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गरीबों का मददगार बना ग्लोबल विजन कैंसर केयर
अमर उजाला ब्यूूूूराे बनबसा (चंपावत)।
Updated Sat, 03 Feb 2018 10:42 PM IST
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ग्लोबल कैंसर केयर एवं सामाजिक संस्था के निदेशक डीबी चंद
- फोटो : अमर उजाला
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बनबसा स्थित ग्लोबल कैंसर केयर एवं सामाजिक संस्था ने न केवल कैंसर के खिलाफ लोगों को जागरूक किया है, बल्कि निर्धनों के इलाज में भी बढ़ चढ़ कर हाथ बंटाया है। यह संस्था बीते पांच वर्ष में 40 निर्धन लोगों का उपचार करवा चुकी है। बनबसा स्थित इस कार्यालय की मदद से छह मरीजों को रोग से निजात भी मिली। मगर डेढ़ वर्ष पूर्व इस संस्था का बनबसा स्थित कार्यालय बंद हो चुका है। अलबत्ता अब संस्था उत्तराखंड के निर्धन कैंसर मरीजों के लिए मुख्यालय पुणे से मदद कर रही है। यह संस्था पांच व्यवसायियों के आर्थिक सहयोग से संचालित हो रही है।
ग्लोबल विजन कैंसर केयर संस्था ने 2011 में बनबसा में स्थापित होने के बाद पांच वर्षों में निर्धन वर्ग के कैसर पीड़ितों को आर्थिक मदद देने के अलावा कई जागरूकता शिविरों का आयोजन भी किया गया। 13 शिविर लगाकर कैंसर के लक्षण वाले लोगों को परीक्षण कराया। संस्था के उत्तराखंड प्रभारी रहे उत्तम चंद ने बताया कि करीब पांच वर्षों में संस्था की ओर से कुमाऊं के निर्धन वर्ग के 40 मरीजों को इलाज के लिए 45 लाख रुपये की मदद दी गई।
संस्था के संस्थापक और निदेशक डीबी चंद ने बताया कि देश भर में संस्था ने पांच वर्षों में निर्धन वर्ग के कैंसर पीड़ितों के इलाज पर दस करोड़ रुपये से अधिक की रकम खर्च की है। बताया कि उत्तराखंड में निर्धन वर्ग के कैंसर मरीजों के लिए एक कैंसर अस्पताल बनाना चाहते थे, लेकिन सरकार द्वारा जमीन नहीं दिला पाने से यह योजना नाकाम रही। अलबत्ता देशभर के सभी राज्यों के कार्यालय बंद कर अब संस्था पुणे से संचालित की जा रही है।
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ग्लोबल विजन कैंसर केयर संस्था ने 2011 में बनबसा में स्थापित होने के बाद पांच वर्षों में निर्धन वर्ग के कैसर पीड़ितों को आर्थिक मदद देने के अलावा कई जागरूकता शिविरों का आयोजन भी किया गया। 13 शिविर लगाकर कैंसर के लक्षण वाले लोगों को परीक्षण कराया। संस्था के उत्तराखंड प्रभारी रहे उत्तम चंद ने बताया कि करीब पांच वर्षों में संस्था की ओर से कुमाऊं के निर्धन वर्ग के 40 मरीजों को इलाज के लिए 45 लाख रुपये की मदद दी गई।
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संस्था के संस्थापक और निदेशक डीबी चंद ने बताया कि देश भर में संस्था ने पांच वर्षों में निर्धन वर्ग के कैंसर पीड़ितों के इलाज पर दस करोड़ रुपये से अधिक की रकम खर्च की है। बताया कि उत्तराखंड में निर्धन वर्ग के कैंसर मरीजों के लिए एक कैंसर अस्पताल बनाना चाहते थे, लेकिन सरकार द्वारा जमीन नहीं दिला पाने से यह योजना नाकाम रही। अलबत्ता देशभर के सभी राज्यों के कार्यालय बंद कर अब संस्था पुणे से संचालित की जा रही है।
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