{"_id":"60539cb08ebc3e8ca31ac38e","slug":"janvani-will-be-formed-from-kharkarki-village-champawat-news-hld418698064","type":"story","status":"publish","title_hn":"खर्ककार्की गांव से देववाणी बनेगी जनवाणी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खर्ककार्की गांव से देववाणी बनेगी जनवाणी
विज्ञापन
चंपावत के खर्ककार्की गांव में ग्रामीणों से वार्ता करते संस्कृत अकादमी के एडी डॉ. पदमाकर मिश्र।
- फोटो : CHAMPAWAT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंपावत। प्रदेश की दूसरी राजभाषा संस्कृत को जल्द ही चंपावत जिले के खर्ककार्की गांव के हर वर्ग के आम लोग वार्तालाप की भाषा के रूप में बोलेंगे। इसे लेकर बृहस्पतिवार को संस्कृति अकादमी के मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक डॉ. पदमाकर मिश्र ने ग्रामीणों से मंत्रणा की। तय किया गया कि जल्द ही खर्ककार्की में संस्कृत पढ़ाने को शिक्षक को भेजा जाएगा। ग्राम पंचायत भवन में गांव के लिए संस्कृत विषय को पढ़ाया जाएगा।
प्रदेश के 13 अन्य गांवों के साथ इस गांव को भी संस्कृत गांव के रूप में विकसित करने का उत्तराखंड संस्कृत अकादमी पहले ही निर्णय ले चुका है। इसी क्रम में अब खर्ककार्की में संस्कृत भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए बृहस्पतिवार को सर्वे किया गया। संस्कृत के विद्वान और राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. कीर्तिबल्लभ सक्टा ने बताया कि इसके जरिये ग्रामीणों को संस्कृत भाषा सीखाने के साथ संस्कृत को वार्तालाप की भाषा बना लोकप्रिय किया जाएगा। गांव के लोगों को संस्कृत भाषा को लिखने, बोलने और व्यवहार में उपयोग में लाने लायक बनाने के लिए एक शिक्षक तैनात किया जाएगा। बैठक में रमेश चंद्र पांडेय, मोहन चंद्र पांडेय, ग्राम प्रधान विपिन नाथ, हरीश चंद्र पांडेय, पंडित बसंत पांडेय, उमापति जोशी, नरेंद्र पांडेय, लक्ष्मी कार्की, कलावती आदि मौजूद थे।
उत्तराखंड के जिलों के चयनित संस्कृत गांव:
चंपावत - खर्ककार्की, पिथौरागढ़ -उर्ग, अल्मोड़ा - जागेश्वर, ऊधमसिंह नगर - गूलरभोज, नैनीताल-पतलोट, देहरादून - मालदेवता, पौड़ी - फलस्वाड़ी, टिहरी - सांवली, रुद्रप्रयाग -डांगी बांगर, चमोली -रतूड़ा, उत्तरकाशी -मुखवा, हरिद्वार -मुंडयाकी गांव, बागेश्वर जिले में अभी गांव का नाम तय नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदेश के 13 अन्य गांवों के साथ इस गांव को भी संस्कृत गांव के रूप में विकसित करने का उत्तराखंड संस्कृत अकादमी पहले ही निर्णय ले चुका है। इसी क्रम में अब खर्ककार्की में संस्कृत भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए बृहस्पतिवार को सर्वे किया गया। संस्कृत के विद्वान और राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. कीर्तिबल्लभ सक्टा ने बताया कि इसके जरिये ग्रामीणों को संस्कृत भाषा सीखाने के साथ संस्कृत को वार्तालाप की भाषा बना लोकप्रिय किया जाएगा। गांव के लोगों को संस्कृत भाषा को लिखने, बोलने और व्यवहार में उपयोग में लाने लायक बनाने के लिए एक शिक्षक तैनात किया जाएगा। बैठक में रमेश चंद्र पांडेय, मोहन चंद्र पांडेय, ग्राम प्रधान विपिन नाथ, हरीश चंद्र पांडेय, पंडित बसंत पांडेय, उमापति जोशी, नरेंद्र पांडेय, लक्ष्मी कार्की, कलावती आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
उत्तराखंड के जिलों के चयनित संस्कृत गांव:
चंपावत - खर्ककार्की, पिथौरागढ़ -उर्ग, अल्मोड़ा - जागेश्वर, ऊधमसिंह नगर - गूलरभोज, नैनीताल-पतलोट, देहरादून - मालदेवता, पौड़ी - फलस्वाड़ी, टिहरी - सांवली, रुद्रप्रयाग -डांगी बांगर, चमोली -रतूड़ा, उत्तरकाशी -मुखवा, हरिद्वार -मुंडयाकी गांव, बागेश्वर जिले में अभी गांव का नाम तय नहीं।
विज्ञापन