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सूखे की मार से किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
Updated Fri, 12 Jan 2018 11:08 PM IST
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लोहाघाट के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा न होने के कारण सूखे खेतों को दिखाता किसान
- फोटो : अमर उजाला
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लंबे समय से बारिश नहीं होने से जिले में फसलें सूखे की चपेट पर आ गई है। सूखे के कारण किसानों के खेतों में गेहूं आदि की फसलें जम तक नहीं पाई हैं, जहां जमी हैं वहां फसलों की बढ़त पूरी तरह से रुक गई है। दूसरी तरफ इन दिनों भारी मात्रा में गिर रहा है, जो सब्जियों की फसल को चौपट कर रहा है।
चंपावत जिले में करीब 8300 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बुवाई की गई है। रबी की फसल में मुख्य रूप से गेहूं की खेती होती है। लेकिन इस वक्त जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर-बनबसा को छोड़ अधिकांश हिस्सों में गेहूं की फसल जम नहीं पाई है। मुख्य कृषि अधिकारी एस कुमार का कहना है कि बारिश नहीं होने से गेहूं जम नहीं पाए हैं। बारिश नहीं होने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है।
किसान महेश चंद्र, सचिन, जोगेंद्र सिंह, राम सिंह हयात राम, प्रहलाद राम आदि काश्तकारों का कहना है कि अधिकांश काश्तकारों द्वारा बैंकों या अन्य लोगों से कर्ज लेकर मंहगे गेहूं आदि फसलों की बुआई की गई थी, लेकिन सितंबर से बारिश नहीं होने के कारण उनके खेत बंजर पड़े हुए हैं। काश्तकारों का कहना है कि रही-सही कसर पाले ने पूरी कर दी है।
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किसानों का कहना है कि उन्होंने मेहनत कर पालक, मेथी, राई, धनियां, प्याज आदि की फसलें बोई गई हैं, लेकिन पाले के कारण उनके पूरी फसलें जल चुकी हैं। जिससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने प्रशासन से सूखे का सर्वे काश्तकारों को मुआवजा देने की मांग की है। उद्यान सचल दल प्रभारी भूपेंद्र प्रकाश जोशी का कहना है कि बारिश नहीं होने से फसलों का जमाव कम हो रहा है। जहां जमा भी है तो फसलों की बढ़त पर इसका असर पड़ रहा है। जिसके चलते पैदावार पर इसका व्यापक असर पडे़गा।
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चंपावत जिले में करीब 8300 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बुवाई की गई है। रबी की फसल में मुख्य रूप से गेहूं की खेती होती है। लेकिन इस वक्त जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर-बनबसा को छोड़ अधिकांश हिस्सों में गेहूं की फसल जम नहीं पाई है। मुख्य कृषि अधिकारी एस कुमार का कहना है कि बारिश नहीं होने से गेहूं जम नहीं पाए हैं। बारिश नहीं होने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है।
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किसान महेश चंद्र, सचिन, जोगेंद्र सिंह, राम सिंह हयात राम, प्रहलाद राम आदि काश्तकारों का कहना है कि अधिकांश काश्तकारों द्वारा बैंकों या अन्य लोगों से कर्ज लेकर मंहगे गेहूं आदि फसलों की बुआई की गई थी, लेकिन सितंबर से बारिश नहीं होने के कारण उनके खेत बंजर पड़े हुए हैं। काश्तकारों का कहना है कि रही-सही कसर पाले ने पूरी कर दी है।
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किसानों का कहना है कि उन्होंने मेहनत कर पालक, मेथी, राई, धनियां, प्याज आदि की फसलें बोई गई हैं, लेकिन पाले के कारण उनके पूरी फसलें जल चुकी हैं। जिससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने प्रशासन से सूखे का सर्वे काश्तकारों को मुआवजा देने की मांग की है। उद्यान सचल दल प्रभारी भूपेंद्र प्रकाश जोशी का कहना है कि बारिश नहीं होने से फसलों का जमाव कम हो रहा है। जहां जमा भी है तो फसलों की बढ़त पर इसका असर पड़ रहा है। जिसके चलते पैदावार पर इसका व्यापक असर पडे़गा।