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वन पंचायत चौकी का जंगल किया बंद
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
Updated Mon, 05 Feb 2018 11:18 PM IST
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जंगल
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जिला मुख्यालय से लगे वन पंचायत चौकी के ग्रामीणों ने वन एवं पर्यावरण को बचाने के लिए अनूठी पहल शुरू की है। उन्होंने वन पंचायत चौकी के अधीन आने वाले जंगल को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। वन पंचायत की बैठक में इस संबंध में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। तय किया गया कि इस दौरान जंगल में किसी भी महिला अथवा पुरुष को अवैध तरीके से पातन करते पाया जाएगा तो उसके खिलाफ वन विभाग के सहयोग से कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
सोमवार को वन पंचायत सरपंच मीना देवी की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणों का कहना था कि जलौनी लकड़ी को लेकर पंचायत के वनों को काफी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों की आड़ में कई अराजक तत्व भी बहुमूल्य वन संपदा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में पंचायती वन को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर देना ही उचित है। सर्वसम्मति से तय किया गया कि इस दौरान पंचायत के जंगल में किसी को भी अवैध पातन करते पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वन पंचायत सरपंच ने सभी ग्रामीणों से वनों को बचाने में सहयोग देने की अपील भी की। इस मौके पर वन पंचायत सदस्य शंकर सिंह खाती, गीता देउपा, ओम प्रकाश, चतुर सिंह, धर्मानंद बिष्ट आदि ने विचार रखे।
पूर्व में देवी देवताओं को समर्पित किए गए हैं जंगल
चंपावत। वनों को अवैध कटान से बचाने के लिए इससे पूर्व भी कई स्थानों पर जंगलों को देवी देवताओं के नाम पर समर्पित किया गया है। जिसके अच्छे परिणाम भी देखने को मिले हैं। जिला मुख्यालय के समीपवर्ती सेलाखोला और बाजरीकोट वन पंचायतों की ओर से भी अपने वनों को देवी देवताओं को समर्पित किया गया है। दोनों ही स्थानों पर अच्छे पौधे विकसित हो रहे हैं।
सोमवार को वन पंचायत सरपंच मीना देवी की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणों का कहना था कि जलौनी लकड़ी को लेकर पंचायत के वनों को काफी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों की आड़ में कई अराजक तत्व भी बहुमूल्य वन संपदा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में पंचायती वन को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर देना ही उचित है। सर्वसम्मति से तय किया गया कि इस दौरान पंचायत के जंगल में किसी को भी अवैध पातन करते पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वन पंचायत सरपंच ने सभी ग्रामीणों से वनों को बचाने में सहयोग देने की अपील भी की। इस मौके पर वन पंचायत सदस्य शंकर सिंह खाती, गीता देउपा, ओम प्रकाश, चतुर सिंह, धर्मानंद बिष्ट आदि ने विचार रखे।
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पूर्व में देवी देवताओं को समर्पित किए गए हैं जंगल
चंपावत। वनों को अवैध कटान से बचाने के लिए इससे पूर्व भी कई स्थानों पर जंगलों को देवी देवताओं के नाम पर समर्पित किया गया है। जिसके अच्छे परिणाम भी देखने को मिले हैं। जिला मुख्यालय के समीपवर्ती सेलाखोला और बाजरीकोट वन पंचायतों की ओर से भी अपने वनों को देवी देवताओं को समर्पित किया गया है। दोनों ही स्थानों पर अच्छे पौधे विकसित हो रहे हैं।
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