरा के संयुक्त जत्थे में प्रवेश किया। जत्थों के बारी-बारी में मंदिर में प्रवेश करने पर पूरा मंदिर प्रांगण भक्तगणों से भर गया।
महिलाएं जत्थों के पीछे चमू देवता की गौरव गाथाओं का बखान करते हुए चल रही थीं। हाथों में लाठी-डंडे, सिर में पगड़ी बांधे युद्ध की पोशाक से सजे-धजे लोग चमू देवता की जै-जैकार कर रहे थे। जत्थों के विसर्जन के बाद जमानी (चमू देवता का डोला) को मड़ गांव ले जाया गया।
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जमान को यहां मंदिर में रखने के बाद चौखाम बाबा के पुजारी ने उसे गंगा जल, घृत व दूध और गोमूत्र से इसकी शुद्धि की गई। जमान के चारों खंभों में दीप जलाकर अक्षत-पुष्पों से रातभर ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना की। बुधवार को मेला समिति के अध्यक्ष कुंवर सिंह प्रथोली के नेतृत्व में देव सिंह, खीमराज, चंद्री चंद, लाल सिंह, दिवान सिंह, जोगा सिंह धौनी, पंडित शंकर दत्त पांडेय, मदन कलौनी व्यवस्थाओं में जुटे रहे। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस का पुख्ता बंदोबस्त किया गया है।
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सबसे पहले मड़ गांव का जत्था सेरीगड़ के रास्ते से होते हुए 2.31 बजे मंदिर में पहुंचा। मंदिर की परिक्रमा करने के बाद 2.50 बजे विसर्जित हो गया। इसके बाद जिंडी और शिलिंग का संयुक्त जत्थे ने दक्षिणी और उत्तरी दिशा से 2.51 बजे मंदिर में प्रवेश किया। 3.11 बजे उत्तरी दिशा से चौपता का जत्था पहुंचा, जबकि 3.31 बजे नेवलटुकरा, 3.51 बजे सिरकोट, 4.11 बजे दक्षिणी दिशा से जाख तथा 4.31 बजे बसकुनी और नेवलटुकरा के संयुक्त जत्थे में प्रवेश किया। जत्थों के बारी-बारी में मंदिर में प्रवेश करने पर पूरा मंदिर प्रांगण भक्तगणों से भर गया।
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महिलाएं जत्थों के पीछे चमू देवता की गौरव गाथाओं का बखान करते हुए चल रही थीं। हाथों में लाठी-डंडे, सिर में पगड़ी बांधे युद्ध की पोशाक से सजे-धजे लोग चमू देवता की जै-जैकार कर रहे थे। जत्थों के विसर्जन के बाद जमानी (चमू देवता का डोला) को मड़ गांव ले जाया गया।
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जमान को यहां मंदिर में रखने के बाद चौखाम बाबा के पुजारी ने उसे गंगा जल, घृत व दूध और गोमूत्र से इसकी शुद्धि की गई। जमान के चारों खंभों में दीप जलाकर अक्षत-पुष्पों से रातभर ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना की। बुधवार को मेला समिति के अध्यक्ष कुंवर सिंह प्रथोली के नेतृत्व में देव सिंह, खीमराज, चंद्री चंद, लाल सिंह, दिवान सिंह, जोगा सिंह धौनी, पंडित शंकर दत्त पांडेय, मदन कलौनी व्यवस्थाओं में जुटे रहे। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस का पुख्ता बंदोबस्त किया गया है।