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नेपाली ड्रायपोर्ट तक सड़क की भूमि पर पिलर लगाने का काम संपन्न
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बनबसा पचपकरिया में पिलर लगाता एनएचएआई कर्मी।संवाद
- फोटो : TANAKPUR
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बनबसा (चंपावत)। जगबूड़ा पुल से नेपाल सीमा तक नेपाली ड्रायपोर्ट को जोड़ने वाली फोरलेन सड़क के लिए भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। इसके लिए एनएचएआई ने सोमवार को पुलिस, राजस्व, वन विभाग की टीम के साथ 400 मीटर के छूटे हिस्से पर सर्वे पिलर लगा दिए हैं। भूमि, मकान, झोपड़ियां जाने से परेशान पचपकरिया के ग्रामीणों ने मामूली विवाद किया। वे अपनी भूमि और भवन का अधिग्रहण करने से पूर्व विस्थापित करने की मांग कर रहे थे।
जिले के प्रवेश द्वार जगबूड़ा पुल से नेपाली सूखा बंदरगाह को जोड़ने वाली फोरलेन सड़क के लिए एनएचएआई को करीब 3.86 किमी लंबे मार्ग और 60 मीटर चौड़ाई की भूमि का अधिग्रहण करना है। इसके लिए पिलर लगाने का काम सोमवार को पूरा हो गया। इसी माह नौ सितंबर को पिलर लगाने का काम शुरू किया गया था, लेकिन जगबूड़ा पुल के करीब ग्रामीणों के विरोध के कारण करीब 400 मीटर के क्षेत्र में पिलर नहीं लगाए जा सके थे।
एसडीएम हिमांशु कफल्टिया ने बताया कि प्रभावित लोगों को बाजार भाव से चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। भवनों की पैमाइश कर मुआवजा राशि तय की जाएगी। पिलर लगाने के लिए सोमवार को एनएचएआई के अधिकारी एचके जोशी के नेतृत्व में टीम पहुंची थी। वहां राजस्व विभाग से कानूनगो गोविंद गिरि, रजिस्ट्रार कानूनगो प्रदीप जुकरिया, आरएसआई अमर सिंह मंगला, वीरेंद्र पुंडीर, वन दरोगा महिम गिरि, भुवन कांडपाल, एसआई सुमन पंत, नैनराम विश्वकर्मा आदि रहे।
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जिले के प्रवेश द्वार जगबूड़ा पुल से नेपाली सूखा बंदरगाह को जोड़ने वाली फोरलेन सड़क के लिए एनएचएआई को करीब 3.86 किमी लंबे मार्ग और 60 मीटर चौड़ाई की भूमि का अधिग्रहण करना है। इसके लिए पिलर लगाने का काम सोमवार को पूरा हो गया। इसी माह नौ सितंबर को पिलर लगाने का काम शुरू किया गया था, लेकिन जगबूड़ा पुल के करीब ग्रामीणों के विरोध के कारण करीब 400 मीटर के क्षेत्र में पिलर नहीं लगाए जा सके थे।
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एसडीएम हिमांशु कफल्टिया ने बताया कि प्रभावित लोगों को बाजार भाव से चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। भवनों की पैमाइश कर मुआवजा राशि तय की जाएगी। पिलर लगाने के लिए सोमवार को एनएचएआई के अधिकारी एचके जोशी के नेतृत्व में टीम पहुंची थी। वहां राजस्व विभाग से कानूनगो गोविंद गिरि, रजिस्ट्रार कानूनगो प्रदीप जुकरिया, आरएसआई अमर सिंह मंगला, वीरेंद्र पुंडीर, वन दरोगा महिम गिरि, भुवन कांडपाल, एसआई सुमन पंत, नैनराम विश्वकर्मा आदि रहे।
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