फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Hang Prison Construction

जेल होती तो बच जाते लाखों के खर्च से

Fri, 11 Dec 2015 10:18 PM IST
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत Updated Fri, 11 Dec 2015 10:18 PM IST
विज्ञापन
Hang Prison Construction

इस वक्त चंपावत जिले के सात मुल्जिम 135 किमी दूर अल्मोड़ा जेल में हैं। चंपावत के जिला बनने के करीब 18 साल बाद भी न तो जिला जेल बन सकी और न ही वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा है। अब तक अल्मोड़ा से चंपावत पेशी पर लाने-ले जाने और सुरक्षा में करीब एक करोड़ रुपये बेजा खर्च हो चुके हैं।

विज्ञापन


जिले के विचाराधीन कैदियों को अमूमन लोहाघाट बंदीगृह में रखा जाता है, मगर ये बंदीगृह मानकों के अनुरूप नहीं है। बंदीगृह के प्रभारी ईश्वरी राम का कहना है कि बंदीगृह में इस वक्त 23 कैदी हैं, जबकि 6 कैदियों को अल्मोड़ा शिफ्ट किया गया है। यहां का बंदीगृह न केवल कामचलाऊ है, बल्कि उसकी क्षमता भी महज 24 कैदियों की है। एक महिला बैरक सहित कुल चार कमरे हैं।
विज्ञापन


जिला शासकीय अधिवक्ता भास्कर मुरारी का कहना है कि जिला जेल नहीं होने से कैदियों को यहां से अल्मोड़ा लाने-ले जाने में होने वाले खर्च के अलावा पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगानी पड़ती है। सप्ताह में चार बार पुलिस वाहन को अल्मोड़ा जाना पड़ता है। कैदियों को अल्मोड़ा लाने-ले जाने के दौरान अब तक दो पुलिसकर्मियों की मौत भी हो चुकी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


दो वर्षों से लटका है जेल निर्माण का काम
जून 2008 में तत्कालीन सीएम बीसी खंडूड़ी ने चंपावत जिला जेल का शिलान्यास भी किया था। इस पर काम शुरू भी हुआ और 1 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जेल की चहारदीवारी में खर्च हो चुकी है, लेकिन दो वर्षों से धन नहीं मिलने से काम लटका है। गोरलचौड़ मैदान के पास निर्माणाधीन जेल भवन के लिए करीब 15 करोड़ रुपये बजट की शासन से मांग की गई है।


लोहाघाट का बंदीगृह कायदे में जेल नहीं है। अलबत्ता व्यवस्था बनाए रखने के लिए छोटे-मोटे कैदियों को इसी बंदीगृह में रखा जाता है, जबकि बड़ी आपराधिक प्रवृत्ति के आरोपियों को अल्मोड़ा भेजा जाता है। यहां से अल्मोड़ा शिफ्ट किए गए कैदियों की पेशी के लिए हफ्ते में कम से कम चार दिन पुलिस वैन की आवाजाही होती है, जिसमें पैसे की बर्बादी के साथ सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस कर्मियों को भेजना होता है। -दिलीप सिंह कुंवर, एसपी, चंपावत।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed