फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   God forbid district shrines blaze

भगवान न करे जिले के धर्मस्थलों में लगे आग

Tue, 12 Apr 2016 10:21 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत Updated Tue, 12 Apr 2016 10:21 PM IST
विज्ञापन
God forbid district shrines blaze
मां पूर्णागिरि धाम के मुख्य मंदिर के पास पैदल रास्तों की दुकानों का ऊपरी हिस्सा। - फोटो : अमर उजाला
केरल के पुत्तिंगल देवी मंदिर में 10 अप्रैल को आतिशबाजी से लगी आग में मरने वालों का आंकड़ा सौ पार करने के बाद धर्मस्थलों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इस वारदात ने हजारों किलोमीटर दूर चंपावत जैसे छोटे जिले में इन दिनों चल रहे मां पूर्णागिरि धाम मेले की सुरक्षा की ओर भी ध्यान खींचा है। हालांकि, 25 मार्च से शुरू इस मेले में सुरक्षा के बंदोबस्त पिछले वर्षों से बेहतर हैं, लेकिन फिर भी खतरा पूरी तरह से टला नहीं है। स्थिति यह है कि भैरव मंदिर से मुख्य मंदिर के बीच करीब तीन किलोमीटर पैदल रूट होने से फायरब्रिगेड वाहन नहीं जा सकता है।
विज्ञापन

मां पूर्णागिरि धाम मेले में राज्य बनने के बाद कोई अग्निकांड तो नहीं हुआ है, मगर अग्नि सुरक्षा व्यवस्था में यहां कई खामियां हैं। गर्मी और फायर सीजन के बीच होने वाले मेले का बड़ा क्षेत्र भी जंगल के बीचोबीच है। बूम से करीब 15 किलोमीटर मुख्य मंदिर तक एरिया में फैले मेला क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा जंगल के बीच है। इस मेला क्षेत्र में प्रसाद, खाने के होटल सहित सैकड़ों दुकानें हैं। होटलों में ज्यादातर गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल होता है। मेला क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र में बिजली की सप्लाई जनरेटर द्वारा होती है। मंदिर क्षेत्र में दीप, धूप, अगरबत्ती आदि का उपयोग होता है। इसी तरह जालियों में लगी चुनरी, सूखे नारियल आग लगने पर हालत को और बिगाड़ सकते हैं। मेला समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी का कहना है कि व्यापारी आग से बचाव को रेत और दूसरे जरूरी इंतजाम करते हैं।
विज्ञापन


आग से बचाव को बनी हैं पांच यूनिटें
टनकपुर के अग्निशमन अधिकारी किशन सिंह बिष्ट का कहना है कि आग की वारदातों को रोकने के लिए पांच यूनिट बनाई गई हैं, जिसमें 21 फायर कर्मी तैनात हैं। आग से बचाव को सभी जरूरी उपाय किए गए हैं। टनकपुर, ठुलीगाड़ और भैरव मंदिर में एक-एक अग्निशमन वाहन रखा गया है। इसके अलावा टुन्नास में 2250 एलपीएम का मिनी वॉटर टैंक बनाया गया है। इस टंकी से पेयजल आपूर्ति के साथ ही पंप लगाया गया है, जो आग लगने की सूरत पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। नागा क्षेत्र में 2500 लीटर पानी, एक-एक हजार लीटर के दो प्लास्टिक टंकी के अलावा 9 लीटर फोम और मुख्य मंदिर में 3 लीटर फोम रखा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मां पूर्णागिरि धाम में प्रमुख अग्निकांड एवं नुकसान
-1990 में टुन्नास मेला क्षेत्र में अग्निकांड से 10 लाख का नुकसान
-2006 में टनकपुर मेला क्षेत्र में आग लगने से 1.1 करोड़ का नुकसान
- 2014 में मां काली मंदिर में आग लगने से 25 लाख का नुकसान

मेला क्षेत्र में आग की ये हैं व्यवस्थाएं
- ठुलीगाड़ में फायरब्रिगेड वाहन।
- भैरव मंदिर में पानी की तीन हजार लीटर टंकी।
- टुन्नास में टंकी पानी की टंकी।
- नागा क्षेत्र में टंकी।
- मुख्य मंदिर के पास टंकी।


मां पूर्णागिरि धाम मेला क्षेत्र में आग से बचाव के लिए बेहद पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। बेस कैंप टनकपुर से लेकर मेला क्षेत्र में फायरब्रिगेड और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की गई है। मेला क्षेत्र की दुकानों से प्लास्टिक, पन्नी और आग के नजरिए से संवेदनशील वस्तुओं को हटाया गया है। हर दुकान पर रेत और दूसरे जरूरी इंतजाम किए जाते हैं। -दिलीप सिंह कुंवर, एसपी, चंपावत।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed