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नियमों को ताख पर रख शारदा नदी का रुख मोड़ रहा सिंचाई विभाग

Wed, 30 Jan 2019 11:28 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन चंद्रशेेखर जोशी  चंपावत।
चंद्रशेेखर जोशी  चंपावत। Published by: बृजमोहन बृजमोहन Updated Wed, 30 Jan 2019 11:28 PM IST
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Irrigation department working without following rules
टनकपुर की शारदा नदी पर जेसीबी के सहारे काम करता सिंचाई विभाग। - फोटो : अमर उजाला

टनकपुर की शारदा नदी पर बांध सुरक्षा से संबंधित काम करा रहा सिंचाई विभाग खुद नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। नदी के डायवर्जन के लिए विभाग मैन्युल (मजदूरों के जरिए) काम के स्थान पर जेसीबी मशीन का उपयोग कर रहा है। सिंचाई विभाग ने इसके लिए कोई अनुमति भी नहीं ली है।  

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सिंचाई विभाग लोहाघाट खंड टनकपुर शारदा नदी में बाढ़ नियंत्रण के लिए इन दिनों काम करवा रहा है। अधिशासी अभियंता सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि इसके तहत सात करोड़ रुपये की लागत से नाला निर्माण और घाट बनाए जाने हैं। निर्माण के लिए नदी के पानी के रुख को मोड़ने के लिए डायवर्जन जरूरी है। सिंचाई विभाग डायवर्जन का काम जेसीबी से कर रहा है। ईई रावत का कहना है कि सिंचाई विभाग ने इसके लिए वन विभाग और प्रशासन से अनुमति ली है, हालांकि वन विभाग और इनकार कर  रहा है।
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बता दें कि जेसीबी या किसी अन्य मशीन से नदी का खुदान होने से भूगर्भीय पर्यावरण को भारी खतरा होता है। वन विभाग का कहना है कि नियमों के मुताबिक सिर्फ 75 सेंटीमीटर तक ही खुदान किया जा सकता है। ये खुदान मैन्युल तरीके से किया जा सकता है।  
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जेसीबी से काम बंद नहीं किया तो कार्यवाही : वन क्षेत्राधिकारी  
वन विभाग के शारदा रेंज के वन क्षेत्राधिकारी गोविंद सिंह रजवार का कहना है कि वन महकमे ने जेसीबी के उपयोग की कोई अनुमति नहीं दी है। बल्कि सिंचाई विभाग को ऐसा करने से मना किया है। इसके बावजूद विभाग जेसीबी का उपयोग नहीं रोकेगा, तो उसके खिलाफ कार्यवाही की संस्तुति की जाएगी।  


शारदा नदी पर किसी भी तरह के यांत्रिक उपकरण (जेसीबी, पोकलैंड आदि) की अनुमति जिला प्रशासन ने नहीं दी है। न ही ऐसी इजाजत देने का जिला प्रशासन के पास अधिकार है। ये अनुमति सिर्फ भारत सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय देता है। मामले की पड़ताल की जाएगी।  
रणवीर सिंह चौहान, जिलाधिकारी, चंपावत।

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