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आज से नए रंगरूप में नजर आएगी जागोली धर्मशाला
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चंपावत जिले के खेतीखान में स्थित ऐतिहासिक जागोली धर्मशाला। (पहले)
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। जंग-ए-आजादी की गवाह बनी खेतीखान की ऐतिहासिक जागोली धर्मशाला अब शुक्रवार से नए रंग रूप में नजर आएगी। खेतीखान के गोशनी गांव की जागोली धर्मशाला और मंदिर के पुरातन स्वरूप को बचाए रखते हुए जै जागोली बाबा मंदिर समिति ने जन सहयोग से इसका करीब 15 लाख रुपये में नवनिर्माण कराया है।
आजादी के बाद दूसरे प्रधानमंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री 1934 में इस धर्मशाला में एक सप्ताह तक रुके थे। यहां उन्होंने काली कुमाऊं के शेर पंडित हर्षदेव ओली के साथ अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति पर मंत्रणा की थी। खेतीखान के गोशनी में वर्ष 1901 में जागोली में मंदिर और धर्मशाला का निर्माण हुआ था। 120 साल से अधिक की ये दोनों ऐतिहासिक महत्व की धरोहर को बचाने के लिए ग्रामीणों ने वर्ष 2021 में बीड़ा उठाया।
सेनानी हर्षदेव ओली के पौत्र राजेश ओली ने बताया कि सुनारगांव, ओलीगांव, गोशनी और खेतीखान के लोगों के सहयोग से जै जागोली बाबा मंदिर समिति ने तीन माह के भीतर इसका निर्माण कार्य पूरा किया। सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता भास्कर ओली के तकनीकी मार्गदर्शन में इसके मूल स्वरूप को बचाने के लिए खासी कवायद की गई। शुक्रवार को इस धर्मशाला और मंदिर का शुभारंभ होगा।
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स्थानीय लोगों के सहयोग से जागोली धर्मशाला और मंदिर का नव निर्माण पूरा हो चुका है। 29 जुलाई को इसका विधि विधान के साथ श्रीगणेश किया जाएगा। क्षेत्र के लोगों की प्रेरणा यह धर्मशाला आजादी की जंग की गवाह है।
-राजेश ओली, सेनानी पंडित हर्षदेव ओली के पौत्र।
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आजादी के बाद दूसरे प्रधानमंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री 1934 में इस धर्मशाला में एक सप्ताह तक रुके थे। यहां उन्होंने काली कुमाऊं के शेर पंडित हर्षदेव ओली के साथ अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति पर मंत्रणा की थी। खेतीखान के गोशनी में वर्ष 1901 में जागोली में मंदिर और धर्मशाला का निर्माण हुआ था। 120 साल से अधिक की ये दोनों ऐतिहासिक महत्व की धरोहर को बचाने के लिए ग्रामीणों ने वर्ष 2021 में बीड़ा उठाया।
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सेनानी हर्षदेव ओली के पौत्र राजेश ओली ने बताया कि सुनारगांव, ओलीगांव, गोशनी और खेतीखान के लोगों के सहयोग से जै जागोली बाबा मंदिर समिति ने तीन माह के भीतर इसका निर्माण कार्य पूरा किया। सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता भास्कर ओली के तकनीकी मार्गदर्शन में इसके मूल स्वरूप को बचाने के लिए खासी कवायद की गई। शुक्रवार को इस धर्मशाला और मंदिर का शुभारंभ होगा।
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स्थानीय लोगों के सहयोग से जागोली धर्मशाला और मंदिर का नव निर्माण पूरा हो चुका है। 29 जुलाई को इसका विधि विधान के साथ श्रीगणेश किया जाएगा। क्षेत्र के लोगों की प्रेरणा यह धर्मशाला आजादी की जंग की गवाह है।
-राजेश ओली, सेनानी पंडित हर्षदेव ओली के पौत्र।