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होली पर सौगात, सूखे खेतों की बुझेगी प्यास
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नेपाल सीमा से लगे खिरद्वारी में बना सौर ऊर्जा लिफ्ट सिंचाई योजना। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
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टनकपुर (चंपावत)। जिले के इकलौते वनरावत गांव खिरद्वारी को होली का तोहफा मिल गया है। 98 लाख रुपये से बनी सौर ऊर्जा लिफ्ट सिंचाई योजना के पूरे होने से 155 की आबादी वाले गांव के सूखे खेतों को सिंचाई की सुविधा मिल गई है।
उपजाऊ जमीन होने के बावजूद खिरद्वारी गांव में सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं है। वित्त वर्ष 2021-22 की जिला योजना से गांव के लिए सौर ऊर्जा सिंचाई योजना मंजूर की गई थी। 98 लाख रुपये की इस योजना को नलकूप खंड टनकपुर ने एक साल से कम समय में पूरा कर लिया है। इस योजना में सिंचाई के लिए 35 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगाए गए हैं। सौर ऊर्जा से ट्यूबवेल चलने से किसानों को बिजली के बिल और डीजल में होने वाले खर्च से भी निजात मिलेगी। संवाद
सौर ऊर्जा सिंचाई योजना को एक साल से कम समय में पूरा कर लिया गया है। इस सिंचाई योजना से 50 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र की सिंचाई हो सकेगी। - जितेंद्र कुमार, जेई, नलकूप खंड, टनकपुर।
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फिलहाल बारिश पर आश्रित है 83 प्रतिशत खेत
चंपावत। चंपावत जिले में खेतों में सिंचाई के लिए किसान अब भी बारिश पर आश्रित है। पहाड़ी क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा की भारी कमी है। जिले में सिर्फ 17 प्रतिशत खेतों में ही सिंचाई की व्यवस्था है। सिंचाई के साधनों की कमी किसानों की मेहनत पर पानी फेर रही है। जिले में 16610 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है लेकिन सिंचाई की सुविधा बमुश्किल 2835 हेक्टेयर क्षेत्र में है। सिंचाई के साधनों की कमी किसान की मेहनत पर भारी पड़ रही है।
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उपजाऊ जमीन होने के बावजूद खिरद्वारी गांव में सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं है। वित्त वर्ष 2021-22 की जिला योजना से गांव के लिए सौर ऊर्जा सिंचाई योजना मंजूर की गई थी। 98 लाख रुपये की इस योजना को नलकूप खंड टनकपुर ने एक साल से कम समय में पूरा कर लिया है। इस योजना में सिंचाई के लिए 35 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगाए गए हैं। सौर ऊर्जा से ट्यूबवेल चलने से किसानों को बिजली के बिल और डीजल में होने वाले खर्च से भी निजात मिलेगी। संवाद
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सौर ऊर्जा सिंचाई योजना को एक साल से कम समय में पूरा कर लिया गया है। इस सिंचाई योजना से 50 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र की सिंचाई हो सकेगी। - जितेंद्र कुमार, जेई, नलकूप खंड, टनकपुर।
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फिलहाल बारिश पर आश्रित है 83 प्रतिशत खेत
चंपावत। चंपावत जिले में खेतों में सिंचाई के लिए किसान अब भी बारिश पर आश्रित है। पहाड़ी क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा की भारी कमी है। जिले में सिर्फ 17 प्रतिशत खेतों में ही सिंचाई की व्यवस्था है। सिंचाई के साधनों की कमी किसानों की मेहनत पर पानी फेर रही है। जिले में 16610 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है लेकिन सिंचाई की सुविधा बमुश्किल 2835 हेक्टेयर क्षेत्र में है। सिंचाई के साधनों की कमी किसान की मेहनत पर भारी पड़ रही है।