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लोकार्पण के छह माह बाद भवन के हस्तांतरण का इंतजार
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अमोड़ी के राजकीय डिग्री कॉलेज का नव निर्मित भवन। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। राजकीय डिग्री कॉलेज अमोड़ी में लोकार्पण के छह माह बाद भी भवन का हस्तांतरण नहीं हो सका है। इस कारण यह कॉलेज अब भी अपने भवन के बजाय जीआईसी के चंद कमरों से ही संचालित हो रहा है।
जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर अमोड़ी में वर्ष 2016 में राजकीय डिग्री कॉलेज शुरू हुआ। डिग्री कॉलेज खुलने से यहां के छात्र-छात्राओं को काफी हद तक जिला मुख्यालय जाने से तो निजात मिली। उसी साल दिसंबर में 493 लाख रुपये की लागत से भवन का निर्माण भी शुरू हो गया। भवन के काम को दो साल में पूरा होना था। देर से ही सही काम पूरा होने के बाद पिछले साल 16 अगस्त को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अमोड़ी पहुंच कॉलेज के भवन का बाकायदा लोकार्पण किया लेकिन अब भी यह भवन विभाग को हस्तांतरित नहीं हुआ है। जीआईसी में ही पढ़ाई होने से न केवल पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि नए विषयों की मंजूरी में भी अड़चन आ रही है।
प्राचार्य की कुर्सी खाली, विषय भी बस सात
चंपावत। भवन ही नहीं अमोड़ी के राजकीय डिग्री कॉलेज में न स्टाफ पूरा है और न ही विषय। यहां बीए में सिर्फ सात विषय हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, अर्थशास्त्र, राजनीतिविज्ञान, इतिहास, शिक्षाशास्त्र की पढ़ाई होती है लेकिन इन विषयों को पढ़ाने के लिए भी पूरे शिक्षक नहीं हैं। अर्थशास्त्र के सहायक प्रोफेसर की कुर्सी खाली है। कुल 212 छात्र-छात्राओं वाला कॉलेज लंबे समय से प्राचार्य विहीन भी है। दो कनिष्ठ लिपिक से लेकर पुस्तकालय लिपिक के पद भी खाली हैं। छात्रों का कहना है कि अपना भवन बनने के बाद भी जगह और स्टाफ की कमी से शिक्षण प्रभावित हो रहा है। छात्रों ने कॉलेज को नए भवन में हस्तांतरित कर सभी खाली पदों को भरने की मांग की है।
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कॉलेज के नए भवन में जल्द ही शिफ्टिंग कर ली जाएगी। नए भवन में बिजली, पेयजल संयोजन, अग्नि सुरक्षा संबंधी काम बाकी है। इन कामों को तुरंत कराने के लिए कार्यदायी संस्था से कहा गया है। मार्च में भवन का विधिवत हस्तांतरण हो जाएगा।
- डॉ. सिद्धेश्वर सिंह, प्रभारी प्राचार्य, डिग्री कॉलेज, अमोड़ी (चंपावत)।
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जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर अमोड़ी में वर्ष 2016 में राजकीय डिग्री कॉलेज शुरू हुआ। डिग्री कॉलेज खुलने से यहां के छात्र-छात्राओं को काफी हद तक जिला मुख्यालय जाने से तो निजात मिली। उसी साल दिसंबर में 493 लाख रुपये की लागत से भवन का निर्माण भी शुरू हो गया। भवन के काम को दो साल में पूरा होना था। देर से ही सही काम पूरा होने के बाद पिछले साल 16 अगस्त को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अमोड़ी पहुंच कॉलेज के भवन का बाकायदा लोकार्पण किया लेकिन अब भी यह भवन विभाग को हस्तांतरित नहीं हुआ है। जीआईसी में ही पढ़ाई होने से न केवल पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि नए विषयों की मंजूरी में भी अड़चन आ रही है।
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प्राचार्य की कुर्सी खाली, विषय भी बस सात
चंपावत। भवन ही नहीं अमोड़ी के राजकीय डिग्री कॉलेज में न स्टाफ पूरा है और न ही विषय। यहां बीए में सिर्फ सात विषय हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, अर्थशास्त्र, राजनीतिविज्ञान, इतिहास, शिक्षाशास्त्र की पढ़ाई होती है लेकिन इन विषयों को पढ़ाने के लिए भी पूरे शिक्षक नहीं हैं। अर्थशास्त्र के सहायक प्रोफेसर की कुर्सी खाली है। कुल 212 छात्र-छात्राओं वाला कॉलेज लंबे समय से प्राचार्य विहीन भी है। दो कनिष्ठ लिपिक से लेकर पुस्तकालय लिपिक के पद भी खाली हैं। छात्रों का कहना है कि अपना भवन बनने के बाद भी जगह और स्टाफ की कमी से शिक्षण प्रभावित हो रहा है। छात्रों ने कॉलेज को नए भवन में हस्तांतरित कर सभी खाली पदों को भरने की मांग की है।
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कॉलेज के नए भवन में जल्द ही शिफ्टिंग कर ली जाएगी। नए भवन में बिजली, पेयजल संयोजन, अग्नि सुरक्षा संबंधी काम बाकी है। इन कामों को तुरंत कराने के लिए कार्यदायी संस्था से कहा गया है। मार्च में भवन का विधिवत हस्तांतरण हो जाएगा।
- डॉ. सिद्धेश्वर सिंह, प्रभारी प्राचार्य, डिग्री कॉलेज, अमोड़ी (चंपावत)।