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गांधी-शास्त्री जयंती पर जागोली में नहीं लगेगा खीर का भोग
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चंपावत जिले के खेतीखान में स्थित ऐतिहासिक जागोली धर्मशाला।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। कोरोना महामारी के कारण जिले के खेतीखान में स्थित ऐतिहासिक जागोली धर्मशाला में इस बार दो अक्तूबर को गांधी और शास्त्री जयंती पर खीर का भोग नहीं लगेगा। आजादी के दौर से आज तक यह पहला मौका है जब ऐतिहासिक जागोली धर्मशाला में गांधी और शास्त्री जयंती पर खीर का भोग नहीं लगेगा।
गौरतलब है कि खेतीखान क्षेत्र के गोसनी में स्थित जागोली धर्मशाला आजादी की लड़ाई की अहमतरीन गवाह रही है। आजादी की लड़ाई के दौरान इस धर्मशाला में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री सहित कई वरिष्ठ क्रांतिकारियों ने पनाह ली थी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और कुमाऊं के लौह पुरुष कहे जाने वाले पंडित हर्षदेव ओली के नेतृत्व में यहां देश की आजादी के लिए कई महत्वपूर्ण मंत्रणाएं हुआ करती थी।
आजादी मिलने के बाद हर साल दो अक्तूबर को जागोली धर्मशाला में देश के नायकों को याद करते हुए खीर का भोग लगाया जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र ओली ने बताया कि आयोजन समिति की ओर से इस बार जागोली धर्मशाला में खीर का भोग न लगाने का निर्णय लिया गया है। अलबत्ता सामाजिक दूरी का पालन करते हुए आजादी के नायकों को याद किया जाएगा।
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गौरतलब है कि खेतीखान क्षेत्र के गोसनी में स्थित जागोली धर्मशाला आजादी की लड़ाई की अहमतरीन गवाह रही है। आजादी की लड़ाई के दौरान इस धर्मशाला में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री सहित कई वरिष्ठ क्रांतिकारियों ने पनाह ली थी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और कुमाऊं के लौह पुरुष कहे जाने वाले पंडित हर्षदेव ओली के नेतृत्व में यहां देश की आजादी के लिए कई महत्वपूर्ण मंत्रणाएं हुआ करती थी।
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आजादी मिलने के बाद हर साल दो अक्तूबर को जागोली धर्मशाला में देश के नायकों को याद करते हुए खीर का भोग लगाया जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र ओली ने बताया कि आयोजन समिति की ओर से इस बार जागोली धर्मशाला में खीर का भोग न लगाने का निर्णय लिया गया है। अलबत्ता सामाजिक दूरी का पालन करते हुए आजादी के नायकों को याद किया जाएगा।
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