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डोला रथ यात्रा के सैकड़ों भक्त बने साक्षी
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
Updated Tue, 19 Jul 2016 10:39 PM IST
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डोला रथ यात्रा के सैकड़ों भक्त बने साक्षी
- फोटो : अमर उजाला
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डोला रथ यात्रा के साथ ही पांच दिनी देवीधार महोत्सव संपन्न हो गया। महोत्सव के अंतिम दिन मंगलवार को सुहावने मौसम के बीच रायनगर चौड़ी, कलीगांव और डैंसली गांवों से मां भगवती और मां महाकाली की डोला रथ यात्राएं निकली। यात्राओं के मंदिर की परिक्रमा करने के साथ ही पांच दिनी देवी महोत्सव का समापन हो गया। महिला एवं पुरुषों ने झोड़ों का गायन किया। खुशनुमा मौसम के चलते हजारों श्रद्धालु मां की डोला रथ यात्राओं के साक्षी बन मां का आशीर्वाद प्राप्त किया।
मंगलवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का देवीधार मंदिर की ओर जाने का क्रम शुरू हो गया था। दोपहर बाद खड़ी चढ़ाई पार कर कलीगांव का रथ चार बजे मंदिर में पहुंचा। भगवती के रूप में नारायण सिंह पुजारी और मां महाकाली के रूप में हरली देवी सवार होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दे रही थी।
दूसरा रथ 4.20 मिनट में दो किमी लंबी दुर्गम रास्तों को तय कर रायनगरचौड़ी का रथ मंदिर में पहुंचा। जिसमें ऋषेश्वर बाबा के डांगर शेखरचंद्र राय रथ में सवार होकर आशीर्वाद दे रहे थे। इस बार अशुद्ध गोचर के चलते मां भगवती, मां महाकाली के डांगर अवतरित नहीं हुए। तीसरा और अंतिम रथ 4.25 बजे मिनट पर डैंसली गांव का रथ पहुंचा। जिसमें मां भगवती के रूप में सवार नारायण सिंह बिष्ट, महाकाली के रूप में रतन सिंह ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। जबकि भवगती के डांगर नारायण सिंह देउपा श्रद्धालुओं के कंधों में सवार होकर आशीर्वाद दे रहे थे।
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तीनों ही रथों के पीछे महिलाएं खोल दे माता खोल भवानी धार में केवाड़ा आदि गीतों से मां का गुणगान करती चल रही थी। व्यवस्था बनाए रखने के लिए थानाध्यक्ष मनोज रतूड़ी, एसआई मीनाक्षी नौटियाल दलबल के साथ डटे रहे। देवीधार सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष जीवन मेहता, सचिव प्रकाश राय कोषाध्यक्ष भैरव राय, नरेश राय आदि ने आयोजन में सहयोग किया।
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मंगलवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का देवीधार मंदिर की ओर जाने का क्रम शुरू हो गया था। दोपहर बाद खड़ी चढ़ाई पार कर कलीगांव का रथ चार बजे मंदिर में पहुंचा। भगवती के रूप में नारायण सिंह पुजारी और मां महाकाली के रूप में हरली देवी सवार होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दे रही थी।
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दूसरा रथ 4.20 मिनट में दो किमी लंबी दुर्गम रास्तों को तय कर रायनगरचौड़ी का रथ मंदिर में पहुंचा। जिसमें ऋषेश्वर बाबा के डांगर शेखरचंद्र राय रथ में सवार होकर आशीर्वाद दे रहे थे। इस बार अशुद्ध गोचर के चलते मां भगवती, मां महाकाली के डांगर अवतरित नहीं हुए। तीसरा और अंतिम रथ 4.25 बजे मिनट पर डैंसली गांव का रथ पहुंचा। जिसमें मां भगवती के रूप में सवार नारायण सिंह बिष्ट, महाकाली के रूप में रतन सिंह ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। जबकि भवगती के डांगर नारायण सिंह देउपा श्रद्धालुओं के कंधों में सवार होकर आशीर्वाद दे रहे थे।
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तीनों ही रथों के पीछे महिलाएं खोल दे माता खोल भवानी धार में केवाड़ा आदि गीतों से मां का गुणगान करती चल रही थी। व्यवस्था बनाए रखने के लिए थानाध्यक्ष मनोज रतूड़ी, एसआई मीनाक्षी नौटियाल दलबल के साथ डटे रहे। देवीधार सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष जीवन मेहता, सचिव प्रकाश राय कोषाध्यक्ष भैरव राय, नरेश राय आदि ने आयोजन में सहयोग किया।